आमी नदी में गंदगी पर एनजीटी सख्त, संयुक्त समिति की रिपोर्ट खारिज

संयुक्त समिति की रिपोर्ट में औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज प्रबंधन के गंभीर पहलुओं की अनदेखी ने बढ़ाई चिंताएं
आमी नदी
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सारांश
  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आमी नदी में गंदगी पर सख्त रुख अपनाते हुए संयुक्त समिति की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है।

  • एनजीटी ने समिति को निर्देश दिया है कि वह औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज के मुद्दों पर गहराई से जांच करे और जल, वायु और पर्यावरण संरक्षण अधिनियमों के पालन की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करे।

  • एक अन्य मामले में एनजीटी ने हरिद्वार स्थित मंत्रा हैप्पी होम्स ग्रुप हाउसिंग परियोजना में कथित अवैध निर्माण के आरोपों पर उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब तलब किया है।

  • साथ ही हरिद्वार–रुड़की विकास प्राधिकरण को भी अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 12 जनवरी 2026 को कहा है संयुक्त समिति की रिपोर्ट में आमी नदी में बिना उपचार औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज छोड़े जाने जैसे अहम मुद्दों पर ठीक से ध्यान नहीं दिया गया है। गौरतलब है कि आमी, गंगा की एक सहायक नदी है।

एनजीटी ने संयुक्त समिति को निर्देश दिया है कि वह सभी अहम पहलुओं की गहराई से जांच करे और उद्योगों द्वारा जल अधिनियम, 1974, वायु अधिनियम, 1981 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के पालन की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करे।

साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार, गोरखपुर के जिलाधिकारी, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण सहित अन्य जिम्मेदार पक्षों द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुपालन की भी समीक्षा करने को कहा गया है।

अधिकरण ने एक महीने के भीतर अतिरिक्त और विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने जल शक्ति मंत्रालय, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़े अधिकारियों को भी अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है, ताकि इस मामले से जुड़े अहम पर्यावरणीय सवालों पर न्यायपूर्ण और उचित निर्णय लिया जा सके।

हरिद्वार में अवैध निर्माण का मामला: एनजीटी ने प्रदूषण बोर्ड और विकास प्राधिकरण से मांगा जवाब

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 12 जनवरी 2026 को हरिद्वार स्थित मंत्रा हैप्पी होम्स ग्रुप हाउसिंग परियोजना में कथित अवैध निर्माण के आरोपों पर उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब तलब किया है। साथ ही हरिद्वार–रुड़की विकास प्राधिकरण को भी अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल 2026 को होगी।

शिकायत के अनुसार, परियोजना के लिए मंजूर नक्शे में 170 फ्लैट और 68 प्लॉट शामिल थे और 2,202.70 वर्ग मीटर क्षेत्र को हरे-भरे पार्क के लिए तय किया गया था। लेकिन बाद में संबंधित प्राधिकरण की मिलीभगत से नक्शे में बदलाव कर बिना भूमि क्षेत्र को बढ़ाए फ्लैटों की संख्या 272 कर दी गई, जबकि साइट पर स्वीकृत क्षेत्र का आधे से भी कम हिस्सा मौजूद है।

उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने परियोजना को स्थापना की सहमति इस शर्त पर दी थी कि थ्री-टियर ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए। साथ ही एक फंक्शनल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाए और संचालन की अनुमति (सीटीओ) ली जाए।

आरोप है कि इन शर्तों का पालन किए बिना ही दिसंबर 2017 में फ्लैटों का कब्जा खरीदारों को सौंप दिया गया, जबकि उस समय संचालन की अनुमति भी नहीं मिला थी।

यह भी दावा किया गया है कि परियोजना का सीटीओ/सीसीए मार्च 2020 में समाप्त हो गया, लेकिन इसके बाद से इसका नवीनीकरण नहीं कराया गया। शिकायत में अवैध बोरवेल, ग्रीन एरिया पर अतिक्रमण और उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लगाए पर्यावरणीय मुआवजे की वसूली न होने के आरोप भी शामिल हैं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि परियोजना का क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर से अधिक है, इसके बावजूद पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना, 2006 के तहत अनिवार्य पर्यावरण स्वीकृति नहीं ली गई। इन्हीं गंभीर आरोपों को देखते हुए एनजीटी ने संबंधित संस्थाओं से जवाब मांगा है।

देवी तालाब को अतिक्रमण और कचरे से मुक्त करने में जुटी बालाघाट नगर पालिका

मध्य प्रदेश के बालाघाट स्थित देवी तालाब को अतिक्रमण और ठोस कचरे से मुक्त करने के लिए नगर पालिका परिषद लगातार प्रयास कर रही है। यह जानकारी नगर पालिका ने 13 जनवरी 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में दी है। यह रिपोर्ट एनजीटी द्वारा 10 अक्टूबर 2025 को दिए आदेश पर अदालत में सौंपी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, तालाब की ओर जाने वाले नाले पर अवैध निर्माण करने वाले तीन पक्षों को नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, देवी तालाब की जमीन को लेकर स्वामित्व और दावेदारों के बीच विवाद होने के कारण अन्य अतिक्रमणों पर तत्काल कार्रवाई में कठिनाई सामने आई है।

इसके बावजूद, बिना ट्रीटमेंट के तालाब में गिर रहे पानी को नियंत्रित करने के लिए नगर पालिका ने एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की है और इसके लिए कार्यादेश भी जारी कर दिया गया है। तालाब के आसपास सफाई का अधिकांश काम पूरा कर लिया गया है।

नगर पालिका ने कोर्ट को यह भी बताया कि देवी तालाब को लेकर पहले भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में कई याचिकाएं दायर हो चुकी हैं। जमीन के स्वामित्व को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए 8 जनवरी 2026 को बालाघाट नगर पालिका ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को एक विस्तृत पत्र भेजा है।

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