

ऑस्ट्रेलिया में बढ़ते एच5 बर्ड फ्लू के खतरे के बीच लुप्तप्राय देशी पक्षियों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू होगा।
चिड़ियाघरों और संरक्षण केंद्रों में रखे दुर्लभ पक्षियों को पहले टीका दिया जाएगा, ताकि उनकी आबादी सुरक्षित रह सके।
जंगली पक्षियों को दो बार पकड़कर टीका देना मुश्किल, फिर भी संभव स्थानों पर टीकाकरण की कोशिश की जाएगी।
सरकार ने पिछले 18 महीनों में देशी पक्षियों पर टीकों की सुरक्षा और प्रभाव को लेकर परीक्षण किए हैं।
बर्ड फ्लू का खतरा स्तनधारियों तक पहुंचने की आशंका, वैज्ञानिक सील और समुद्री शेरों पर भी परीक्षण चाहते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में तेजी से फैल रहे एच5 बर्ड फ्लू के बीच सरकार ने देशी पक्षियों को बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब कैद में रखे गए संवेदनशील और लुप्तप्राय पक्षियों का टीकाकरण शुरू करने जा रही है। पहली खुराक आने वाले कुछ दिनों और हफ्तों में दिए जाने की उम्मीद है। इस अभियान में सबसे पहले उन पक्षियों को शामिल किया जाएगा, जिनकी प्रजातियां पहले से ही खतरे में हैं।
रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया की सरकार के द्वारा मंगलवार को कहा कि जंगली पक्षियों के बीच एच5 बर्ड फ्लू के फैलाव को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। हालांकि ऐसे पक्षियों की सुरक्षा की जा सकती है, जो संरक्षण केंद्रों और चिड़ियाघरों में रखे गए हैं। राज्य सरकारें टीकाकरण कार्यक्रम को लागू करेंगी और जल्द ही उन प्रजातियों की सूची जारी करेंगी, जिन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
चिड़ियाघरों और संरक्षण केंद्रों पर विशेष ध्यान
सरकार का मुख्य ध्यान उन देशी पक्षियों पर है, जिन्हें चिड़ियाघरों, वन्यजीव केंद्रों और संरक्षण प्रजनन कार्यक्रमों के तहत रखा गया है। इनमें ऑरेंज-बेलीड पैरट, रीजेंट हनीईटर और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के ब्लैक कॉकटू जैसी प्रजातियां शामिल हैं।
इनमें से कई पक्षियों की संख्या पहले ही बहुत कम है। ऐसे में अगर बर्ड फ्लू का संक्रमण इनकी आबादी में तेजी से फैलता है, तो इन प्रजातियों को बड़ा नुकसान हो सकता है। संरक्षण विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण से कम संख्या वाली प्रजातियों को अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है।
सरकार के लिए कैद में रखे पक्षियों का टीकाकरण इसलिए भी आसान है क्योंकि इन्हें नियंत्रित परिस्थितियों में रखा जाता है। इसके विपरीत जंगली पक्षियों को पकड़ना और दोबारा पकड़कर टीका देना काफी मुश्किल है।
जंगली पक्षियों को टीका देना बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में पर्यावरण मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि जंगली पक्षियों के लिए टीकाकरण एक बड़ी चुनौती है। मौजूदा टीके की पूरी प्रक्रिया में दो खुराक की जरूरत होती है। ऐसे में एक ही पक्षी को दो बार पकड़ना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि जंगली पक्षी को एक बार पकड़ना ही मुश्किल है और उसे दूसरी बार पकड़ना उससे भी कठिन हो सकता है। इसके बावजूद जहां यह संभव होगा, वहां जंगली पक्षियों को भी टीका देने की कोशिश की जाएगी।
वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसी जंगली आबादी की ओर भी ध्यान दिलाया है, जिन्हें अपेक्षाकृत आसानी से पकड़ा जा सकता है। विक्टोरिया के फिलिप आइलैंड पर रहने वाले छोटे पेंगुइन इसके एक उदाहरण हो सकते हैं।
18 महीने से चल रहे टीके के परीक्षण
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार पिछले करीब 18 महीनों से टीकों की सुरक्षा और प्रभाव को लेकर परीक्षण कर रही है। मौजूदा टीके मुख्य रूप से मुर्गियों जैसे पालतू पक्षियों के लिए विकसित किए गए हैं।
देशी पक्षियों की प्रजातियां आकार और शरीर की बनावट में अलग-अलग होती हैं। इसलिए सरकार के लिए यह पता लगाना जरूरी था कि इन टीकों का अलग-अलग पक्षियों पर क्या असर होता है। अब तक हुए परीक्षणों से कई प्रजातियों में टीके की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। आगे भी आंकड़े जुटाए जाएंगे और उन्हीं प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके लिए पर्याप्त सुरक्षा जानकारी उपलब्ध है।
कई इलाकों में बढ़ा संक्रमण
एच5 बर्ड फ्लू अब ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों में फैल चुका है। दक्षिण ऑस्ट्रेलिया और विक्टोरिया में हाल ही में पक्षियों की सामूहिक मौत के मामले सामने आए हैं। वायरस अब नई प्रजातियों को भी प्रभावित कर रहा है। इनमंह सिल्वर गल जैसी पक्षियां शामिल हैं।
दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में मंगलवार को 33 नए संदिग्ध मामले सामने आए। इनमें एक पेरेग्रिन फाल्कन भी शामिल है। इससे पहले मरे-डार्लिंग क्षेत्र में भी संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं।
सरकार ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में संक्रमित और मृत पक्षियों की संख्या बढ़ सकती है। अधिकारियों का कहना है कि लोगों को कई जगहों पर बड़ी संख्या में मृत पक्षी देखने को मिल सकते हैं।
स्तनधारी जानवरों पर भी नजर
वैज्ञानिक अब इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि एच5 वायरस का असर कुछ स्तनधारी जानवरों पर पड़ सकता है। चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन वॉइनार्स्की ने सील और समुद्री शेर जैसे जानवरों पर परीक्षण की जरूरत बताई है। फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में स्तनधारियों के लिए इस बीमारी के खिलाफ कोई उपयुक्त व्यावसायिक टीका उपलब्ध नहीं है। हालांकि सरकार अमेरिका सहित दूसरे देशों में चल रहे परीक्षणों पर नजर रख रही है।