

जोवाई-बायपास सड़क निर्माण के दौरान अवैध मलबा डंपिंग और पर्यावरणीय लापरवाही के कारण मिंटडू की सहायक नदियों को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
संयुक्त समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि निर्माण मलबे से न केवल लियार पामकाम और म्यंक्रेम धाराएं प्रभावित हुई हैं, बल्कि मिंटडू नदी का जलाशय, मछली अभयारण्य और जोवाई शहर की पेयजल आपूर्ति भी खतरे में आ गई है।
रिपोर्ट में पर्यावरण सुरक्षा उपायों की कमी, बफर जोन का अभाव और डंपिंग नियमों के उल्लंघन को नुकसान का मुख्य कारण बताया गया है। समिति ने इस क्षेत्र को क्रिटिकल कैचमेंट एरिया घोषित करने और सख्त पर्यावरणीय नियम लागू करने की सिफारिश की है।
जोवाई-बायपास सड़क निर्माण के दौरान भारी मात्रा में मलबा डंपिंग के कारण लियार पामकाम और म्यंक्रेम नदियों को भारी नुकसान पहुंचा है। यह दोनों मिंटडू नदी की सहायक धाराएं है। वहीं जोवाई-बायपास सड़क की बात करें तो इसकी कुल लम्बाई 5.915 किलोमीटर है। यह सड़क नेशनल हाईवे 40E और एनएच-44 को जोड़ती है।
यह जानकारी 10 मार्च 2026 की संयुक्त समिति की अंतरिम रिपोर्ट में दी गई, जिसे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के 4 फरवरी 2026 को दिए आदेश पर मेघालय राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमएसपीसीबी) ने रिकॉर्ड में रखा है।
रिपोर्ट में साझा जानकारी के मुताबिक जोवाई बायपास सड़क का निर्माण मिंटडू नदी के पास पहाड़ी क्षेत्र में हो रहा है। संयुक्त समिति ने 23 फरवरी 2026 को इस क्षेत्र का निरीक्षण किया और मिंटडू नदी के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया। निरीक्षण में पाया गया कि सड़क निर्माण अभी भी जारी है और कई जगहों पर पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया गया। जलाशय का निरीक्षण करने पर पाया गया कि मलबा और अवैध डंपिंग के कारण उसकी क्षमता कम हो गई है।
निर्माण, मलबा और पर्यावरणीय लापरवाही
निरीक्षण में यह भी सामने आया है कि मौजूदा ठेकेदार के अधीन निर्माण और मलबा डंपिंग जारी है। समिति ने देखा कि ठेकेदार पर्यावरण सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं कर रहा है।
लियार पामकाम के पास मिट्टी कटी है और मलबा सीधे ढलान पर डाला गया है। इस दौरान सुरक्षा से जुड़े उपाय जैसे सिल्ट फेन्सेस या रिटेंशन वॉल का निर्माण नहीं किया गया। हालांकि नदी के पास सैंडबैग पैलासाइडिंग लगाई गई थी, जोकि पहले से डाले गए मलबे को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं थी।
म्यंक्रेम के पास भी निर्माण कार्य सीधे मलबा धारा में फेंकने से जुड़े पाए गए। इसी तरह त्रिओंग रियांग के पास निर्माण मलबा सीधे नदी की ओर धकेला जा रहा था। लियार पामकाम के डाउनस्ट्रीम हिस्से में देखा गया कि पहाड़ी से आने वाला मलबा भारी बारिश के दौरान धारा के साथ बहता जा रहा है।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने समिति को बताया कि ठेकेदार ने धान के प्रभावित खेतों से मलबा हटाने का काम किया है। लेकिन निरीक्षण में पाया गया कि खेतों के पास मलबे को पूरी तरह हटाने के लिए अभी और कार्रवाई की जरूरत है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने जानकारी दी है कि सफाई पूरी नहीं हो सकी, क्योंकि खेतों के मालिकों ने भारी बारिश के दौरान बाढ़ से बचाने के लिए नाले के दोनों किनारों पर कुछ मलबा रखने का अनुरोध किया था।
