

देश में वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 23 मई 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि देश के 237 शहरों में से करीब 44 फीसदी शहरों की हवा चिंताजनक बनी हुई है।
इस दौरान हरियाणा का चरखी दादरी देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 338 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। सिर्फ 24 घंटों में यहां प्रदूषण 54 अंक बढ़ा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि वहां पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।
दूसरी तरफ कर्नाटक का मदिकेरी देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 19 रिकॉर्ड किया गया। यानी चरखी दादरी की हवा मदिकेरी की तुलना में 17 गुना ज्यादा जहरीली रही।
सिंगरौली (311), श्रीगंगानगर (299) और ग्रेटर नोएडा (276) भी सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे।
राजधानी दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़ा है और एक्यूआई 195 तक पहुंच गया। विश्लेषण में सामने आया है कि देश के कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 जैसे महीन प्रदूषक कण हवा में हावी हैं, जो लोगों के फेफड़ों, दिल और दिमाग पर गंभीर असर डाल सकते हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 23 मई 2026 को देश में चरखी दादरी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 338 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल चरखी दादरी में सूचकांक 284 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 54 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि चरखी दादरी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
चरखी दादरी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 19 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर चरखी दादरी की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 17 गुणा खराब है।
इससे पहले कल सिंगरौली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 315 दर्ज किया गया था। वहीं आज सिंगरौली में 4 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 311 पर पहुंच गया है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 183 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 195 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 12 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 175 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 160 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 23 मई 2026 को 237 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 14.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 41.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 44.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 17.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 8.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 13 फीसदी का उछाल आया है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 11.1 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सिंगरौली (311) दूसरे जबकि श्री गंगानगर (299) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा (276) चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद- पंचगांव में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
दौसा (258) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में अंगुल (251), मेरठ (244), बुलंदशहर (235) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और बुलंदशहर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, गाजियाबाद, पंचगांव, मेरठ, भिवानी, मानेसर, जींद, बर्नीहाट (असम), बहादुरगढ़, दिल्ली, धारूहेड़ा, कैथल, जयपुर, उदयपुर, भिवाड़ी, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, फरीदाबाद, गुरुग्राम, लखनऊ, आगरा, वाराणसी, अंबाला, गुम्मिडीपूंडी, करनाल, बक्सर, कानपुर, बिलीपाड़ा, मेहसाणा, पंचकुला आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं सिंगरौली, ग्रेटर नोएडा, दौसा, बुलंदशहर, बल्लभगढ़, नोएडा, बीकानेर, चूरू, बागपत, मुजफ्फरनगर, सीकर, हापुड़, भीलवाड़ा, कुरुक्षेत्र, जैसलमेर, पाली, झुंझुनू, करौली, टोंक, पानीपत, सवाई माधोपुर, जोधपुर, खुर्जा, अजमेर, ग्वालियर, चंद्रपुर, जालोर, कटनी, सिरोही, बाड़मेर, पटियाला, भरतपुर, हनुमानगढ़, बारां, विशाखापत्तनम, पीथमपुर, प्रतापगढ़, सहरसा, कोटा, यमुना नगर, रोहतक, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, मुरादाबाद, सिरसा, अलवर, फिरोजाबाद, सोनीपत, वृंदावन, दमोह, वातवा, भोपाल, फतेहाबाद, अमरावती (आंध्रप्रदेश), देवास, जोरापोखर, अगरतला, बांसवाड़ा, नयागढ़, पटना, खन्ना, झालावाड़, अमृतसर, बारीपदा, सागर, बूंदी, रतलाम, बारबिल, गया आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 14.3 फीसदी यानी 34 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, गंगटोक, गुवाहाटी, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, मदिकेरी, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, रामनगर, रूपनगर, सांगली, शिवमोगा, शिवसागर, श्रीनगर, सूरत, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 98 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भावनगर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, छपरा, चित्तूर, कटक, देहरादून, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गोरखपुर, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झांसी, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोप्पल, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, पलवल, पंपोर, परभणी, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायपुर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 87 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, आगरा, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, बद्दी, बागपत, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बिलीपाड़ा, बूंदी, बक्सर, चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, डूंगरपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नयागढ़, पाली, पंचकुला, पानीपत, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रतलाम, रोहतक, सागर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सिरसा, सोनीपत, टोंक, उदयपुर, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में अंगुल, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवानी, बीकानेर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), दौसा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, जींद, मानेसर, मेरठ, नोएडा, पंचगांव, श्री गंगानगर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं चरखी दादरी (338), सिंगरौली (311) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 237 में से 34 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 98 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 22 मई को यह आंकड़ा 107 दर्ज किया गया था।
87 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज चरखी दादरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 338 दर्ज किया गया। इससे पहले कल चरखी दादरी में सूचकांक 284 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 54 अंकों का भारी उछाल आया है। इसके साथ ही आज चरखी दादरी में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से बेहद खराब' हो गई है।
इससे पहले कल सिंगरौली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 315 दर्ज किया गया था। वहीं आज सिंगरौली में 4 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 311 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 183 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 195 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 12 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 175 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 160 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 23 मई को ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं सिंगरौली (311) दूसरे, जबकि श्री गंगानगर (299) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 147, गाजियाबाद में 266, गुवाहाटी में 50, गुरूग्राम में 160, नोएडा में 215, ग्रेटर नोएडा में 276 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 47 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 147, चेन्नई में 67, चंडीगढ़ में 76, हैदराबाद में 73, जयपुर में 179 और पटना में 110 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 34 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंकलेश्वर, बागलकोट, बेतिया, भिलाई, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, गंगटोक, गुवाहाटी, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, मदिकेरी, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, रामनगर, रूपनगर, सांगली, शिवमोगा, शिवसागर, श्रीनगर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, उल्हासनगर, विरुधुनगर शामिल हैं।
वहीं अहमदाबाद, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बरेली, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, छपरा, चित्तूर, कटक, देहरादून, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गोरखपुर, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झांसी, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोप्पल, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, पलवल, पंपोर, परभणी, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, ऋषिकेश, राउरकेला, सतना, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिवान, सोलापुर, सुआकाती, तालचेर, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमकुरु, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा आदि 98 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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