नदी से नाला बनी बलवंती: 17 नालों में घुटती धारा, गायब हुआ प्राकृतिक बहाव

संयुक्त जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है। नदी का प्राकृतिक प्रवाह पूरी तरह गायब हो चुका है और 17 नालों का गंदा पानी ही बह रहा है।
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
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सारांश
  • मध्य प्रदेश के धार जिले में बहने वाली बलवंती नदी की हकीकत दावों से बिल्कुल उलट सामने आई है।

  • संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट ने साफ किया है कि यह नदी अब अपने मूल स्वरूप में नहीं बची, बल्कि 17 नालों के गंदे पानी में घुटता एक नाला बन चुकी है।

  • नदी का प्राकृतिक प्रवाह पूरी तरह खत्म हो चुका है, न उद्गम पर पानी है, न रास्ते में कहीं साफ जल दिखाई देता है। बदनावर नगर परिषद क्षेत्र में केवल घरेलू सीवेज ही इसकी धारा को जीवित रखे हुए है।

  • रिपोर्ट यह भी उजागर करती है कि नदी का कैचमेंट क्षेत्र तक चिन्हित नहीं है और संरक्षण के लिए जरूरी बफर जोन का अभाव है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। हालांकि नगर परिषद ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और नालों के डायवर्जन जैसी योजनाएं प्रस्तावित की हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम अधूरा है और दावे वास्तविकता से मेल नहीं खाते।

  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर हुई इस जांच के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर परिषद पर 96 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। बलवंती की यह स्थिति केवल एक नदी की कहानी नहीं, बल्कि शहरी लापरवाही और कमजोर क्रियान्वयन की गंभीर चेतावनी है।

मध्य प्रदेश के धार जिले के बदनावर नगर परिषद क्षेत्र में बहने वाली बलवंती नदी आज अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। 17 नाले सीधे नदी में गिरते पाए गए, जिससे पूरी धारा गंदे पानी से भर गई है। नदी में कहीं भी प्राकृतिक जल प्रवाह दिखाई नहीं दिया। न तो इसके उद्गम पर और न ही पूरे रास्ते में पानी दिखाई दिया।

16 अप्रैल 2026 को प्रस्तुत संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट में यह चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है।

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि नदी अपने उद्गम से लेकर पूरे रास्ते में सूखी पड़ी है, उसमें प्राकृतिक जल प्रवाह गायब हो चुका है। केवल नगर परिषद क्षेत्र के भीतर घरेलू सीवेज ही इसमें बह रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, नदी का कैचमेंट क्षेत्र अब तक स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं है और नदी के दोनों किनारों पर कोई बफर जोन भी मौजूद नहीं है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी होता है। ऐसे में इसका संरक्षण और मुश्किल हो गया है।

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गौरतलब है कि इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 10 फरवरी 2026 को इस मामले की जांच के लिए संयुक्त समिति का गठन किया था।

नदी नहीं, नाला: 17 नालों में घुटती बलवंती

बलवंती एक मौसमी नदी है, जो धार जिले के बदनावर तहसील के पिंगरोला (पिटगरा गांव के पास) से निकलती है। यह बारहमासी नदी नहीं है, इसमें सिर्फ बारिश के मौसम में ही पानी आता है, जबकि साल के बाकी समय यह सूखी रहती है और बदनावर नगर परिषद की सीमा में इसमें महज घरेलू सीवेज ही बहता है।

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इंस्पेक्शन के अलावा, रिपोर्ट में बदनावर नगर परिषद द्वारा उठाए कदमों का भी जिक्र है।

शहर के सीवेज को साफ करने के लिए तीन एमएलडी क्षमता का एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) प्रस्तावित किया गया है, जो आधुनिक सीक्वेंसिंग बैच रिएक्ट (एसबीआर) तकनीक पर आधारित होगा। इसके तहत 17 नालों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने, इंटरसेप्शन और डायवर्जन ढांचा बनाने, रिटेनिंग वॉल और एक स्टॉप डैम बनाने की भी योजना है।

दावे बनाम सच्चाई

निरीक्षण के समय सीवर नेटवर्क बिछाने का काम जारी मिला, जिसे जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, नगर परिषद की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नदी बिना किसी रुकावट के अपने प्राकृतिक मार्ग में बह रही है। साथ ही इसके दोनों तरफ पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है।

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लेकिन संयुक्त समिति की जांच में सामने आई जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आती है, जहां नदी का स्वरूप एक नाले में तब्दील होता दिख रहा है।

संयुक्त समिति ने अपनी रिपोर्ट में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की गई कार्रवाई का भी जिक्र किया है। साझा जानकारी के मुताबिक बोर्ड ने पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन पर बदनावर नगर परिषद पर 96 लाख रुपए का पर्यावरण मुआवजा लगाया है।

इसकी वसूली के लिए धार के कलेक्टर को पत्र भेजा गया है। साथ ही, नगर पालिका के मुख्य अधिकारी (सीएमओ) को जल अधिनियम 1974 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

ऐसे में अगर हालात नहीं बदले, तो बलवंती नदी नक्शों में भले जिंदा रहे, लेकिन जमीन पर उसकी पहचान सिर्फ एक गन्दा नाला बनकर रह जाएगी। अब सवाल सिर्फ एक नदी का नहीं, बल्कि उस सोच का है जो नदियों को नाला बनने देती है, क्या कार्रवाई कागज से निकलकर जमीन तक पहुंचेगी, या बलवंती यूं ही दम तोड़ती रहेगी?

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