बर्ड फ्लू से दूसरे जंगली पक्षी की मौत, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में लॉकडाउन जैसी स्थिति

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में एच5एन1 बर्ड फ्लू की पुष्टि, जंगली पक्षियों की मौत के बाद पोल्ट्री उद्योग में सख्ती और सरकार की निगरानी बढ़ी
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में खतरनाक एच5एन1 बर्ड फ्लू की पुष्टि, जंगली पक्षियों में संक्रमण मिलने से सरकार ने सतर्कता बढ़ाई।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में खतरनाक एच5एन1 बर्ड फ्लू की पुष्टि, जंगली पक्षियों में संक्रमण मिलने से सरकार ने सतर्कता बढ़ाई।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में खतरनाक एच5एन1 बर्ड फ्लू की पुष्टि, जंगली पक्षियों में संक्रमण मिलने से सरकार ने सतर्कता बढ़ाई।

  • एस्पेरेंस क्षेत्र में मृत ब्राउन स्कुआ और जाइंट पेट्रेल में वायरस मिला, जांच और निगरानी अभियान तेज किए गए।

  • पोल्ट्री कंपनी इंगहम्स ने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में लॉकडाउन जैसे सख्त सुरक्षा कदम उठाए, फ्री-रेंज मुर्गियों को अंदर रखने की सलाह दी।

  • अभी तक घरेलू पोल्ट्री और कृषि क्षेत्रों में संक्रमण नहीं फैला, लेकिन अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।

  • ऑस्ट्रेलिया में पहली बार एच5एन1 का खतरा सामने आया, बायोसिक्योरिटी व्यवस्था मजबूत करने और रिपोर्टिंग सिस्टम सक्रिय किया गया।

ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी हिस्से में बर्ड फ्लू के खतरनाक एच5एन1 वायरस की पुष्टि होने के बाद चिंता बढ़ गई है। यह वायरस आमतौर पर पक्षियों में तेजी से फैलता है और कई देशों में बड़े पैमाने पर पक्षियों की मौत का कारण बन चुका है। इस बार वायरस का पता पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के तटीय इलाके एस्पेरेंस के पास दो जंगली पक्षियों में लगा है। इनमें एक ब्राउन स्कुआ और एक जाइंट पेट्रेल शामिल हैं। दोनों पक्षी मृत पाए गए और उनके नमूनों की जांच में एच5एन1 वायरस की पुष्टि हुई है।

यह घटना इसलिए भी अहम है क्योंकि अब तक ऑस्ट्रेलिया को इस घातक वायरस से मुक्त माना जाता था। 2021 के बाद से यह वायरस दुनिया के कई हिस्सों में फैल चुका है, जिससे लाखों पक्षी और कई समुद्री जीवों की मौत हो चुकी है।

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साल 1996 में चीन के गुआंगडोंग क्षेत्र में इन वायरसों में बड़ा बदलाव हुआ। एक सामान्य एवियन फ्लू वायरस बदलकर ज्यादा खतरनाक रूप में आ गया, जिसे एच5एन1 कहा गया। यह नया रूप मुर्गियों और अन्य पालतू पक्षियों में गंभीर बीमारी और बड़ी संख्या में मौत का कारण बनने लगा।

कैसे फैला वायरस

मुर्गी पालन के बड़े फार्मों में यह वायरस तेजी से फैलता है क्योंकि वहां पक्षी बहुत अधिक संख्या में रहते हैं। इससे वायरस को बदलने और मजबूत बनने का मौका मिला। धीरे-धीरे यह कई देशों में फैल गया और कुछ जगहों पर स्थायी रूप से मौजूद हो गया।

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आज की स्थिति

2021 के बाद से एच5एन1 ने पूरी दुनिया में जंगली पक्षियों में तेजी से फैलाव किया है। इसने लाखों पक्षियों की मौत की है और कुछ समुद्री स्तनधारियों जैसे सील में भी संक्रमण पाया गया है। इससे पर्यावरण और जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ा है।

सरकार और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने स्थिति को गंभीर मानते हुए तुरंत निगरानी और जांच तेज कर दी है। राज्य के पशु चिकित्सा अधिकारियों को एक ही दिन में दर्जनों कॉल मिले, जिनमें बीमार या मृत पक्षियों की सूचना दी गई थी। इसके बाद कई जगहों से नमूने इकट्ठा कर जांच के लिए भेजे गए।

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सरकारी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने कहा है कि अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि यह वायरस घरेलू पशुपालन या खेतों तक फैला है। उनके अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और हर संदिग्ध मामले की जांच की जा रही है।

ऑस्ट्रेलिया के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने भी कहा कि अभी तक वायरस के व्यापक फैलाव का कोई प्रमाण नहीं मिला है। लेकिन सरकार इस बात की जांच कर रही है कि यह वायरस इन पक्षियों तक कैसे पहुंचा और क्या यह आगे अन्य प्रजातियों में फैल सकता है।

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पोल्ट्री उद्योग में सख्त कदम

इस स्थिति को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी पोल्ट्री कंपनी इंगहम्स ग्रुप ने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में अपने सभी ऑपरेशनों को अस्थायी रूप से सख्त नियंत्रण में डाल दिया है। कंपनी ने इसे “कंप्लीट लॉकडाउन” जैसा कदम बताया है।

कंपनी ने कहा है कि वह अपने फार्मों में बाहरी लोगों की एंट्री रोक रही है और सभी सुरक्षा उपायों को बढ़ा रही है। इसके साथ ही यह भी सुझाव दिया गया है कि फ्री-रेंज मुर्गियों को अस्थायी रूप से अंदर रखा जाए ताकि जंगली पक्षियों से संपर्क कम हो सके।

हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके प्रमुख फार्म उस क्षेत्र से काफी दूर हैं जहां संक्रमण मिला है, इसलिए अभी सीधे उत्पादन पर असर नहीं पड़ा है।

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ऑस्ट्रेलिया की बायोसिक्योरिटी पर सवाल

ऑस्ट्रेलिया पहले दुनिया का ऐसा देश था जो एच5एन1 वायरस से पूरी तरह मुक्त माना जाता था। इसलिए इस वायरस की पहली पुष्टि को एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री पक्षियों के माध्यम से वायरस लंबी दूरी तक फैल सकता है, इसलिए निगरानी और भी जरूरी हो गई है।

सरकार का कहना है कि अभी तक वायरस केवल जंगली पक्षियों तक सीमित है और घरेलू पशुओं या इंसानों में इसका कोई मामला सामने नहीं आया है।

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आगे की चुनौती

फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिन महत्वपूर्ण होंगे। सरकार और वैज्ञानिक लगातार यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि वायरस देश में कैसे पहुंचा और क्या यह आगे फैल सकता है।

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें कोई बीमार या मृत पक्षी दिखाई दे तो तुरंत रिपोर्ट करें, ताकि समय रहते जांच और कार्रवाई की जा सके।

इस तरह, ऑस्ट्रेलिया में बर्ड फ्लू का यह पहला मामला देश की जैव सुरक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है और आने वाले समय में इसकी निगरानी और सख्ती और बढ़ सकती है।

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