ओडिशा: रेत खदान में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का आरोप, एनजीटी ने गठित की जांच समिति

12.3 एकड़ में हो रहे रेत खनन पर पर्यावरणीय मानकों के पालन को लेकर उठे सवालों पर एनजीटी ने मौके की जमीनी हकीकत जांचने और चार सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है
प्रतीकात्मक तस्वीर
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सारांश
  • ओडिशा के जाजपुर जिले के पंकपाल गांव में 12.3 एकड़ यानी करीब 4.978 हेक्टेयर में चल रही पंकपाल-II रेत खदान में पर्यावरणीय नियमों के कथित उल्लंघन की जांच होगी। मामले की सुनवाई 11 सितंबर 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की पूर्वी पीठ में हुई।

  • ट्रिब्यूनल ने खदान की जमीनी स्थिति की जांच के लिए दो सदस्यीय संयुक्त समिति गठित करने और चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

  • आवेदक ने आरोप लगाया है कि खदान में पर्यावरण मंजूरी और संचालन की सहमति की शर्तों के साथ-साथ सतत रेत खनन प्रबंधन दिशानिर्देश, 2016 और रेत खनन के प्रवर्तन एवं निगरानी संबंधी दिशानिर्देश, 2020 का पालन नहीं किया जा रहा है।

  • आवेदन में ओडिशा सैंड पॉलिसी, 2021, ईआईए अधिसूचना, 2006 और ओडिशा माइनर मिनरल्स कन्सेशन रूल्स, 2016 के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है।

  • एनजीटी ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, खनन विभाग और जिला प्रशासन समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर 2026 को होगी।

ओडिशा के जाजपुर जिले में पंकपाल गांव स्थित पंकपाल-II रेत खदान में कथित पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) पहुंच गया है।

11 सितंबर 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए एनजीटी की पूर्वी पीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के साथ-साथ खदान स्थल की जांच के लिए दो सदस्यीय संयुक्त समिति गठित करने का निर्देश दिया है।

रेत खनन पर उठे गंभीर सवाल

आवेदक ने आरोप लगाया है कि दानागड़ी तहसील के पंकपाल गांव में 12.3 एकड़ यानी करीब 4.978 हेक्टेयर क्षेत्र में चल रही इस रेत खदान में पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। यह खदान निजी पक्षकार दैतारी धल के पट्टे पर है।

आवेदन में कहा गया है कि यहां रेत खनन पर्यावरण मंजूरी (ईसी) और ऑपरेट करने की सहमति (सीटीओ) की शर्तों के साथ-साथ सतत रेत खनन प्रबंधन दिशानिर्देश, 2016 और रेत खनन के प्रवर्तन एवं निगरानी संबंधी दिशानिर्देश, 2020 का उल्लंघन कर किया जा रहा है।

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इसके अलावा, आवेदक ने ओडिशा सैंड पॉलिसी, 2021, ईआईए अधिसूचना, 2006 और उसके 2016 के संशोधन, ओडिशा माइनर मिनरल्स कन्सेशन रूल्स, 2016 का उल्लंघन होने का भी आरोप लगाया है। मामले में सुप्रीम कोर्ट के दीपक कुमार फैसले और एनजीटी के सुदर्शन दास मामले में दिए गए आदेशों का भी हवाला दिया गया है।

दिशानिर्देशों की अनदेखी का आरोप, दो सदस्यीय समिति करेगी जांच

एनजीटी ने इस मामले में ओडिशा के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव, जाजपुर के खनन उपनिदेशक, कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, तहसीलदार सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। ट्रिब्यूनल ने संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।

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इसके साथ ही दो सदस्यीय संयुक्त समिति को खदान साइट का दौरा कर मौके की वास्तविक स्थिति की जांच करने और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर पेश करने का निर्देश दिया गया है।

इस मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर 2026 को होगी।

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