दशकों बाद भी असर: फ्रेंच वेस्ट इंडीज में 80 प्रतिशत लोगों के शरीर में मिला जहरीला कीटनाशक

फ्रांस के कैरेबियन द्वीपों मार्टीनिक और ग्वाडेलूप में दशकों पुराने कीटनाशक का असर अब भी जारी, 80 फीसदी लोगों के खून में जहरीले रसायन के अंश पाए गए
कीटनाशक दशकों पहले केले की खेती में इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन आज भी इसका असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
कीटनाशक दशकों पहले केले की खेती में इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन आज भी इसका असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।प्रतीकात्मक छवि, साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • फ्रेंच कैरेबियन द्वीपों मार्टीनिक और ग्वाडेलूप में 80 प्रतिशत वयस्कों के रक्त में जहरीले क्लोरडेकोन के अंश पाए गए हैं

  • केले की खेती में 1970 से 1993 तक उपयोग हुआ क्लोरडेकोन आज भी मिट्टी और पानी में लंबे समय तक मौजूद है

  • हर छह में एक व्यक्ति में खतरनाक स्तर का कीटनाशक पाया गया, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की आशंका जताई गई है

  • यह जहरीला रसायन प्रोस्टेट कैंसर, तंत्रिका और हार्मोन संबंधी बीमारियों से जुड़ा पाया गया है, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है

  • फ्रांस की संसद ने राज्य की आंशिक जिम्मेदारी स्वीकार की, सफाई और पीड़ितों को मुआवजा देने पर चर्चा शुरू हुई

फ्रांस के विदेशी क्षेत्र मार्टीनिक और ग्वाडेलूप में एक नई वैज्ञानिक रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन द्वीपों के करीब 80 प्रतिशत वयस्कों के खून में अब भी एक खतरनाक कीटनाशक के अंश पाए गए हैं। यह कीटनाशक दशकों पहले केले की खेती में इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन आज भी इसका असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हर छह में से एक व्यक्ति के शरीर में इस रसायन का स्तर इतना अधिक है कि उससे स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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क्लोरडेकोन का इतिहास

यह जहरीला रसायन क्लोरडेकोन, जिसे केपोन के नाम से भी जाना जाता है, 1970 के दशक से लेकर 1993 तक ग्वाडेलूप और मार्टीनिक के केले के बागानों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था। इसका उपयोग खासतौर पर उन कीड़ों को खत्म करने के लिए किया जाता था जो केले की फसल को नुकसान पहुंचाते थे।

फ्रांस ने इस कीटनाशक पर 1990 में प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इन कैरेबियाई द्वीपों में इसका उपयोग 1993 तक जारी रहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 1970 के दशक के अंत में ही चेतावनी दी थी कि यह रसायन मनुष्यों के लिए कैंसर पैदा करने वाला हो सकता है।

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मिट्टी और पानी में अब भी मौजूद जहर

वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लोरडेकोन एक ऐसा रसायन है जो बहुत लंबे समय तक पर्यावरण में बना रहता है। यह मिट्टी में गहराई तक समा जाता है और आसानी से खत्म नहीं होता। इसी कारण आज भी यह पानी, खेतों और समुद्री भोजन के माध्यम से लोगों के शरीर में पहुंच रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह अध्ययन एक हजार से अधिक वयस्कों पर किया गया, जिसमें यह पाया गया कि पिछले दस वर्षों की तुलना में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।

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कौन लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग, और खेती या मछली पकड़ने के काम से जुड़े लोग इस जहरीले रसायन के सबसे अधिक संपर्क में आए हैं। इन लोगों के शरीर में इसका स्तर औसत से ज्यादा पाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय भोजन, खासकर खेतों में उगाई गई सब्जियां और समुद्री मछली, इस रसायन के शरीर में पहुंचने का प्रमुख कारण हैं।

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कैंसर और अन्य बीमारियों से संबंध

क्लोरडेकोन को कई गंभीर बीमारियों से जोड़ा गया है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, यह प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है, और मार्टीनिक तथा ग्वाडेलूप में इस कैंसर की दर दुनिया में सबसे अधिक मानी जाती है।

इसके अलावा पेट के कैंसर, अग्नाशय के कैंसर, तंत्रिका तंत्र की समस्याएं, हार्मोन असंतुलन, प्रजनन संबंधी समस्याएं और दिल से जुड़ी बीमारियों पर भी इसके प्रभाव देखे गए हैं। फ्रांस की स्वास्थ्य एजेंसी अनेस ने भी इन खतरों की पुष्टि की है।

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राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस मुद्दे पर अब राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में फ्रांस की संसद ने स्वीकार किया है कि इस संकट में राज्य की कुछ जिम्मेदारी बनती है। संसद ने एक प्रस्ताव में माना है कि पर्यावरण, स्वास्थ्य, आर्थिक और सामाजिक नुकसान के लिए सरकार की भूमिका रही है।

इसके साथ ही, प्रभावित क्षेत्रों की मिट्टी और पानी को साफ करने तथा प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की योजना पर भी चर्चा की गई है।

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लंबे समय तक रहने वाला संकट

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक पुराने कीटनाशक के इस्तेमाल का नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि कुछ रसायन कितने लंबे समय तक प्रकृति और मानव शरीर को प्रभावित कर सकते हैं। दशकों बाद भी इसका असर खत्म न होना वैज्ञानिकों और सरकार दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

आज भी मार्टीनिक और ग्वाडेलूप के लोग इस अदृश्य खतरे के साथ जीवन जी रहे हैं, जो उनके भोजन, पानी और जमीन में कहीं न कहीं मौजूद है।

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