

पश्चिम एशिया तनाव के कारण तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर, भारत में एलपीजी महंगी और उपलब्धता में कमी।
2011-12 से 2024-25 तक एलपीजी खपत दोगुनी, 93 फीसदी की बढ़ोतरी आयात के माध्यम से पूरी की गई।
इंडक्शन, इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर और इन्फ्रारेड स्टोव की मांग बढ़ी, अधिक ऊर्जा-कुशल विकल्प के रूप में लोकप्रिय।
आईआईएसडी की 2026 रिपोर्ट: घरेलू बिजली आधारित खाना बनाना एलपीजी और पीएनजी से सस्ता, सालाना खर्च करीब 5,800 से 5,900 रुपये, किफायती।
सिंगल-जोन इंडक्शन, पारंपरिक आदतें, बिजली टैरिफ और शुरुआती लागत, सरकार वैकल्पिक गैस स्रोत तलाश रही है।
पश्चिम एशिया में बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति के कारण क्रूड तेल की कीमत हाल ही में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई है। यह भारत जैसे देशों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि हमारी ऊर्जा की अधिकांश जरूरतें आयात पर निर्भर हैं।
तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर घरेलू ऊर्जा की कीमतों पर असर डाल रही है। खासकर एलपीजी की आपूर्ति में रुकावट और इसके दामों में वृद्धि दिखाई दे रही है।
एलपीजी की बढ़ती खपत और आयात पर निर्भरता
भारत में एलपीजी की खपत तेजी से बढ़ी है। 2011-12 में लगभग 1.5 करोड़ मीट्रिक टन थी, जो 2024-25 में बढ़कर लगभग 3.1 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंच गई। इंटरनेशनल इंस्टीटूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईआईएसडी) 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, इस बढ़ोतरी का 93 फीसदी से अधिक हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा किया गया।
एलपीजी की अधिकतर आपूर्ति पश्चिम एशिया के देशों से होती है। इसी वजह से, भारत के घरेलू एलपीजी बाजार में वैश्विक संकट के समय तुरंत असर दिखाई देता है। कई शहरों में सिलेंडर की डिलीवरी में देरी होने की खबर है और व्यवसायिक उपयोग के लिए गैस महंगी हो गई है। छोटे रेस्तरां इस समय अपने फायदे को बनाए रखने में संघर्ष कर रहे हैं।
देश में इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर रुझान
एलपीजी की कीमत बढ़ने और आपूर्ति में रुकावट के कारण लोग इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की ओर बढ़ रहे हैं। शहरी बाजारों में इंडक्शन कुकटॉप, इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर और इन्फ्रारेड स्टोव की मांग बढ़ी है।
आईआईएसडी की साल 2026 की रिपोर्ट में एलपीजी, पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) और बिजली की लागत की तुलना की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान दामों पर एलपीजी (14.2 किग्रा 853 रुपये प्रति सिलेंडर) जो सालाना लगभग 6,800 से 6,900 रुपये तक पहुंच जाता है। वहीं पीएनजी (50 रूपये प्रति एससीएम) - सालाना लगभग 6,800 से 6,900 रुपये तक पहुंच जाता है। जबकि बिजली (6 रुपये प्रति किलोवाट) - सालाना लगभग 5,800 से 5,900 रुपये तक पहुंचता है।
यानी इलेक्ट्रिक कुकिंग अधिकतर घरेलू उपयोग के लिए सबसे किफायती विकल्प है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर बिजली की कीमत सात रूपये प्रति किलोवाट तक रहती है तो इलेक्ट्रिक कुकिंग एलपीजी और पीएनजी से सस्ती बनी रहती है।
बिजली के फायदे और स्थिरता
एलपीजी की कीमतें वैश्विक तेल बाजार से प्रभावित होती हैं। इसके विपरीत, बिजली घरेलू स्तर पर उत्पन्न होती है और इसमें अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव का असर कम होता है।
इससे घरेलू उपयोग के लिए स्थिर और किफायती विकल्प मिलता है। इससे न सिर्फ ऊर्जा की बचत होती है, बल्कि भारत की आयात-आधारित ऊर्जा पर निर्भरता भी कम होती है।
इलेक्ट्रिक कुकिंग अपनाने में चुनौतियां
हालांकि इलेक्ट्रिक कुकिंग बढ़ रही है, लेकिन कुछ चुनौतियां अभी भी हैं बनी हुई हैं-
अधिकतर इंडक्शन कुकटॉप सिंगल-जोन होते हैं, जबकि एलपीजी स्टोव में कई बर्नर होते हैं।
घरेलू खाना पकाने की आदतें और हीट कंट्रोल में फर्क।
शुरुआती लागत: इंडक्शन कुकटॉप और संगत बर्तन महंगे हो सकते हैं।
स्थानीय बिजली टैरिफ और एलपीजी सब्सिडी का असर।
सरकारी कदम और नीतिगत नजरिया
हालांकि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी दी है। जिसमें कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के मद्देनजर ईंधन आपूर्ति और पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार ने कहा है कि वह पश्चिम एशिया से गैस आपूर्ति के खतरे को कम करने के लिए विकल्पी आपूर्तिकर्ताओं और मार्गों से गैस खरीदना शुरू कर दिया है। इस संकट ने यह दिखाया है कि भारत की रोजमर्रा की ऊर्जा की आयात पर निर्भरता एक बड़ी कमजोरी है। इस स्थिति में इलेक्ट्रिक कुकिंग न केवल लागत-कुशल है, बल्कि देश को विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद भी करती है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत में रिफाइनरियां पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार के साथ पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। भारत में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त उत्पादन है और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आयात की जरूरत नहीं है।
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, वितरक केंद्रों पर किसी भी प्रकार के अभाव नहीं है। ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग में 83 प्रतिशत से बढ़कर 93 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
फिर भी बढ़ती एलपीजी कीमतों और आपूर्ति में अनिश्चितता ने भारत में इलेक्ट्रिक कुकिंग की मांग बढ़ा दी है। इंटरनेशनल इंस्टीटूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईआईएसडी) 2026 की रिपोर्ट से पता चलता है कि अधिकांश घरेलू उपयोग के लिए इलेक्ट्रिक कुकिंग अब सस्ती और ऊर्जा-कुशल विकल्प बन चुकी है।
जब तक वैश्विक तेल बाजार अस्थिर हैं, घरेलू ऊर्जा की स्थिरता के लिए बिजली आधारित रसोई विकल्प अपनाना एक व्यावहारिक और लंबे समय तक समाधान माना जा सकता है।