उबल रहे समुद्र, 2025 में महासागरीय गर्मी में 23 जेटाजूल की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

अध्ययन के मुताबिक, दुनिया के करीब 16 फीसदी महासागरीय क्षेत्र में 2025 में अब तक की सबसे अधिक गर्मी दर्ज हुई, जबकि 33 फीसदी क्षेत्र अपने स्थानीय रिकॉर्ड के तीन सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहे
फोटो: आईस्टॉक
फोटो: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • 2025 में महासागरों ने 23 जेटाजूल अतिरिक्त गर्मी सोखी, जो आधुनिक रिकॉर्ड में सबसे अधिक है। यह गर्मी हिरोशिमा जैसे बमों के करोड़ों विस्फोटों के बराबर है।

  • अध्ययन के अनुसार, महासागर पृथ्वी की जलवायु प्रणाली का केंद्र हैं और ग्रीनहाउस गैसों से फंसी गर्मी का 90 से अधिक हिस्सा समेटते हैं। यह जलवायु संकट की मौजूदा हकीकत को दर्शाता है।

  • अध्ययन के मुताबिक, दुनिया के करीब 16 फीसदी महासागरीय क्षेत्र में 2025 में अब तक की सबसे अधिक गर्मी दर्ज हुई, जबकि 33 फीसदी क्षेत्र अपने स्थानीय रिकॉर्ड के तीन सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहे।

  • इस दौरान सबसे ज्यादा गर्म क्षेत्रों में उष्णकटिबंधीय और दक्षिण अटलांटिक महासागर, उत्तरी प्रशांत, उत्तरी हिन्द महासागर, भूमध्य सागर और दक्षिणी महासागर के कुछ हिस्से शामिल रहे।

  • वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि 1990 के दशक के बाद से महासागरों के गर्म होने की रफ्तार और तेज हो गई है, और पिछले लगातार नौ वर्षों से समुद्र की ऊपरी 2000 मीटर परत हर साल नया रिकॉर्ड बना रही है।

पृथ्वी का सबसे बड़ा हीट-सिंक अब खुद तपने लगा है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन से पता चला है कि दुनिया के महासागरों ने 2025 में इतनी अधिक गर्मी सोख ली, जितनी आधुनिक रिकॉर्ड शुरू होने के बाद कभी नहीं देखी गई।

अध्ययन के मुताबिक, 2025 में महासागरों की ऊपरी दो किलोमीटर परत में गर्मी की मात्रा करीब 23 जेटाजूल (23,000,000,000,000,000,000,000 जूल्स) बढ़ गई।

यह मात्रा इतनी अधिक है कि मानो हिरोशिमा जैसे परमाणु बम करोड़ों बार फोड़े गए हों। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि यह 2023 में दुनिया भर में इस्तेमाल हुई कुल बिजली से करीब 200 गुणा अधिक है। गौरतलब है कि समुद्र की सतह का तापमान केवल ऊपरी तस्वीर को दिखाता है, लेकिन ओशियन हीट कंटेंट यह बताता है कि महासागर कितनी गहराई तक अतिरिक्त ऊर्जा को अपने भीतर समेट रहे हैं। वैज्ञानिक इसे लंबे समय में वैश्विक तापमान के बढ़ने का सबसे भरोसेमंद पैमाना मानते हैं।

जर्नल एडवांसेज इन एटमोस्फियरिक साइंसेज में प्रकाशित यह अध्ययन ऐसे समय में सामने आया है जब 2025 के अब तक के तीन सबसे गर्म वर्षों में शामिल किए जाने की पुष्टि हो चुकी है। इस बारे में प्रकाश डालते हुए अध्ययन से जुड़े शोधकर्ता और जलवायु वैज्ञानिक डॉक्टर केविन ट्रेंबर्थ का कहना है, "महासागर अब तक के सबसे ज्यादा गर्म हैं। हम धीरे-धीरे एक बिल्कुल अलग ग्रह बना रहे हैं, क्या हम सच में ऐसा चाहते हैं?”

