उत्तर प्रदेश: अवैध रेत खनन से खन्नौत नदी पर गहराया संकट, एनजीटी ने गठित की संयुक्त समिति

आवेदक का आरोप है कि भारी बारिश और अवैध रेत खनन के कारण नदी का तेजी से कटाव हो रहा है और यह सेना की जमीन तक पहुंचने लगा है
प्रतीकात्मक तस्वीर
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सारांश
  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में खन्नौत नदी के किनारे अवैध रेत खनन और तेज कटाव की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त समिति गठित करने का आदेश दिया है।

  • समिति को मौके पर जांच कर आठ सप्ताह में रिपोर्ट सौंपनी होगी और सुधारात्मक व दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश करनी होगी।

  • ट्रिब्यूनल ने जिलाधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण मंत्रालय सहित संबंधित एजेंसियों को नोटिस भी जारी किए हैं।

  • वहीं एक अन्य मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी रिपोर्ट में एनजीटी को जानकारी दी है कि भोपाल के कलियासोत जलाशय क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

  • नगर निगम ने 11 अवैध निर्माण चिन्हित किए थे, जिनमें से चार हटाए जा चुके हैं। बाकी सात मामलों में हाईकोर्ट से अंतरिम रोक लगी है, जिसे हटाने के लिए नगर निगम ने आवेदन दाखिल किया है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के मऊ खालसा में सेना की जमीन के किनारे बहने वाली खन्नौत नदी में तेज कटाव और अवैध रेत खनन की शिकायत को गंभीरता से लिया है। एनजीटी ने 9 फरवरी 2026 को एक संयुक्त समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं, जो मौके पर जाकर पूरे मामले की जांच करेगी।

समिति को यह पता लगाना होगा कि कटाव के आरोप कितने सही हैं, क्षेत्र में किस हद तक अवैध रेत खनन हो रहा है और इसके लिए कौन लोग जिम्मेदार हैं।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि समिति को न केवल स्थिति का आकलन करना होगा, बल्कि नुकसान रोकने के लिए सुधारात्मक कदम और दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की भी सिफारिश करनी होगी। यह पूरी प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी कर रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष दाखिल करनी होगी।

इसके साथ ही एनजीटी ने शाहजहांपुर के जिलाधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय (लखनऊ) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को नोटिस जारी करने का भी आदेश दिया है।

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आवेदक का आरोप है कि भारी बारिश और अवैध रेत खनन के कारण नदी का तेजी से कटाव हो रहा है और यह सेना की जमीन तक पहुंचने लगा है। शिकायतकर्ता ने अवैध खनन से हुए कटाव को दर्शाने वाली तस्वीरें भी अदालत में प्रस्तुत की हैं।

भोपाल: कलियासोत जलाशय क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया तेज, 7 मामलों पर हाईकोर्ट की रोक

भोपाल: कलियासोत जलाशय क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया तेज, 7 मामलों पर हाईकोर्ट की रोकमध्य प्रदेश सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को बताया है कि कलियासोत जलाशय के आसपास अतिक्रमण हटाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा चुके हैं। यह जानकारी राज्य की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट में दी गई है।

भोपाल नगर निगम (बीएमसी) ने 18 अगस्त 2025 को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसमें बताया गया कि कलियासोत जलाशय के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) से 33 मीटर के दायरे में निजी जमीन पर कुल 11 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं।

इन निर्माणों की पहचान के बाद नगर निगम के बिल्डिंग परमिशन डिपार्टमेंट ने 11 सितंबर 2023 को मध्य प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1956 की धारा 307(2) के तहत सभी संबंधित भूमि मालिकों को नोटिस जारी किए। नोटिस में उन्हें अपने-अपने भूखंडों पर बिना इजाजत के बने अनधिकृत निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए।

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नोटिस अवधि समाप्त होने पर 21 सितंबर 2023 को अंतिम नोटिस जारी कर तय समयसीमा में अवैध निर्माण खाली कर ध्वस्त करने को कहा गया। इनमें से चार भूमि मालिकों ने आदेश का पालन करते हुए निर्माण हटा दिए। शेष सात भूमि मालिकों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और अपने खिलाफ किसी भी कठोर कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए अंतरिम स्टे ऑर्डर हासिल कर लिए हैं।

हालांकि भोपाल नगर निगम ने अपने अधिकृत कानूनी प्रतिनिधि के माध्यम से हाईकोर्ट में रोक हटाने, शीघ्र सुनवाई और लंबित याचिकाओं के निपटारे के लिए आवेदन दाखिल कर दिए हैं। यह रिपोर्ट 16 सितंबर 2025 की है, जिसे एनजीटी की वेबसाइट पर 10 फरवरी 2026 को अपलोड किया गया है।

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