

न्यूजीलैंड में एच5एन1 बर्ड फ्लू का दूसरा मामला आया सामने, काहू पक्षी संक्रमित पाया गया, वैज्ञानिकों ने वायरस स्रोत की जांच शुरू की।
वायरोलॉजिस्ट ने जताई आशंका, जंगली पक्षियों में संक्रमण का प्राकृतिक स्रोत या रिजर्वायर मौजूद हो सकता है, जिससे खतरा बढ़ा है।
सरकार ने निगरानी बढ़ाई, वाइरारापा क्षेत्र में जंगली पक्षियों की जांच और पोल्ट्री किसानों को विशेष सहायता देने का फैसला किया।
न्यूजीलैंड में अब तक पोल्ट्री फार्म सुरक्षित, अधिकारियों ने कहा सही तरीके से पके चिकन और अंडे खाना पूरी तरह सुरक्षित है।
दुर्लभ देशी पक्षियों की सुरक्षा के लिए टीकाकरण जारी, लोगों से बीमार पक्षियों को नहीं छूने की अपील की गई है।
न्यूजीलैंड में बर्ड फ्लू (एच5एन1 एवियन इन्फ्लुएंजा) का दूसरा मामला सामने आया है। यह वायरस एक देशी पक्षी काहू (स्वैम्प हैरियर) में पाया गया है। इससे पहले वेलिंगटन के पेटोन बीच पर मिले एक ब्राउन स्कुआ पक्षी में देश का पहला एच5एन1 बर्ड फ्लू मामला सामने आया था। दूसरा मामला वाइरारापा क्षेत्र में मिला है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार दो मामलों के मिलने से यह संकेत मिल सकता है कि देश में इस वायरस का कोई प्राकृतिक स्रोत या “रिजर्वायर” मौजूद हो सकता है, जहां से पक्षियों में संक्रमण फैल रहा है।
वैज्ञानिकों ने बताया संक्रमण के स्रोत का संकेत
रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरे मामले से यह आशंका बढ़ती है कि कहीं न कहीं वायरस का एक स्रोत मौजूद है। काहू और ब्राउन स्कुआ दोनों ऐसे पक्षी हैं जो लंबी दूरी तक उड़ते हैं और अक्सर मृत जानवरों को खाते हैं।
इस बात की आशंका जताई गई है कि कुछ संक्रमित पक्षी मर रहे हों और दूसरे शिकारी या मृत जीव खाने वाले पक्षी उन्हें खाकर संक्रमित हो रहे हों। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संक्रमण न्यूजीलैंड के अंदर से आया है या बाहर से।
आगे होने वाली जीनोम जांच से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि क्या वेलिंगटन में मिले पहले मामले और इस नए मामले के बीच कोई संबंध है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या इसका संबंध ऑस्ट्रेलिया में मिले मामलों से है।
अधिक पक्षियों के बीमार होने की रिपोर्ट
विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरा मामला अचानक सामने आना हैरानी की बात नहीं है। पहले मामले के बाद बीमार और मृत पक्षियों की रिपोर्ट तेजी से बढ़ी है।
न्यूजीलैंड के प्राथमिक उद्योग मंत्रालय (एमपीआई) के अनुसार, 15 जुलाई को, जब पहला मामला सामने आया था, उस दिन बीमार या मृत पक्षियों की 49 रिपोर्ट मिली थीं। इससे एक दिन पहले ऐसी केवल चार रिपोर्ट थीं। इसके अगले दिन यह संख्या बढ़कर 144 हो गई।
पोल्ट्री फार्मों के लिए बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, खुले वातावरण में पाले जाने वाले मुर्गों और अन्य पक्षियों को ज्यादा खतरा हो सकता है, क्योंकि उनका जंगली पक्षियों से संपर्क अधिक होता है।
हालांकि अभी तक न्यूजीलैंड में किसी पोल्ट्री फार्म में एच5एन1 वायरस मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों ने कहा है कि किसानों को सतर्क रहने और जैव सुरक्षा नियमों का पालन करने की जरूरत है।
पोल्ट्री इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ न्यूजीलैंड का कहना है कि यह घटना तैयारी और सुरक्षा उपायों के महत्व को दिखाती है। उन्होंने कहा कि सही तरीके से पकाया गया चिकन, अंडे और अंडों से बने उत्पाद खाना सुरक्षित है।
सरकार ने निगरानी बढ़ाई
बायोसिक्योरिटी मंत्री एंड्रयू हॉगर्ड ने कहा कि दूसरा मामला मिलना पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं था। उन्होंने कहा कि देश की निगरानी प्रणाली काम कर रही है और इसी वजह से संक्रमण का जल्दी पता लगाया जा सका।
सरकार अब वाइरारापा क्षेत्र में जंगली पक्षियों की अतिरिक्त जांच करेगी। साथ ही वेलिंगटन और वाइरारापा के पोल्ट्री और अंडा उत्पादकों को विशेष सहायता दी जाएगी। एक तकनीकी सलाहकार समूह भी बनाया जाएगा, जो सरकार को बर्ड फ्लू से निपटने में मदद करेगा।
दुर्लभ पक्षियों की सुरक्षा पर भी ध्यान
संरक्षण विभाग (डीओसी) न्यूजीलैंड के दुर्लभ पक्षियों को बचाने के लिए पहले से तैयारी कर रहा है। कुछ खतरे में पड़ी प्रजातियों जैसे काकापो, ताकाहे, तुतुरातु, काकी और काकरिकी कराका को वैक्सीन दी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, अब तक छह प्रजातियों या समूहों के 67 पक्षियों को पहली वैक्सीन दी जा चुकी है और आने वाले हफ्तों में अन्य पक्षियों का टीकाकरण जारी रहेगा।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
अधिकारियों ने कहा है कि एच5एन1 बर्ड फ्लू से इंसानों को खतरा बहुत कम है। फिर भी लोगों से अपील की गई है कि वे बीमार या मृत जंगली पक्षियों को न छुएं और न ही उन्हें हटाने की कोशिश करें।
यदि किसी स्थान पर तीन या उससे अधिक बीमार या मृत जंगली पक्षी दिखाई दें, तो इसकी जानकारी अधिकारियों को देनी चाहिए। सरकार का कहना है कि लगातार निगरानी और मजबूत जैव सुरक्षा उपायों से इस बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सकता है।