यह भी पढ़ें
चार दशकों में महासागरों के गर्म होने की दर चार गुना से अधिक बढ़ी: रिपोर्ट
फोटो: आईस्टॉक

यह विश्लेषण चार अलग-अलग वैश्विक डेटा सेट्स पर आधारित है, जिनमें चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज, नेशनल सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल इंफॉर्मेशन (एनसीईआई), यूरोप का कॉपरनिकस मरीन प्रोग्राम और एक महासागरीय पुनःविश्लेषण मॉडल शामिल हैं।

इन सभी के आंकड़े एक ही बात कहते हैं, 2025 में महासागरों की गर्मी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। इस अध्ययन में दुनिया भर की 31 शोध संस्थाओं से जुड़े 50 से अधिक वैज्ञानिक शामिल थे।

देखा जाए तो महासागर पृथ्वी की जलवायु प्रणाली का केंद्र हैं, क्योंकि वे ग्रीनहाउस गैसों से फंसी कुल अतिरिक्त गर्मी का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा खुद में समेट लेते हैं।

हर जगह बराबर नहीं है गर्मी

हालांकि समुद्र का गरमाना हर जगह एक जैसा नहीं है। अध्ययन के मुताबिक, दुनिया के करीब 16 फीसदी महासागरीय क्षेत्र में 2025 में अब तक की सबसे अधिक गर्मी दर्ज हुई, जबकि 33 फीसदी क्षेत्र अपने स्थानीय रिकॉर्ड के तीन सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहे।

इस दौरान सबसे ज्यादा गर्म क्षेत्रों में उष्णकटिबंधीय और दक्षिण अटलांटिक महासागर, उत्तरी प्रशांत, उत्तरी हिन्द महासागर, भूमध्य सागर और दक्षिणी महासागर के कुछ हिस्से शामिल रहे। वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि 1990 के दशक के बाद से महासागरों के गर्म होने की रफ्तार और तेज हो गई है, और पिछले लगातार नौ वर्षों से समुद्र की ऊपरी 2000 मीटर परत हर साल नया रिकॉर्ड बना रही है।

यह भी पढ़ें
समुद्र में बढ़ते तापमान का नया पैटर्न आया सामने, इन हिस्सों में तेजी से गर्म हो रहे महासागर
फोटो: आईस्टॉक

ला नीना के बावजूद तपते रहे समुद्र

अध्ययन के मुताबिक 2025 में समुद्र की सतह का तापमान 2023 और 2024 की तुलना में थोड़ा कम जरूर रहा, जिसका एक कारण प्रशांत महासागर में अल नीनो से ला नीना की ओर बदलाव है।

इसके बावजूद, 2025 में समुद्र की सतह का वैश्विक औसत तापमान 1981 से 2010 के औसत से करीब 0.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा, जिससे यह रिकॉर्ड में तीसरा सबसे गर्म साल बन गया है।

मौसम से लेकर समुद्री जीवन तक असर

गर्म होते महासागर वातावरण में अधिक गर्मी और नमी छोड़ते हैं, जिससे तेज बारिश, एकाएक बाढ़ और अधिक ताकतवर चक्रवात जैसी चरम मौसमी घटनाएं बढ़ती हैं। अध्ययन 2025 में दक्षिण-पूर्व एशिया में व्यापक बाढ़, मध्य पूर्व में सूखा, और मेक्सिको व प्रशांत उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में बाढ़ जैसी घटनाओं की ओर इशारा करता है।

इसके साथ ही, समुद्र में बढ़ती गर्मी समुद्र के जल स्तर में वृद्धि, समुद्री हीटवेव, और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर दबाव का खतरा भी बढ़ा रही है।

यह भी पढ़ें
दक्षिण-पश्चिम प्रशांत महासागर में रिकॉर्ड गर्मी, लू की चपेट में 4 करोड़ वर्ग किमी
फोटो: आईस्टॉक

जब तक ऊर्जा असंतुलन रहेगा, बढ़ता रहेगा खतरा

शोधकर्ताओं का साफ कहना है कि जब तक पृथ्वी का ऊर्जा असंतुलन बना रहेगा, यानी जितनी ऊर्जा धरती छोड़ती है, उससे ज्यादा वह सोखती रहेगी,

महासागर गर्मी जमा करते रहेंगे, और इसका खामियाजा पूरी मानव सभ्यता को भुगतना होगा। यह अध्ययन एक बार फिर चेतावनी देता है कि जलवायु संकट अब भविष्य की बात नहीं, बल्कि मौजूदा समय की हकीकत बन चुका है और इसका सबसे बड़ा बोझ दुनिया के महासागर उठा रहे हैं।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in