

अध्ययन में पाया गया कि बैटरी स्टोरेज सिस्टम ने बिजली ग्रिड की स्थिरता बढ़ाकर वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी सुधार तेज किया
वैनाडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी ने अचानक बिजली व्यवधानों को नियंत्रित कर ग्रिड में उतार-चढ़ाव को काफी हद तक कम किया
10 मेगावाट बैटरी सिस्टम ने सिमुलेशन में ब्लैकआउट जोखिम घटाकर बिजली आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया
शोध में साबित हुआ कि बैटरी ऊर्जा भंडारण नवीकरणीय ऊर्जा के साथ ग्रिड संतुलन और स्थिरता बनाए रखने में सहायक है
स्मार्ट संचालन रणनीति से बैटरी प्रदर्शन बेहतर हुआ, लेकिन ऊर्जा खपत बढ़ने से संतुलित उपयोग की आवश्यकता स्पष्ट हुई
दुनिया भर में बिजली उत्पादन तेजी से बदल रहा है। अब कोयला और गैस जैसे पारंपरिक स्रोतों की जगह सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोत लिए जा रहे हैं। यह बदलाव पर्यावरण के लिए अच्छा है, लेकिन इसके साथ एक बड़ी तकनीकी चुनौती भी सामने आई है।
सौर और पवन ऊर्जा से बनने वाली बिजली में “इनर्शिया” यानी निष्क्रियता नहीं होती। पहले बड़े बिजली घरों में घूमते हुए टरबाइन इस निष्क्रियता को प्रदान करते थे, जिससे ग्रिड स्थिर रहता था। लेकिन नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ने से ग्रिड में अचानक वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी बदलने का खतरा बढ़ गया है, जिससे कभी-कभी बिजली कटौती या ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन सकती है।
इक्वाडोर में किया गया महत्वपूर्ण शोध
इसी समस्या के समाधान के लिए इक्वाडोर के एस्कुएला सुपीरियर पोलिटेकनिका डेल लिटोरल (ईएसपीओएल) और देश के बिजली संचालन संस्थान सेनास के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण अध्ययन किया है। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय जर्नल “जर्नल ऑफ एनर्जी स्टोरेज” में प्रकाशित किया गया है।
इस शोध में बताया गया है कि बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) बिजली ग्रिड को अधिक स्थिर और सुरक्षित बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है, खासकर तब जब नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ रही हो।
खास प्रकार की बैटरी का उपयोग
इस अध्ययन में लिथियम-आयन बैटरी के बजाय एक अलग तकनीक की बैटरी पर ध्यान दिया गया, जिसे वैनाडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी (वीआरबी) कहा जाता है।
यह बैटरी सामान्य बैटरियों से अलग होती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी उम्र बहुत लंबी होती है और इसे आसानी से बड़े पैमाने पर बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा यह लंबे समय तक लगातार ऊर्जा देने में सक्षम होती है, जिससे यह बिजली ग्रिड के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती है।
कैसे किया गया अध्ययन
शोधकर्ताओं ने 10 मेगावाट क्षमता वाला एक बैटरी सिस्टम तैयार किया, जिसकी ऊर्जा क्षमता 4.17 मेगावाट-घंटा थी। इसे इक्वाडोर की एक महत्वपूर्ण 230 केवी ट्रांसमिशन लाइन मिलाग्रो–जोरे पर जोड़ा गया।
इस प्रणाली को ऐसे डिजाइन किया गया कि यह अचानक आने वाली बिजली की समस्याओं में तुरंत सहायता कर सके। इसका मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि बैटरी सिस्टम ग्रिड की स्थिरता को कैसे प्रभावित करता है।
इस अध्ययन में एक उन्नत तकनीक का उपयोग किया गया जिसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ट्रांजिएंट (ईएमटी) सिमुलेशन कहा जाता है। यह तकनीक बहुत छोटे समय अंतराल यानी माइक्रोसेकंड स्तर पर बिजली ग्रिड के व्यवहार को समझने में मदद करती है।
अध्ययन के परिणाम
सिमुलेशन के दौरान पाया गया कि जब बैटरी सिस्टम नहीं था, तो अचानक खराबी या बिजली उत्पादन में कमी आने पर ग्रिड में वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी बहुत तेजी से गिर जाती थी। इसके कारण बिजली सप्लाई अस्थिर हो जाती थी। लेकिन जब बैटरी सिस्टम को जोड़ा गया, तो स्थिति काफी बेहतर हो गई। बैटरी ने तुरंत प्रतिक्रिया देकर ग्रिड को संभाला और झटकों को कम किया।
परिणामों के अनुसार, वोल्टेज रिकवरी समय में लगभग 28 प्रतिशत सुधार हुआ। फ्रीक्वेंसी रिकवरी समय में लगभग 24 प्रतिशत सुधार हुआ। प्रणाली में होने वाले उतार-चढ़ाव भी तेजी से कम हुए। यह दिखाता है कि बैटरी सिस्टम बिजली ग्रिड को स्थिर रखने में बहुत प्रभावी हो सकता है।
संचालन की एक महत्वपूर्ण बात
शोध में यह भी पाया गया कि बैटरी किस स्तर पर काम कर रही है, इसका उसके प्रदर्शन पर बड़ा असर पड़ता है। यदि बैटरी अधिक ऊर्जा देती है, तो ग्रिड जल्दी स्थिर हो जाता है, लेकिन इससे बैटरी की ऊर्जा जल्दी खत्म हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि ऐसी स्मार्ट तकनीक विकसित की जाए, जो यह तय कर सके कि किस समय बैटरी से कितनी ऊर्जा लेनी है और कब बचानी है।
भविष्य की दिशा
यह अध्ययन दिखाता है कि बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम आने वाले समय में बिजली ग्रिड का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। यह न केवल खराबी को रोकने में मदद करेगा, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा को बड़े स्तर पर अपनाने में भी सहायक होगा।
दुनिया जब तेजी से कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में बढ़ रही है, ऐसे तकनीकी समाधान ऊर्जा व्यवस्था को सुरक्षित और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। खासकर उन देशों के लिए, जहां बिजली की मांग बढ़ रही है और ग्रिड पर दबाव अधिक है, यह तकनीक भविष्य में बहुत उपयोगी साबित हो सकती है।