

अध्ययन में कीटनाशकों के मिश्रण और कैंसर के खतरे के बीच मजबूत संबंध सामने आया है
पेरू के कई क्षेत्रों में उच्च कीटनाशक संपर्क वाले लोगों में कैंसर का खतरा लगभग 150 प्रतिशत अधिक पाया गया
एक साथ कई कीटनाशकों के संपर्क से शरीर में धीरे-धीरे बदलाव होते हैं, जो लंबे समय बाद गंभीर बीमारियों का कारण बनते
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अलग-अलग कीटनाशक सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन उनका संयुक्त प्रभाव खतरनाक हो सकता है
वैज्ञानिकों ने चेताया कि वर्तमान सुरक्षा नीतियां वास्तविक जीवन के मिश्रित रासायनिक संपर्क को ध्यान में नहीं रखतीं, बदलाव जरूरी है
हाल ही में वैज्ञानिक पत्रिका नेचर हेल्थ में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने कीटनाशकों और कैंसर के बीच एक मजबूत संबंध की ओर संकेत किया है। इस शोध को इंस्टीट्यूट पाश्चर, यूनिवर्सिटी ऑफ टूलूज और पेरू के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नियोप्लास्टिक डिजीजेज जैसे प्रमुख संस्थानों के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है। यह अध्ययन बताता है कि पर्यावरण में मौजूद कीटनाशकों का मिश्रण मानव स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है।
कीटनाशक: हर जगह मौजूद लेकिन असर समझना कठिन
आज कीटनाशक हमारे भोजन, पानी और हवा में अलग-अलग रूपों में मौजूद हैं। आम तौर पर लोग एक ही रसायन के बारे में सोचते हैं, लेकिन वास्तविकता में हम कई तरह के कीटनाशकों के मिश्रण के संपर्क में आते हैं। अब तक के अधिकतर शोध एक समय में एक ही रसायन पर आधारित थे, जिससे वास्तविक जीवन की स्थिति पूरी तरह सामने नहीं आ पाती थी। यही कारण है कि इस नए अध्ययन को खास माना जा रहा है, क्योंकि इसमें एक साथ कई कीटनाशकों के प्रभाव को समझने की कोशिश की गई है।
पेरू को क्यों चुना गया
इस अध्ययन के लिए पेरू को चुना गया क्योंकि वहां कृषि गतिविधियां बहुत अधिक हैं और पर्यावरणीय विविधता भी काफी है। देश के कुछ हिस्सों में कीटनाशकों का उपयोग ज्यादा होता है, खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में। शोध में पाया गया कि इन इलाकों में रहने वाले लोग एक ही समय में औसतन 12 अलग-अलग कीटनाशकों के संपर्क में आते हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर ज्यादा खतरा हो सकता है।
कैंसर के मामलों से सीधा संबंध
वैज्ञानिकों ने 2014 से 2019 के बीच कीटनाशकों के फैलाव का एक विस्तृत नक्शा तैयार किया। इसके बाद 2007 से 2020 तक के 1.5 लाख से अधिक कैंसर मरीजों के आंकड़ों से इसकी तुलना की गई। परिणाम चौंकाने वाले थे। जिन क्षेत्रों में कीटनाशकों का स्तर ज्यादा था, वहां कैंसर के मामले भी अधिक पाए गए।
औसतन, ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में कैंसर होने की आशंका लगभग 150 प्रतिशत अधिक पाई गई। खास बात यह है कि अध्ययन में शामिल किसी भी कीटनाशक को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा सीधे कैंसर पैदा करने वाला नहीं माना गया है। फिर भी, जब ये सभी एक साथ मौजूद होते हैं, तो इनका संयुक्त प्रभाव खतरनाक हो सकता है।
शरीर पर धीरे-धीरे होने वाला असर
इस शोध में यह भी सामने आया कि कीटनाशकों का असर तुरंत दिखाई नहीं देता। ये शरीर में धीरे-धीरे बदलाव करते हैं। खासकर लीवर पर इनका असर अधिक होता है, क्योंकि लीवर शरीर में आने वाले रसायनों को प्रोसेस करता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, कीटनाशक कोशिकाओं के सामान्य कामकाज में बाधा डाल सकते हैं। ये बदलाव लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के चलते रहते हैं और बाद में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, ये शरीर को संक्रमण, सूजन और अन्य पर्यावरणीय खतरों के प्रति भी अधिक संवेदनशील बना देते हैं।
नीतियों पर असर और नई सोच की जरूरत
यह अध्ययन मौजूदा स्वास्थ्य नीतियों पर भी सवाल खड़ा करता है। अभी तक ज्यादातर नियम एक समय में एक ही रसायन के सुरक्षित स्तर को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। लेकिन यह शोध दिखाता है कि कई रसायनों का संयुक्त प्रभाव अधिक खतरनाक हो सकता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि अब समय आ गया है कि खतरे का आकलन वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर किया जाए। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन और मौसम की घटनाएं, जैसे एल नीनो, भी कीटनाशकों के फैलाव को प्रभावित कर सकती हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय
हालांकि यह अध्ययन पेरू पर आधारित है, लेकिन इसके निष्कर्ष पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हैं। आज लगभग हर देश में कृषि में कीटनाशकों का उपयोग होता है। ऐसे में यह समस्या केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण और गरीब समुदाय इस खतरे के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं। इसलिए भविष्य में ऐसी नीतियां बनानी होंगी जो सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
कुल मिलाकर, यह अध्ययन एक नई दिशा दिखाता है। यह बताता है कि कीटनाशकों का असर पहले से कहीं ज्यादा जटिल है। अब जरूरत है कि इस विषय पर और गहराई से शोध किया जाए और ऐसी नीतियां बनाई जाएं जो लोगों को वास्तविक जीवन के खतरों से बचा सकें।