निरीक्षण में आवासीय क्षेत्र और प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान के भी सीधे प्रमाण मिले हैं। उदाहरण के लिए, लियार पामकाम अभी भी पूरी तरह से मलबे से बंद है। मिंटडू नदी और पीएचई जलाशय में भारी तलछट जमा हुई है। जलाशय के डाउनस्ट्रीम स्थित मछली अभयारण्य भी इस तलछट से प्रभावित हो रहा है।
जल आपूर्ति पर भी असर
संयुक्त समिति ने बताया कि जोवाई शहर का पीएचई विभाग मिंटडू नदी से पीने का पानी छोटे बांध या जलाशय के माध्यम से लेता है। जलाशय का इनटेक सड़क निर्माण साइट से करीब पांच से छह किलोमीटर नीचे की ओर स्थित है, जबकि जल उपचार संयंत्र से यह करीब डेढ़ से दो किलोमीटर दूर है। तलछट जमा होने के कारण जलाशय की क्षमता कम हो गई है। मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियों का दूषित पानी सीधे जलाशय में जा रहा है। यह जलाशय जोवाई की जलापूर्ति योजनाओं को आपूर्ति करता है।
पीडब्ल्यूडी के प्रतिनिधि ने जानकारी दी है कि निर्माण कंपनी ने प्रभावित धान खेतों के मालिकों को मुआवजे का भुगतान कर दिया है।
लेकिन समिति ने नोट किया कि शिकायतों के बावजूद परियोजना स्थल के आसपास मलबा डंपिंग जारी थी। डेमथरिंग में निर्धारित डंपिंग साइट का अधिकतर हिस्सा इस्तेमाल नहीं किया गया, जो दर्शाता है कि अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों पर कड़ी निगरानी नहीं की गई।
लियार पामकाम पर पीडब्ल्यूडी का कहना था कि ढलान की “सजावट और वृक्षारोपण” उनके डीपीआर में शामिल नहीं है। यह पर्यावरण संरक्षण को परियोजना योजना में शामिल करने में गंभीर कमी को दर्शाता है। निरीक्षण में यह भी पाया गया कि किसी प्रभावी बफर जोन का निर्माण नहीं हुआ है, क्योंकि निर्माण और मलबा धाराओं और नदी के किनारे तक फैला हुआ था।
संयुक्त समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मेघालय सरकार से अनुरोध किया है कि मिंटडू नदी के जिंगकिएंग मिंटडू से पीएचई जल स्रोत तक के इलाके को मेघालय कैचमेंट एरिया संरक्षण अधिनियम, 1990 के तहत “क्रिटिकल कैचमेंट एरिया” घोषित किया जाए और सभी निर्माण गतिविधियों के लिए पर्यावरण सुरक्षा के कड़े नियम लागू किए जाएं।
मेघालय सरकार ने 2023 में जल निकाय दिशानिर्देश जारी किए थे, जो नदियों और अन्य जल निकायों के आसपास की गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है, पीडब्ल्यूडी ने डंपिंग के लिए एक विशेष साइट निर्धारित की है, लेकिन दस्तावेज पूरे न होने के कारण अभी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति नहीं मिली है। निर्माण के दौरान तत्काल उपायों के तौर पर सैंडबैग पैलासाइडिंग और ढलान को स्थिर करने के प्रयास किए गए हैं। लेकिन यह उपाय पहले से डाले गए मलबे को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सड़क निर्माण के कई हिस्सों में वृक्षारोपण किया गया है, लेकिन पौधों के मरने की दर अधिक है। ऐसे में परियोजना प्रबंधक को और अधिक वृक्षारोपण करने की आवश्यकता है। संक्षेप में, जोवाई-बायपास सड़क परियोजना ने मिंटडू और उसकी सहायक नदियों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है, ऐसे में पर्यावरण संरक्षण के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।