टीबी के खिलाफ नया मोर्चा: 100 साल बाद दो वैक्सीन अंतिम चरण में, डब्ल्यूएचओ ने वैश्विक तैयारी तेज की

घातक टीबी के खिलाफ नए टीकों पर दुनिया एकजुट, वित्तपोषण व वितरण योजना पर मंथन, डब्ल्यूएचओ ने विकास, परीक्षण और देशों को तैयारी तेज करने पर जोर दिया
हर साल 10 लाख मौतें, एक करोड़ मरीज टीबी से प्रभावित, नए टीकों पर वैश्विक उम्मीदें बढ़ीं और प्रयास तेज
हर साल 10 लाख मौतें, एक करोड़ मरीज टीबी से प्रभावित, नए टीकों पर वैश्विक उम्मीदें बढ़ीं और प्रयास तेजफोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • हर साल 10 लाख मौतें, एक करोड़ मरीज टीबी से प्रभावित, नए टीकों पर वैश्विक उम्मीदें बढ़ीं और प्रयास तेज

  • डब्ल्यूएचओ ने बताया कि 100 वर्षों से नया टीबी टीका नहीं, अब दो उम्मीदवार अंतिम परीक्षण चरण में हैं

  • टीबी दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारी, नए वैक्सीन से मृत्यु और संक्रमण दर घटने की संभावना जताई गई

  • एम72/एएसS01ई और एमटीबीवीएसी टीके ट्रायल में, अगले दो वर्षों में प्रभावशीलता परिणाम आने की वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई

  • टीबी वैक्सीन एक्सेलेरेटर पहल 2023 से जारी, देशों की तैयारी, फंडिंग व वैश्विक पहुंच पर तेजी से हो रहा है काम

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, जिनेवा में 27-28 अप्रैल को उसके द्वारा एक महत्वपूर्ण तकनीकी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य दुनिया भर में तपेदिक (टीबी) के नए टीकों को तेजी से उपलब्ध कराने और उनके उपयोग को आसान बनाने की दिशा में हो रही प्रगति की समीक्षा करना था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बैठक में कई देशों के स्वास्थ्य विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, टीका निर्माता, फंडिंग एजेंसियां और टीबी से जुड़े संगठन शामिल हुए। सभी ने इस बात पर चर्चा की कि आने वाले वर्षों में नए टीके कैसे जल्दी से लोगों तक पहुंचाए जा सकते हैं।

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टीबी: आज भी दुनिया की सबसे बड़ी संक्रामक बीमारी

टीबी आज भी दुनिया में सबसे ज्यादा जान लेने वाली संक्रामक बीमारी है। हर साल एक करोड़ से अधिक लोग टीबी से संक्रमित होते हैं और 10 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है।

इसके बावजूद, पिछले 100 वर्षों में इस बीमारी के लिए कोई नया टीका विकसित नहीं हो पाया है, जो वयस्कों और किशोरों के लिए प्रभावी हो। यही कारण है कि वैज्ञानिक अब नए टीकों पर तेजी से काम कर रहे हैं।

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नए टीकों से जुड़ी उम्मीदें बढ़ीं

रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ नए टीके अभी अंतिम चरण के क्लिनिकल ट्रायल में हैं। इनमें दो प्रमुख टीके शामिल हैं - एम72/एएसS01ई और एमटीबीवीएसी। इन टीकों के परीक्षण के परिणाम अगले एक से दो सालों में आने की उम्मीद है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर ये टीके सफल होते हैं, तो यह टीबी नियंत्रण में एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं। इससे न केवल बीमारी और मौतों में कमी आएगी, बल्कि स्वास्थ्य प्रणालियों पर आर्थिक बोझ भी घटेगा।

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देशों की तैयारी और सहयोग पर जोर

रिपोर्ट में कहा गया है कि बैठक में यह भी तय किया गया कि देशों को अभी से नए टीकों के लिए तैयार किया जाए। इसके लिए एक “कंट्री प्रिपेयर्डनेस कम्युनिटी ऑफ प्रैक्टिस” शुरू की गई है। यह एक ऑनलाइन मंच है, जहां देश और संगठन एक-दूसरे से जानकारी, अनुभव और रणनीतियां साझा कर सकते हैं।

इस पहल को डब्ल्यूएचओ और आईएवीआई ने मिलकर तैयार किया है, जबकि इसे स्टॉप टीबी पार्टनरशिप के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इस मंच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब टीके उपलब्ध हों, तो देश उन्हें जल्दी और समान रूप से अपने लोगों तक पहुंचा सकें।

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नीति और वैज्ञानिक चुनौतियां पर चर्चा

बैठक में वैज्ञानिकों ने इस बात पर भी चर्चा की कि नए टीकों को मंजूरी देने और उन्हें वैश्विक स्तर पर लागू करने के लिए कौन-कौन सी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि केवल टीका बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके लिए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण, नीति समर्थन और देशों की तैयारी भी जरूरी है।

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इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि आने वाले समय में डब्ल्यूएचओ की तकनीकी समितियां इन टीकों की समीक्षा करेंगी ताकि वैश्विक नीति तैयार की जा सके।

वित्तीय व्यवस्था और समान पहुंच पर जोर

बैठक में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा टीकों की फंडिंग और सभी देशों तक समान पहुंच था। विशेषज्ञों ने कहा कि अगर टीके बन भी जाते हैं, तो भी उन्हें गरीब और विकासशील देशों तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती होगी।

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इसके लिए चार प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया जा रहा है:

  1. नए और नवाचार आधारित वित्तीय मॉडल तैयार करना

  2. टीकों की मांग और लागत का अनुमान लगाना

  3. दुनिया भर में फंडिंग की स्थिति का आकलन करना

  4. और क्षेत्रीय स्तर पर टीका उत्पादन बढ़ाना

इन प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी देश टीबी टीके से वंचित न रहे।

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आगे की योजना

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक के निष्कर्षों पर आगे चर्चा 19 मई 2026 को होने वाली टीबी वैक्सीन एक्सेलरेटर कॉउन्सिल की बैठक में की जाएगी। यह बैठक विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान आयोजित होगी।

इसके बाद एक विस्तृत रिपोर्ट 2026 की दूसरी तिमाही में जारी की जाएगी, जिसमें बताया जाएगा कि टीबी टीकों को दुनिया भर में तेजी से उपलब्ध कराने की दिशा में क्या प्रगति हुई है।

यह बैठक इस बात का संकेत है कि दुनिया अब टीबी के खिलाफ एक नए युग की ओर बढ़ रही है। अगर ये नए टीके सफल होते हैं, तो यह लाखों लोगों की जान बचाने और वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।

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