दुनिया भर में साल 2050 तक कचरे के 3.9 अरब टन तक पहुंचने के आसार: रिपोर्ट

अंतरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस: साल 2022 में 2.6 अरब टन कचरा उत्पन्न हुआ, 2050 तक 3.9 अरब टन पहुंचने के आसार, हर साल 1 अरब टन भोजन की बर्बादी हो रही है, जिसमें से 60% घरों से होता है
भोजन की बर्बादी: दुनिया में हर साल लगभग 1 अरब टन खाना बर्बाद होता है, जिसमें 60 प्रतिशत घरेलू स्तर पर होता है।
भोजन की बर्बादी: दुनिया में हर साल लगभग 1 अरब टन खाना बर्बाद होता है, जिसमें 60 प्रतिशत घरेलू स्तर पर होता है।फोटो साभार: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • भोजन बर्बादी: दुनिया में हर साल लगभग 1 अरब टन खाना बर्बाद होता है, जिसमें 60 प्रतिशत घरेलू स्तर पर होता है।

  • बढ़ता हुआ कचरा: साल 2022 में 2.6 अरब टन कचरा उत्पन्न हुआ, 2050 तक यह बढ़कर 3.9 अरब टन तक पहुंचने का अनुमान है।

  • पर्यावरणीय प्रभाव: गलत तरीके से कचरा प्रबंधन से प्रदूषण, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और भूमि, जल, वायु के प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

  • स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था: खराब कचरा प्रबंधन से बीमारियां फैलती हैं, आर्थिक नुकसान होता है, जमीन की कीमत घटती है व पर्यटन, खेती पर असर पड़ता है।

  • समाधान और जिम्मेदारी: हर व्यक्ति को भोजन की बर्बादी कम करनी चाहिए, कचरे का सही प्रबंधन करना चाहिए और सरकारों को निवेश बढ़ाना चाहिए।

हर साल 30 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को कचरे की समस्या के बारे में जागरूक करना और उसे कम करने के लिए प्रेरित करना है। इस साल की थीम - हम क्या खाते हैं, कितना बर्बाद करते हैं और कैसे हम बेहतर तरीके अपना सकते हैं।

भोजन की बर्बादी एक बड़ी समस्या

दुनिया भर में हर साल लगभग एक अरब टन खाना बर्बाद हो जाता है। यह बहुत बड़ी मात्रा है। यह लगभग कुल उपलब्ध भोजन का पांचवां हिस्सा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बर्बादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा घरों में होता है। यानी हम खुद ही सबसे ज्यादा खाना फेंकते हैं।

यह भी पढ़ें
फूड वेस्ट की खाद से होता है भारी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन: रिपोर्ट
भोजन की बर्बादी: दुनिया में हर साल लगभग 1 अरब टन खाना बर्बाद होता है, जिसमें 60 प्रतिशत घरेलू स्तर पर होता है।

रेस्तरां, होटल और दुकानों में भी खाना बर्बाद होता है, लेकिन असली समस्या हमारे घरों से शुरू होती है। कई बार हम जरूरत से ज्यादा खाना बना लेते हैं या खरीद लेते हैं, और फिर उसे फेंक देते हैं।

पर्यावरण पर असर

जब खाना बर्बाद होता है, तो उसका असर केवल पैसों तक सीमित नहीं रहता। इससे पर्यावरण को भी नुकसान होता है। जब कचरा सड़ता है, तो उससे हानिकारक गैसें निकलती हैं, जो जलवायु परिवर्तन को बढ़ाती हैं। इसके अलावा, कचरे के कारण जमीन और पानी भी प्रदूषित होते हैं। कई जगहों पर लोग कचरे को जलाते हैं। यह तरीका बहुत खतरनाक है। इससे जहरीली गैसें निकलती हैं, जो हवा को प्रदूषित करती हैं और लोगों की सेहत पर बुरा असर डालती हैं।

यह भी पढ़ें
भारत में 67 लाख बच्चे ऐसे, जो 24 घंटे से अधिक समय तक रहते हैं पूरी तरह से भूखे
भोजन की बर्बादी: दुनिया में हर साल लगभग 1 अरब टन खाना बर्बाद होता है, जिसमें 60 प्रतिशत घरेलू स्तर पर होता है।

