

अध्ययन में केवल 20 प्रतिशत जंगली सांप ही पूरी तरह स्वस्थ पाए गए, बाकी सभी में किसी न किसी प्रकार का संक्रमण मौजूद था।
अध्ययन में 500 से अधिक सांपों में 63 प्रतिशत में साल्मोनेला बैक्टीरिया पाया गया, जो सबसे आम संक्रमण साबित हुआ।
लगभग 53 प्रतिशत सांपों में हेपेटोजोन परजीवी मिला, जो जंगली सांपों में व्यापक रूप से फैला हुआ संक्रमण माना गया है।
करीब 44 प्रतिशत सांपों में एक से अधिक संक्रमण पाए गए, जिससे कई तरह के संक्रमणों की गंभीर समस्या उजागर हुई है।
पिग्मी रैटलस्नेक में फंगल बीमारी और फेफड़ों का परजीवी सबसे अधिक पाया गया, जिससे उनकी सेहत गंभीर रूप से प्रभावित हुई।
हाल ही में वैज्ञानिकों ने अमेरिका के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में जंगली सांपों के स्वास्थ्य को लेकर एक अहम अध्ययन किया है। इस शोध में पता चला है कि जंगली सांपों में कई तरह के रोग एक साथ पाए जा रहे हैं, जिनमें फंगल संक्रमण, बैक्टीरिया और परजीवी शामिल हैं। यह स्थिति सांपों की आबादी के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। यह अध्ययन फ्रंटियर्स इन वेटेरिनरी साइंस नामक वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
इस शोध में 500 से अधिक सांपों की जांच की गई, जो 29 अलग-अलग प्रजातियों से संबंधित थे। वैज्ञानिकों का उद्देश्य यह समझना था कि अलग-अलग जगहों और अलग समय में सांपों के स्वास्थ्य पर कौन-कौन से रोग सबसे ज्यादा प्रभाव डाल रहे हैं।
सांपों में कई तरह के संक्रमण एक साथ पाए गए
अध्ययन में यह सामने आया कि केवल लगभग 20 प्रतिशत सांप ही ऐसे थे जिनमें कोई भी संक्रमण नहीं पाया गया। बाकी अधिकतर सांप किसी न किसी बीमारी से प्रभावित थे। सबसे आम संक्रमणों में साल्मोनेला एंटेरिका नामक बैक्टीरिया पाया गया, जो लगभग 63 प्रतिशत सांपों में मिला। इसके अलावा हेपेटोजून नामक परजीवी भी 53 प्रतिशत सांपों में पाया गया।
वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि कुछ सांपों में माइकोप्लाज़्मा नामक बैक्टीरिया मौजूद था, जो श्वसन संबंधी बीमारियां पैदा कर सकता है। यह पहली बार है जब यह बैक्टीरिया अमेरिका के जंगली सांपों में पाया गया है।
फंगल बीमारी ओफिडियोमाइकोसिस बनी बड़ा खतरा
सबसे चिंताजनक बीमारी ओफिडियोमाइकोसिस है, जिसे आम भाषा में सांपों की फंगल बीमारी कहा जाता है। यह बीमारी ओफिडियोमाइसेस ओफिडियोला नामक फंगस के कारण होती है। यह फंगस सांपों की त्वचा पर हमला करता है और घाव और संक्रमण पैदा करता है।
जिन सांपों की त्वचा पर घाव पाए गए, उनमें से 30 प्रतिशत से अधिक में यह फंगल संक्रमण पाया गया। जबकि जिन सांपों में कोई बाहरी घाव नहीं था, उनमें यह संक्रमण बहुत कम यानी लगभग दो प्रतिशत में पाया गया।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह फंगल बीमारी धीरे-धीरे सांपों की सेहत को कमजोर कर देती है और उन्हें अन्य बीमारियों के लिए अधिक संवेदनशील बना देती है।
फेफड़ों का परजीवी और रैटलस्नेक पर सबसे ज्यादा असर
इस अध्ययन में एक और खतरनाक परजीवी रैलिटिएला ओरिएंटैलिस पाया गया, जिसे आमतौर पर “स्नेक लंगवर्म” यानी सांपों का फेफड़ों का परजीवी कहा जाता है। यह परजीवी सांपों के फेफड़ों में रहता है और उनकी सांस लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
यह परजीवी खासकर पिग्मी रैटलस्नेक में बहुत ज्यादा पाया गया। अध्ययन में 34 रैटलस्नेक में से 14 में यह परजीवी मिला, और कई सांपों में फंगल बीमारी भी साथ-साथ पाई गई। वैज्ञानिकों का मानना है कि रैटलस्नेक की कुछ प्रजातियां पहले से ही कमजोर स्वास्थ्य और मानवजनित कारणों से अधिक संवेदनशील हो सकती हैं।
एक साथ कई बीमारियां बन रही बड़ी समस्या
शोध में यह भी पाया गया कि लगभग 44 प्रतिशत सांप एक से अधिक संक्रमणों से ग्रस्त थे। कुछ सांपों में तो तीन या चार अलग-अलग रोग एक साथ पाए गए। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब एक जानवर पहले से बीमार होता है, तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और वह अन्य संक्रमणों की चपेट में आसानी से आ जाता है।
भौगोलिक अंतर और पर्यावरण का असर
अध्ययन में यह भी देखा गया कि अलग-अलग क्षेत्रों में संक्रमण की स्थिति अलग-अलग थी। जॉर्जिया राज्य में फंगल संक्रमण अधिक पाया गया, जबकि फ्लोरिडा में फेफड़ों का परजीवी अधिक मिला। इससे यह पता चलता है कि पर्यावरण और स्थान भी इन बीमारियों के फैलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संरक्षण के लिए गंभीर चेतावनी
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जंगली सांपों में बढ़ते संक्रमण उनके अस्तित्व के लिए खतरा बन सकते हैं। इसके अलावा, कुछ आक्रमक (इनवेसिव) प्रजातियां भी इन परजीवियों को फैलाने में भूमिका निभा सकती हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि जानवरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने या जंगल में छोड़ने से पहले उनके स्वास्थ्य और संभावित रोगों की जांच बहुत जरूरी है।
यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि जंगली सांप केवल एक बीमारी से नहीं, बल्कि कई प्रकार के संक्रमणों के संयुक्त प्रभाव से प्रभावित हो रहे हैं। अगर इस स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में सांपों की कई प्रजातियों के लिए यह गंभीर खतरा बन सकता है।