दुनिया में 65 करोड़ से अधिक लोग बिना बिजली के, 2 अरब प्रदूषित ईंधन पर निर्भर: रिपोर्ट

दुनिया में ऊर्जा संकट गहराया: 65 करोड़ से ज्यादा लोग बिजली से वंचित, 2 अरब अब भी प्रदूषित ईंधन पर निर्भर, एडीजी 2030 लक्ष्य खतरे में
लगभग 2 अरब लोग आज भी लकड़ी, कोयला जैसे प्रदूषित ईंधनों से खाना पकाते हैं, स्वास्थ्य गंभीर खतरे में है।
लगभग 2 अरब लोग आज भी लकड़ी, कोयला जैसे प्रदूषित ईंधनों से खाना पकाते हैं, स्वास्थ्य गंभीर खतरे में है।प्रतीकात्मक छवि, साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • दुनिया में 65.5 करोड़ लोग अभी भी बिजली से वंचित हैं, सबसे ज्यादा असर उप-सहारा अफ्रीका क्षेत्र में देखा गया है।

  • लगभग 200 करोड़ लोग आज भी लकड़ी, कोयला जैसे प्रदूषित ईंधनों से खाना पकाते हैं, स्वास्थ्य गंभीर खतरे में है।

  • नवीकरणीय ऊर्जा बढ़कर 30 प्रतिशत बिजली उत्पादन तक पहुंची, लेकिन गरीब और अमीर देशों में भारी असमानता बनी हुई है।

  • ऊर्जा पहुंच की प्रगति धीमी हो गई है, 2030 तक लक्ष्य पाने के लिए मौजूदा गति को तीन गुना करना जरूरी है।

  • अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा वित्तपोषण अपर्याप्त है, अधिकांश फंडिंग ऋण आधारित है, जिससे विकासशील देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

हाल ही में जारी “ट्रैकिंग एसडीजी 7: दि एनर्जी प्रोगेस रिपोर्ट ” ने दुनिया में ऊर्जा की स्थिति को लेकर गंभीर तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, आज भी लगभग 65.5 करोड़ लोग बिजली से वंचित हैं। वहीं करीब 200 करोड़ लोग ऐसे ईंधनों और तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, जैसे लकड़ी, कोयला, मिट्टी का तेल और गोबर आदि। इससे उनके स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा बना हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा सुरक्षा और सस्ती ऊर्जा आज दुनिया के विकास एजेंडे में सबसे ऊपर हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रगति बहुत धीमी है।

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सबसे अधिक असर अफ्रीका के उप-सहारा क्षेत्र पर

रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे अधिक समस्या उप-सहारा अफ्रीका में है। यहां 56 करोड़ से अधिक लोग बिजली के बिना जीवन जी रहे हैं। इसके अलावा लगभग 97 करोड़ लोगों के पास स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन की सुविधा नहीं है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है। यहां बिजली की पहुंच बढ़ने की गति धीमी हो गई है और कई लोग अब भी बुनियादी ऊर्जा सुविधाओं से वंचित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी गति से काम चलता रहा तो 2030 तक सभी को बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा।

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2030 लक्ष्य के लिए तीन गुना तेजी की जरूरत

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि दुनिया को 2030 तक सभी को बिजली उपलब्ध करानी है, तो वर्तमान गति को लगभग तीन गुना बढ़ाना होगा। अभी वैश्विक स्तर पर बिजली की पहुंच 92 प्रतिशत तक पहुंची है, लेकिन यह प्रगति अब पहले की तुलना में आधी हो गई है।

ग्रामीण और गरीब देशों में यह समस्या और गंभीर होती जा रही है, जहां बुनियादी ढांचा और निवेश दोनों की कमी है।

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स्वच्छ खाना पकाने की सबसे बड़ी चुनौती

दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा समस्या स्वच्छ खाना पकाने की सुविधा की कमी है। लगभग 200 करोड़ लोग आज भी ऐसे ईंधनों का उपयोग कर रहे हैं जो धुआं पैदा करते हैं और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 56 प्रतिशत लोगों को ही स्वच्छ खाना पकाने की सुविधा मिल पाई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 89 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो 2030 तक भी 180 करोड़ लोग ऐसे ही प्रदूषित ईंधनों पर निर्भर रह सकते हैं। इससे हर साल लगभग 30 लाख लोगों की मृत्यु घरेलू प्रदूषण के कारण होती है।

नवीकरणीय ऊर्जा में प्रगति लेकिन असमानता बनी हुई है

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर और पवन ऊर्जा में तेजी से वृद्धि हो रही है। अब दुनिया की लगभग 30 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय स्रोतों से आ रही है।

लेकिन यह प्रगति सभी देशों में समान नहीं है। उच्च आय वाले देशों में प्रति व्यक्ति नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बहुत अधिक है, जबकि गरीब देशों में यह बहुत कम है। इसका मतलब है कि स्वच्छ ऊर्जा का लाभ अभी भी हर देश और हर व्यक्ति तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।

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ऊर्जा दक्षता और निवेश की कमी

ऊर्जा को बेहतर तरीके से उपयोग करने की दिशा में भी प्रगति धीमी है। ऊर्जा दक्षता में सुधार की दर पहले से कम हो गई है, जो चिंता का विषय है।

इसके अलावा विकासशील देशों को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता भी बहुत सीमित है। कई देशों में यह सहायता कम हो रही है, जिससे ऊर्जा परियोजनाओं को आगे बढ़ाना कठिन हो रहा है। अधिकांश वित्त ऋण के रूप में दिया जा रहा है, जबकि अनुदान बहुत कम है।

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2030 से पहले बड़े कदम जरूरी

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यदि अभी से तेज और बड़े कदम नहीं उठाए गए तो दुनिया 2030 तक सतत विकास लक्ष्य सात को हासिल नहीं कर पाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि देशों को नीतियों में सुधार, निवेश बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से अपनाने की जरूरत है।

साथ ही यह भी जरूरी है कि गरीब और पिछड़े क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि कोई भी व्यक्ति बिजली और स्वच्छ ऊर्जा जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित न रहे।

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