सुवर्णरेखा में अवैध बालू खनन पर एनजीटी की सख्ती: नोटिस, जांच और प्रशासनिक लापरवाही पर उठाए सवाल

बालू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीणों की शिकायत पर एनजीटी ने प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को कटघरे में खड़ा किया है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर
Published on
सारांश
  • सुवर्णरेखा नदी में कथित अवैध बालू खनन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने फिर से सख्ती दिखाई है।

  • बालासोर जिले के मोहम्मद नगर पटना से शेखसराय तक बिना पर्यावरण मंजूरी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति और वैध खनन पट्टे के जारी खनन को लेकर ग्रामीणों ने लंबे समय से शिकायतें की थीं, लेकिन कार्रवाई के अभाव ने बालू माफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए।

  • अब एनजीटी ने जिला कलेक्टर, खनन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एसईआईएए से जवाब तलब कर संयुक्त जांच समिति गठित करने का आदेश दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन से नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है, तटबंध कमजोर हो रहे हैं और आसपास के गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। साथ ही, सरकार को भारी राजस्व नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

  • यह मामला केवल अवैध खनन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और पर्यावरणीय कानूनों की अनदेखी का भी प्रतीक बन गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एनजीटी की यह सख्ती सच में बालू माफियाओं पर लगाम लगा पाएगी, या फिर सुवर्णरेखा नदी यूं ही बेदर्दी से खोखली होती रहेगी।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की पूर्वी पीठ ने सुवर्णरेखा नदी से हो रहे कथित अवैध बालू खनन पर सख्त रुख अपनाया है। 19 मई 2026 को दिए गए आदेश में ट्रिब्यूनल ने इस मामले में बालासोर के जिला कलेक्टर से जवाब तलब किया है।

मामला ओडिशा में बालासोर (ओडिशा) के मोहम्मद नगर पटना से शेखसराय के बीच बिना अनुमति के धड़ल्ले से चल रहे खनन से जुड़ा है। आरोप है कि यह खनन बिना किसी वैध पर्यावरण मंजूरी, स्थापना और संचालन की सहमति (कंसेंट टू एस्टेब्लिश, कंसेंट टू ऑपरेट) और खनन पट्टे के किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।

एनजीटी ने इस मामले में बालासोर के खनन अधिकारी, ओडिशा खनन एवं भूविज्ञान निदेशालय, ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) से भी जवाब मांगा है।

बालू माफिया के आगे बेबस प्रशासन

अधिकरण ने इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए एक संयुक्त जांच समिति गठित करने का निर्देश दिया है। इस समिति में जिला बालासोर के जिला कलेक्टर, एसईआईएए ओडिशा और ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक-एक प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति को मौके पर जाकर जांच करने और कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

यह भी पढ़ें
सुवर्णरेखा नदी में रेत की दीवारें मौजूद नहीं, रेत खनन मामले में तहसीलदार ने एनजीटी में सौंपी रिपोर्ट
प्रतीकात्मक तस्वीर

याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्थानीय ग्रामीण अवैध खनन के खिलाफ कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन बालू माफियाओं के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों को आशंका है कि अवैध खनन से नदी के तटबंध को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे आसपास के इलाकों में परेशानी बढ़ने का खतरा है। साथ ही, सरकार को भी भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है। पर्यावरण को हो रहे नुकसान के साथ-साथ ग्रामीणों का दैनिक जीवन भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

यह भी पढ़ें
सुनहरी रेत की लूट: बंगाल की सुवर्णरेखा नदी से अवैध बालू खनन, एनजीटी सख्त
प्रतीकात्मक तस्वीर

अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या एनजीटी की सख्ती प्रशासन की नींद तोड़ पाएगी? क्या बेलगाम बालू माफियाओं के नेटवर्क पर वास्तव में शिकंजा कसेगा, या फिर जांच समितियों, नोटिसों और कागजी कार्रवाई के बीच सुवर्णरेखा नदी का सीना यूं ही छलनी होता रहेगा?

अगर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो इसकी कीमत सिर्फ नदी ही नहीं, बल्कि आसपास बसे गांवों और वहां रहने वाले लोगों को भी चुकानी पड़ सकती है।

यह भी पढ़ें
जानिए क्यों एनजीटी ने सुवर्णरेखा में ड्रेजिंग और डी-सिल्टिंग को रोकने का दिया निर्देश
प्रतीकात्मक तस्वीर
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in