समुद्र के “अदृश्य मजदूर”: जलवायु को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं सूक्ष्म जीव

समुद्र के सूक्ष्म जीव कार्बन चक्र, जलवायु मॉडल बेहतर बनाने और पृथ्वी के कार्बन संतुलन को समझने में बड़ी मदद कर सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने समुद्री सूक्ष्म जीवों को आठ समूहों में बांटकर कार्बन चक्र समझने का नया तरीका विकसित किया है।
वैज्ञानिकों ने समुद्री सूक्ष्म जीवों को आठ समूहों में बांटकर कार्बन चक्र समझने का नया तरीका विकसित किया है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • वैज्ञानिकों ने समुद्री सूक्ष्म जीवों को आठ समूहों में बांटकर कार्बन चक्र समझने का नया तरीका विकसित किया है।

  • शोध में माइक्रोब्स की भोजन उपयोग क्षमता और वृद्धि पैटर्न का विश्लेषण किया गया है।

  • अध्ययन बताता है कि तेज बढ़ने वाले सामान्यत: तटीय क्षेत्रों में और विशेष जीव खुले समुद्र में पाए जाते हैं।

  • शोध से जलवायु मॉडल अधिक सटीक बन सकते हैं क्योंकि सूक्ष्म जीवों की भूमिका अब बेहतर समझी जा सकेगी।

  • यह अध्ययन महासागर में कार्बन संतुलन और सूक्ष्म जीवों की भूमिकाओं पर नई रोशनी डालता है।

यूएससी डॉर्नसाइफ कॉलेज ऑफ लेटर्स, आर्ट्स एंड साइंसेज के वैज्ञानिकों ने समुद्र में मौजूद सूक्ष्म जीवों को समझने का एक नया तरीका खोजा है। यह शोध हाल ही में साइंस एडवांसेज में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन से पता चलता है कि समुद्र में रहने वाले अरबों-खरबों सूक्ष्म जीव पृथ्वी की जलवायु को नियंत्रित करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं।

ये सूक्ष्म जीव इतने छोटे होते हैं कि इन्हें नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता, लेकिन इनका काम बहुत बड़ा होता है। ये समुद्र में मौजूद कार्बन युक्त पदार्थों को तोड़ते हैं और कार्बन चक्र को संतुलित रखते हैं।

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समुद्र के अंदर छिपा हुआ जीवन

समुद्र के पानी में असंख्य सूक्ष्म जीव रहते हैं। इनमें से कुछ जीव सूर्य की रोशनी का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड से भोजन बनाते हैं। इसे प्रकाश संश्लेषण कहा जाता है। वहीं कुछ अन्य सूक्ष्म जीव उन बने हुए कार्बनिक पदार्थों को खाते हैं और फिर उन्हें वापस कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में समुद्र में छोड़ देते हैं।

इस तरह समुद्र में एक लगातार चलने वाला चक्र बना रहता है। यह चक्र पृथ्वी के वातावरण में कार्बन की मात्रा को नियंत्रित करता है और जलवायु को प्रभावित करता है

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वैज्ञानिकों के लिए समस्या यह थी कि इतने सारे अलग-अलग सूक्ष्म जीवों को समझना बहुत कठिन था। एक ही समुद्र के पानी में हजारों प्रकार के सूक्ष्म जीव पाए जाते हैं। ऐसे में यह जानना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा जीव क्या काम कर रहा है।

शोध में नया तरीका

इस समस्या को हल करने के लिए वैज्ञानिकों ने दुनिया भर के समुद्री नमूनों से सूक्ष्म जीवों का आनुवंशिक डेटा इकट्ठा किया। फिर कंप्यूटर मॉडल की मदद से यह समझने की कोशिश की कि कौन सा जीव किस तरह के भोजन का उपयोग करता है।

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उन्होंने यह भी देखा कि जब भोजन की कमी होती है, तो अलग-अलग सूक्ष्म जीव कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। इससे यह समझने में मदद मिली कि कौन से जीव किन संसाधनों पर अधिक निर्भर हैं।

इसके बाद वैज्ञानिकों ने मशीन लर्निंग का उपयोग करके इन सभी सूक्ष्म जीवों को आठ बड़े समूहों में बांट दिया। इन समूहों को “मेटाबोलिक नाइश” यानी “उपापचयी भूमिकाएं” कहा गया है।

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दो प्रमुख प्रकार के सूक्ष्म जीव

इन आठ समूहों में मुख्य रूप से दो प्रकार के जीव सामने आए। पहले प्रकार के जीव वे हैं जो बहुत तेजी से बढ़ते हैं और कई प्रकार के भोजन को खा सकते हैं। इन्हें सामान्यत: सब कुछ खाने वाले कहा जा सकता है। ये जीव आमतौर पर उन जगहों पर पाए जाते हैं जहां भोजन प्रचुर मात्रा में होता है, जैसे तटीय क्षेत्र।

दूसरे प्रकार के जीव धीमी गति से बढ़ते हैं और केवल विशेष प्रकार के भोजन पर निर्भर रहते हैं। इन्हें “विशेषज्ञ” कहा जाता है। ये जीव अधिकतर खुले समुद्र में पाए जाते हैं जहां पोषक तत्व कम होते हैं।

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समुद्र और जलवायु पर प्रभाव

यह खोज बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें समझने में मदद करती है कि समुद्र कैसे कार्बन को संग्रहित करता है और उसे वातावरण में वापस भेजता है।

आज के जलवायु मॉडल अक्सर इतने जटिल होते हैं कि उनमें सूक्ष्म जीवों की सही भूमिका शामिल करना मुश्किल होता है। लेकिन जब इन जीवों को केवल आठ बड़े समूहों में समझा जाए, तो जलवायु मॉडल को बेहतर बनाया जा सकता है। इससे भविष्य में यह अनुमान लगाना आसान हो सकता है कि जलवायु परिवर्तन के साथ समुद्र कितना कार्बन सोखेगा या छोड़ेगा।

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वैज्ञानिकों की राय

शोध पत्र में वैज्ञानिकों के हवाले से कहा गया है कि यदि हमें जलवायु को समझना है तो हमें सूक्ष्म जीवों को समझना होगा। उनका कहना है कि ये छोटे जीव समुद्र में कार्बन चक्र को चलाने वाले असली इंजन हैं। उनके अनुसार, हालांकि ये जीव बहुत विविध हैं, लेकिन उनके व्यवहार को कुछ निश्चित पैटर्न में समझा जा सकता है। यही इस शोध की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

सीमाएं और आगे का शोध

वैज्ञानिकों ने यह भी माना है कि यह मॉडल पूरी तरह से परिपूर्ण नहीं है। कुछ सूक्ष्म जीवों के बारे में अभी पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा कंप्यूटर मॉडल हमेशा वास्तविक दुनिया की पूरी जटिलता को नहीं दिखा सकते। आने वाले समय में अधिक प्रयोगशाला परीक्षण और बेहतर जीनोमिक डेटा से इस मॉडल को और सुधारने की उम्मीद है।

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यह शोध हमें यह समझने में मदद करता है कि समुद्र के अंदर छिपे हुए सूक्ष्म जीव पृथ्वी की जलवायु के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। भले ही ये जीव दिखाई नहीं देते, लेकिन वे पूरे ग्रह के कार्बन संतुलन को नियंत्रित करते हैं।

इस अध्ययन ने यह साबित किया है कि जब हम जटिल प्राकृतिक प्रणालियों को सरल समूहों में समझने की कोशिश करते हैं, तो हम पृथ्वी के काम करने के तरीके को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।

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