

महाराष्ट्र के हिंगोली में हवा की बिगड़ती सेहत ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। 08 अगस्त 2026 को यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 319 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में है। महज एक दिन में हिंगोली का एक्यूआई 187 से बढ़कर 319 पहुंच गया, यानी प्रदूषण में 132 अंकों का तेज उछाल आया।
यहां हवा में ओजोन का दबदबा रहा और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 430 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के 248 शहरों में तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। करीब 44.4 फीसदी यानी 110 शहरों में हवा ‘बेहतर’, जबकि 46.4 फीसदी यानी 115 शहरों में वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ रही।
हालांकि 22 शहरों में हवा ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है और हिंगोली सबसे गंभीर स्थिति वाला शहर रहा।
प्रदूषण की सूची में बर्नीहाट (मेघालय), ग्रेटर नोएडा और पाली भी शीर्ष पर रहे। दूसरी ओर कर्नाटक का मदिकेरी महज 14 एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा। दिल्ली में एक्यूआई 63 पर स्थिर रहा, जबकि फरीदाबाद में यह 86 से बढ़कर 93 पहुंच गया है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 08 अगस्त 2026 को देश में एक बार फिर हिंगोली सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 319 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (07 अगस्त) को हिंगोली में सूचकांक 187 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 132 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि हिंगोली की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
हिंगोली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 430 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर हिंगोली की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 22.8 गुणा खराब है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण के स्तर में कोई बदलाव नहीं आया है। दिल्ली में कल एक्यूआई 63 दर्ज किया गया था, जो आज भी 63 पर बना हुआ है। मतलब की स्थिति जस की तस है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-08 अगस्त को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 86 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 93 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 7 अंको के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी संतोषजनक श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 08 अगस्त 2026 को 248 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 44.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 46.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 9.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 3.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। वहीं मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 12 फीसदी का कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बर्नीहाट (मेघालय) (158) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (142) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पाली (134) चौथे स्थान पर है। पीथमपुर (128) – गुम्मिडीपूंडी (126) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
भीलवाड़ा (122) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में वातवा (121), गोरखपुर (120) और पानीपत (119) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के दो शहर (पाली, भीलवाड़ा) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बर्नीहाट (मेघालय), पाली, गुम्मिडीपूंडी, बर्नीहाट (असम), समस्तीपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं पीथमपुर, भीलवाड़ा, वातवा, गोरखपुर, पानीपत, मंडी गोबिंदगढ़, टोंक, उदयपुर, गडग, सिवान, सोनीपत, विशाखापत्तनम, जैसलमेर, मंडीदीप आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 44.4 फीसदी यानी 110 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, बुलंदशहर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चूरू, कोयंबटूर, देहरादून, धौलपुर, डोंबिवली, फतेहाबाद, फतेहपुर सिकरी, फिरोजाबाद, गजरौला, गया, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, जालंधर, जलगांव, जलना, कलबुर्गी, करौली, करनाल, किशनगंज, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाद, मैहर, मानेसर, मथुरा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 115 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेगूसराय, भागलपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, बीकानेर, बूंदी, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, दमोह, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फरीदाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, गुरुग्राम, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, कारवार, कटनी, खैरथल, खन्ना, खोरा, खुर्जा, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़ आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 22 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें भीलवाड़ा, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), गडग, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, जैसलमेर, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, पाली, पलवल, पानीपत, पीथमपुर, समस्तीपुर, सिलीगुड़ी, सिवान, सोनीपत, टोंक, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं। वहीं हिंगोली (319) में वायु गुणवत्ता बेहद खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 248 में से 110 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 115 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 07 अगस्त को भी यह आंकड़ा 115 दर्ज किया गया था।
22 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर हिंगोली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 319 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (07 अगस्त) को हिंगोली में सूचकांक 187 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 132 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण के स्तर में कोई बदलाव नहीं आया है। दिल्ली में कल एक्यूआई 63 दर्ज किया गया था, जो आज भी 63 पर बना हुआ है। मतलब की स्थिति जस की तस है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 86 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 93 पर पहुंच गया।
इसके साथ ही 7 अंको के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी संतोषजनक श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 08 अगस्त को पाली (134) चौथे स्थान पर है, वहीं बर्नीहाट (मेघालय) (158) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (142) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 49, गाजियाबाद में 54, गुवाहाटी में 32, गुरूग्राम में 87, नोएडा में 55, ग्रेटर नोएडा में 142 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 43 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 72, चेन्नई में 79, चंडीगढ़ में 42, हैदराबाद में 46, जयपुर में 75 और पटना में 66 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 110 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आगरा, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, बदलापुर, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, बुलंदशहर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चूरू, कोयंबटूर, देहरादून, धौलपुर, डोंबिवली, फतेहाबाद, फतेहपुर सिकरी, फिरोजाबाद, गजरौला, गया, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, जालंधर, जलगांव, जलना, कलबुर्गी, करौली, करनाल, किशनगंज, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाद, मैहर, मानेसर, मथुरा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सहरसा, सांगली, शिलांग, शिवमोगा, सीकर, सिंगरौली, सोलापुर, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, उल्हासनगर, वापी, विरार, वृंदावन, यादगीर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदाबाद, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बाड़मेर, बेगूसराय, भागलपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, बीकानेर, बूंदी, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, दमोह, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फरीदाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, गुरुग्राम, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, कारवार, कटनी, खैरथल, खन्ना, खोरा, खुर्जा, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, सिलचर, सिरोही, सिरसा, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, टेन्सा, थूथुकुडी, तिरुपति, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, यमुना नगर आदि 115 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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