दुनिया भर में बढ़ता हुआ कचरा

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है। साल 2022 में लगभग 2.6 अरब टन कचरा पैदा हुआ था। आने वाले समय में यह और बढ़कर 2050 तक 3.9 अरब टन तक पहुंच सकता है।

हालांकि कचरे को संभालने के तरीके कुछ जगहों पर बेहतर हो रहे हैं, लेकिन यह सुधार काफी नहीं है। बड़ी मात्रा में कचरा अभी भी सही तरीके से प्रबंधित नहीं हो पाता है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में भी यह समस्या बनी रहेगी।

यह भी पढ़ें
अमेरिका करता है सबसे ज्यादा मांस की बर्बादी, 18 अरब जानवर मरते हैं बेवजह
भोजन की बर्बादी: दुनिया में हर साल लगभग 1 अरब टन खाना बर्बाद होता है, जिसमें 60 प्रतिशत घरेलू स्तर पर होता है।

गरीब देशों की चुनौती

कम आय वाले देशों में यह समस्या और भी गंभीर है। वहां कचरा प्रबंधन के लिए पर्याप्त साधन और व्यवस्था नहीं है। जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती है, कचरे की मात्रा भी बढ़ती जाती है। लेकिन उसे संभालने के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं बढ़ पातीं।

इन देशों को अगले 25 वर्षों में बहुत बड़ी रकम निवेश करनी होगी ताकि वे अपने कचरा प्रबंधन सिस्टम को सुधार सकें। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो समस्या और भी बढ़ सकती है।

यह भी पढ़ें
छह हफ्तों में बदल सकती हैं आपकी भोजन को बर्बाद करने की आदत, जानें कैसे?
भोजन की बर्बादी: दुनिया में हर साल लगभग 1 अरब टन खाना बर्बाद होता है, जिसमें 60 प्रतिशत घरेलू स्तर पर होता है।

स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर असर

खराब कचरा प्रबंधन का असर लोगों की सेहत पर पड़ता है। गंदगी और प्रदूषण के कारण कई बीमारियां फैलती हैं। इसके अलावा, इससे आर्थिक नुकसान भी होता है। जमीन की कीमत कम हो जाती है, पर्यटन पर असर पड़ता है और प्राकृतिक संसाधनों का नुकसान होता है।

इसलिए यह कहना गलत होगा कि कचरा प्रबंधन पर खर्च करना महंगा है। असल में, अगर हम अभी निवेश नहीं करते, तो हमें भविष्य में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।

यह भी पढ़ें
भोजन की बर्बादी को रोकने में मदद करेगा यह नया सेंसर: खोज
भोजन की बर्बादी: दुनिया में हर साल लगभग 1 अरब टन खाना बर्बाद होता है, जिसमें 60 प्रतिशत घरेलू स्तर पर होता है।

समाधान क्या है?

इस समस्या का समाधान केवल सरकार के पास नहीं है। इसमें हर व्यक्ति की भूमिका है। हमें अपने घरों में खाना बर्बाद करना कम करना होगा। जितनी जरूरत हो उतना ही खाना बनाना और खरीदना चाहिए।

इसके साथ ही, हमें कचरे को सही तरीके से अलग करना और उसका पुनः उपयोग करना सीखना होगा। सरकारों को भी बेहतर नीतियां बनानी होंगी और कचरा प्रबंधन में निवेश बढ़ाना होगा।

यह भी पढ़ें
कोविड काल में महिला समूहों ने खाद्य सुरक्षा में निभाई अहम भूमिका
भोजन की बर्बादी: दुनिया में हर साल लगभग 1 अरब टन खाना बर्बाद होता है, जिसमें 60 प्रतिशत घरेलू स्तर पर होता है।

कचरे की समस्या केवल पर्यावरण की समस्या नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और विकास से जुड़ी हुई है। अगर हम समय रहते कदम नहीं उठाते, तो यह समस्या और भी गंभीर हो जाएगी।

इस अंतर्राष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम कचरा कम करेंगे और अपने भविष्य को सुरक्षित बनाएंगे।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in