चमगादड़ों की अनोखी प्रतिरक्षा प्रणाली का खुलासा, बिना बीमार पड़े खतरनाक वायरस रखते हैं अपने साथ

चमगादड़ों की अनोखी प्रतिरक्षा प्रणाली का खुलासा, एंटीबॉडी बनाने वाले दो जीन मिले, वैज्ञानिकों को वायरस से बचाव का नया रास्ता दिखा
वैज्ञानिकों का मानना है कि वेस्पर चमगादड़ों की अनोखी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें कई तरह के वायरस के साथ रहने में मदद कर सकती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि वेस्पर चमगादड़ों की अनोखी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें कई तरह के वायरस के साथ रहने में मदद कर सकती है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • वैज्ञानिकों ने चमगादड़ों में एंटीबॉडी बनाने वाले जीन की दो अलग प्रणालियां खोजीं, जो दूसरे स्तनधारियों में नहीं मिलती हैं।

  • वैज्ञानिकों का मानना है कि वेस्पर चमगादड़ों की अनोखी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें कई तरह के वायरस के साथ रहने में मदद कर सकती है।

  • नई खोज से वैज्ञानिकों को चमगादड़ों की मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली और वायरस के प्रति उनकी सहनशीलता समझने में मदद मिलेगी।

  • शोधकर्ताओं के अनुसार, चमगादड़ों की प्रतिरक्षा प्रणाली पर अब तक जन्मजात सुरक्षा को ज्यादा महत्व दिया गया, लेकिन नई खोज दिशा बदलेगी।

  • वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि चमगादड़ों की प्रतिरक्षा समझने से भविष्य में वायरस और जानवरों से इंसानों में संक्रमण रोकने में मदद मिलेगी।

अमेरिका के वैज्ञानिकों ने चमगादड़ों की प्रतिरक्षा प्रणाली को लेकर एक ऐसी खोज की है, जो भविष्य में बीमारियों और वायरस के बारे में हमारी समझ को बदल सकती है। तुलाने यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर यह अध्ययन किया है। यह अध्ययन साइंस एडवांसेज नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

शोध में पता चला है कि चमगादड़ों के एक बड़े समूह, जिसे वेस्पर बैट्स कहा जाता है, में एंटीबॉडी बनाने वाले जीन की दो अलग-अलग प्रतियां मौजूद हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, अब तक किसी दूसरे स्तनधारी जीव में इस तरह की व्यवस्था नहीं देखी गई है।

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वैज्ञानिकों का मानना है कि वेस्पर चमगादड़ों की अनोखी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें कई तरह के वायरस के साथ रहने में मदद कर सकती है।

एंटीबॉडी कैसे करती हैं काम?

हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से लड़ने के लिए कई तरह के हथियारों का इस्तेमाल करती है। इनमें एंटीबॉडी भी महत्वपूर्ण हैं। एंटीबॉडी विशेष प्रोटीन होते हैं, जो शरीर में मौजूद वायरस और दूसरे हानिकारक तत्वों को पहचानने में मदद करते हैं।

इंसानों और दूसरे ज्ञात स्तनधारियों में एंटीबॉडी की भारी प्रोटीन श्रृंखला बनाने के लिए जीन का एक ही समूह होता है। लेकिन वेस्पर चमगादड़ों में वैज्ञानिकों को ऐसे जीन के दो अलग-अलग समूह मिले हैं।

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वैज्ञानिकों का मानना है कि वेस्पर चमगादड़ों की अनोखी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें कई तरह के वायरस के साथ रहने में मदद कर सकती है।

इसका मतलब यह हो सकता है कि इन चमगादड़ों के शरीर में अलग-अलग तरह की एंटीबॉडी बनाने की क्षमता अधिक हो। इससे उन्हें कई प्रकार के संक्रमणों से निपटने में मदद मिल सकती है।

500 से ज्यादा प्रजातियों वाला समूह

वेस्पर चमगादड़ दुनिया के सबसे बड़े चमगादड़ परिवारों में से एक हैं। इस समूह में 500 से ज्यादा प्रजातियां शामिल हैं। ये अंटार्कटिका को छोड़कर लगभग हर महाद्वीप पर पाई जाती हैं।

