विश्व तंबाकू निषेध दिवस: हर साल दुनिया में 70 लाख व भारत 13 लाख से ज्यादा लोग तंबाकू के कारण जान गंवा रहे हैं

भारत की 29 प्रतिशत वयस्क आबादी तंबाकू उपयोग करती है, युवाओं में ई-सिगरेट और निकोटीन उत्पादों का चलन लगातार बढ़ रहा है
दुनिया भर में 13 से 15 वर्ष आयु के करीब 4 करोड़ बच्चे तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं।
दुनिया भर में 13 से 15 वर्ष आयु के करीब 4 करोड़ बच्चे तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • भारत में लगभग 26.7 करोड़ वयस्क तंबाकू का उपयोग करते हैं, जो देश की कुल वयस्क आबादी का 29 प्रतिशत है।

  • तंबाकू सेवन के कारण भारत में हर वर्ष लगभग 13.5 लाख लोगों की मौत होती है, चिंता लगातार बढ़ रही है।

  • दुनिया भर में 13 से 15 वर्ष आयु के करीब 4 करोड़ बच्चे तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं।

  • डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, तंबाकू के कारण दुनिया में हर साल 70 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु होती है।

  • डब्ल्यूएचओ ने युवाओं को बचाने के लिए फ्लेवर्ड उत्पादों, विज्ञापनों और निकोटीन पाउच पर नियंत्रण की मांग की है।

तंबाकू का सेवन आज दुनिया भर में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। यह कैंसर, फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी कई गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण है। भारत में हर साल लगभग 13.5 लाख लोगों की मौत तंबाकू के सेवन के कारण होती है। इसके बावजूद देश में तंबाकू उत्पाद आसानी से और कम कीमत पर उपलब्ध हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने आज, 31 मई को मनाए जाने वाले विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर दुनिया भर की सरकारों से नई पीढ़ी को तंबाकू और निकोटीन की लत से बचाने का आह्वान किया है।

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भारत में तंबाकू सेवन की स्थिति

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तंबाकू उत्पादक और उपभोक्ता देश है। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2016-17 के अनुसार, भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 26.7 करोड़ लोग तंबाकू का उपयोग करते हैं। यह देश की वयस्क आबादी का लगभग 29 प्रतिशत है।

भारत में धूम्ररहित तंबाकू का उपयोग सबसे अधिक किया जाता है। खैनी, गुटखा, जर्दा और तंबाकू युक्त पान इसके प्रमुख रूप हैं। वहीं बीड़ी, सिगरेट और हुक्का धूम्रपान के सामान्य साधन हैं।

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दुनिया भर में 13 से 15 वर्ष आयु के करीब 4 करोड़ बच्चे तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं।

युवाओं में बढ़ रही चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में 13 से 15 वर्ष की आयु के कम से कम चार करोड़ बच्चे तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं। इसके अलावा ई-सिगरेट और निकोटीन पाउच जैसे नए उत्पादों का उपयोग भी युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किशोर और युवा इन उत्पादों के प्रति अधिक आकर्षित हो रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण इनके स्वाद, आकर्षक पैकेजिंग और सोशल मीडिया पर होने वाला प्रचार है। कम उम्र में निकोटीन की लत लगने से भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

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दुनिया भर में 13 से 15 वर्ष आयु के करीब 4 करोड़ बच्चे तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं।

कंपनियों की नई रणनीति

डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि तंबाकू और निकोटीन उत्पाद बनाने वाली कंपनियां अपने उत्पादों को अधिक आकर्षक बनाने के लिए नई-नई रणनीतियां अपना रही हैं। फ्लेवर वाले उत्पाद, रंग-बिरंगी पैकेजिंग और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के माध्यम से प्रचार किया जा रहा है।

डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों का कहना है कि कुछ कंपनियां पारंपरिक सिगरेट से होने वाले नुकसान के बावजूद नए निकोटीन उत्पादों को युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाने का प्रयास कर रही हैं। इनका उद्देश्य नई पीढ़ी को निकोटीन की लत की ओर आकर्षित करना है।

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निकोटीन के खतरे

निकोटीन एक अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला पदार्थ है। यह विशेष रूप से बच्चों, किशोरों और युवाओं के लिए हानिकारक है क्योंकि इस उम्र में उनका मस्तिष्क पूरी तरह विकसित नहीं हुआ होता। निकोटीन का लगातार सेवन मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है

विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार निकोटीन की लत लग जाने के बाद इसे छोड़ना बहुत कठिन हो जाता है। इसलिए शुरुआती स्तर पर ही इसके उपयोग को रोकना जरूरी है।

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सरकारों की भूमिका

डब्ल्यूएचओ ने सरकारों से तंबाकू और निकोटीन उत्पादों पर कड़े नियंत्रण की मांग की है। संगठन का कहना है कि फ्लेवर वाले उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। साथ ही इनके विज्ञापन, प्रचार और प्रायोजन पर भी रोक लगाई जानी चाहिए।

सार्वजनिक स्थानों को पूरी तरह धूम्रपान और वेपिंग मुक्त बनाने तथा कानूनों के सख्ती से पालन पर भी जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कानून और जागरूकता अभियान युवाओं को इन उत्पादों से दूर रखने में मदद कर सकते हैं।

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ब्राजील का उदाहरण

ब्राजील का शहर रियो डी जेनेरो इस दिशा में एक अच्छा उदाहरण बनकर सामने आया है। वहां प्रशासन ने ई-सिगरेट की बिक्री और विज्ञापनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। इसके साथ ही धूम्रपान और वेपिंग मुक्त कानूनों को मजबूत किया गया है।

शहर में बड़े पैमाने पर जनजागरूकता अभियान भी चलाए गए हैं, जिनका उद्देश्य लोगों को तंबाकू और निकोटीन के खतरों के बारे में जानकारी देना है।

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तंबाकू मुक्त भविष्य की ओर

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तंबाकू के कारण हर साल दुनिया भर में 70 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु होती है। यह ऐसी मौतों का प्रमुख कारण है जिन्हें रोका जा सकता है। तंबाकू का संबंध हृदय रोग, श्वसन संबंधी बीमारियों और 20 से अधिक प्रकार के कैंसर से है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर डब्ल्यूएचओ ने दुनिया भर के एक अरब से अधिक तंबाकू और निकोटीन उपयोगकर्ताओं से तंबाकू छोड़ने की दिशा में पहला कदम उठाने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारें, समाज और परिवार मिलकर प्रयास करें तो युवाओं को तंबाकू की लत से बचाया जा सकता है और एक स्वस्थ भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।

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