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वैज्ञानिकों का मानना है कि वेस्पर चमगादड़ों की अनोखी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें कई तरह के वायरस के साथ रहने में मदद कर सकती है।

वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि चमगादड़ इतने सफल जीव कैसे बने और वे कई तरह के वायरस के साथ रहते हुए भी अक्सर गंभीर रूप से बीमार क्यों नहीं पड़ते।

तुलाने यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता के अनुसार, यह खोज इस सवाल का पूरा जवाब नहीं देती, लेकिन यह जरूर बताती है कि चमगादड़ों की प्रतिरक्षा प्रणाली वैज्ञानिकों की सोच से कहीं अधिक अलग और विविध हो सकती है।

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वैज्ञानिकों का मानना है कि वेस्पर चमगादड़ों की अनोखी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें कई तरह के वायरस के साथ रहने में मदद कर सकती है।

अब तक जन्मजात प्रतिरक्षा पर था ध्यान

चमगादड़ों की प्रतिरक्षा प्रणाली पर पहले भी काफी शोध हुआ है। लेकिन वैज्ञानिकों का ध्यान ज्यादातर उनकी जन्मजात प्रतिरक्षा प्रणाली पर रहा है। यह शरीर की वह पहली सुरक्षा व्यवस्था है, जो संक्रमण के खिलाफ तुरंत प्रतिक्रिया देती है।

नई खोज से पता चला है कि चमगादड़ों की अनुकूलनशील या एडैप्टिव प्रतिरक्षा प्रणाली को भी समझना जरूरी है। यही प्रणाली जरूरत के अनुसार विशेष एंटीबॉडी बनाती है और भविष्य में उसी तरह के संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर को तैयार करती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि एंटीबॉडी बनाने वाले जीन की दो अलग प्रणालियां चमगादड़ों की इस क्षमता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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वैज्ञानिकों का मानना है कि वेस्पर चमगादड़ों की अनोखी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें कई तरह के वायरस के साथ रहने में मदद कर सकती है।

इंसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

चमगादड़ प्रकृति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। वे परागण में मदद करते हैं, बीजों को फैलाते हैं और बड़ी संख्या में कीड़े खाकर प्राकृतिक कीट नियंत्रण में योगदान देते हैं। साथ ही, वे कई प्रकार के वायरस के प्राकृतिक मेजबान भी हैं।

चमगादड़ इन वायरस के संपर्क में आने के बावजूद कई बार गंभीर बीमारी से बच जाते हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को समझने में खास रुचि रखते हैं।

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वैज्ञानिकों का मानना है कि वेस्पर चमगादड़ों की अनोखी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें कई तरह के वायरस के साथ रहने में मदद कर सकती है।

अगर शोधकर्ता यह समझ पाए कि चमगादड़ वायरस के साथ किस तरह संतुलन बनाकर रहते हैं, तो भविष्य में दूसरे जीवों की प्रतिरक्षा प्रणाली को समझने में भी मदद मिल सकती है। इससे उन बीमारियों के बारे में जानकारी बढ़ सकती है, जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं।

अभी कई सवाल बाकी

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस खोज के बाद भी कई सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं। यह अभी साबित नहीं हुआ है कि एंटीबॉडी जीन की दो प्रणालियां ही चमगादड़ों को वायरस के प्रति अधिक सहनशील बनाती हैं।

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वैज्ञानिकों का मानना है कि वेस्पर चमगादड़ों की अनोखी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें कई तरह के वायरस के साथ रहने में मदद कर सकती है।

फिर भी, यह खोज प्रतिरक्षा विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। वैज्ञानिकों को अब यह पता लगाने का नया रास्ता मिला है कि चमगादड़ों की प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे विकसित हुई और वह दूसरे स्तनधारियों से इतनी अलग क्यों है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि इंसानों और प्रयोगशाला में इस्तेमाल होने वाले चूहों के अध्ययन से हमें प्रतिरक्षा के बारे में बहुत कुछ पता चला है। लेकिन प्रकृति में मौजूद जीवों की विविधता इससे कहीं अधिक है। चमगादड़ों की यह खोज इसी बात का एक नया उदाहरण है।

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