157 अंकों के उछाल के साथ वापी बना देश का सबसे जहरीला शहर, शिलांग सबसे साफ

दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 291 दर्ज किया गया था, जो आज छह अंक बढ़कर 297 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है
फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट
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सारांश
  • वापी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 366 तक पहुंचने के साथ यह देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। पिछले दिन की तुलना में 157 अंकों की वृद्धि के कारण वापी की हवा 'बेहद खराब' श्रेणी में आ गई है।

  • वहीं, शिलांग में वायु गुणवत्ता सूचकांक मात्र 9 दर्ज किया गया है।

  • कल देश में टोंक की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 308 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 85 अंकों के सुधार के साथ वहां एक्यूआई घटकर 223 पर पहुंच गया।

  • राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 291 दर्ज किया गया था, जो आज छह अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 297 पर पहुंच गया।

  • 12 जनवरी 2026 को 236 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 5.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

  • वहीं 29.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 65.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

  • फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 261 रिकॉर्ड किया गया है।  

  • आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बद्दी (306) दूसरे जबकि दिल्ली (297) तीसरे स्थान पर है।

सारांश

विश्लेषण से पता चला है कि 12 जनवरी 2026 को देश में वापी की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 366 रिकॉर्ड किया गया। कल वापी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 209 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 157 अंकों का भारी उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।   

रुझानों में सामने आया है कि वापी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।  

वापी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 600 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 9 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में वापी की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 40 गुणा खराब है।

कल देश में टोंक की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 308 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 85 अंकों के सुधार के साथ वहां एक्यूआई घटकर 223 पर पहुंच गया। मतलब की आज वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 291 दर्ज किया गया था, जो आज छह अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 297 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है। हालांकि दिल्ली में वायु गुणवत्ता डब्ल्यूएचओ मानकों से 1,800 फीसदी अधिक खराब है।       

गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 12 जनवरी 2026 को 236 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 5.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 29.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 65.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में एक फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 7.9 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 25 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है। वहीं बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 100 फीसदी का इजाफा हुआ है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 261 रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बद्दी (306) दूसरे जबकि दिल्ली (297) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 297 अंकों के साथ गुरुग्राम चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद-बीकानेर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 287 और 285 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

नोएडा (274) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में धारूहेड़ा (272), फरीदाबाद (261) और ग्रेटर नोएडा (258) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन शहर (गुरुग्राम, धारूहेड़ा, फरीदाबाद) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बद्दी, दिल्ली, गुरुग्राम, गाजियाबाद, बीकानेर, नोएडा, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, ग्रेटर नोएडा, चित्तौड़गढ़, चरखी दादरी, मेरठ, कोटा, डूंगरपुर, हाजीपुर, मुजफ्फरनगर, प्रतापगढ़, भिवाड़ी, यमुना नगर, टोंक, बागपत, भीलवाड़ा, नारनौल, बल्लभगढ़, भोपाल, पाली, उज्जैन, पानीपत, मानेसर, बुलंदशहर, कुरुक्षेत्र, गुम्मिडीपूंडी, सहरसा, पीथमपुर, बूंदी, करनाल, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, भुवनेश्वर, बहादुरगढ़, मंडी गोबिंदगढ़, बेतिया, ग्वालियर, सिरोही, जींद, उदयपुर, कटक, पटना, वातवा, बालासोर, जबलपुर, कटनी, कोलकाता, गांधीनगर, लखनऊ, हावड़ा, आसनसोल, हापुड़, चंडीगढ़, पुणे, जैसलमेर, नलबाड़ी, अहमदाबाद, जयपुर, जालोर, झालावाड़, मंडीखेड़ा, मुजफ्फरपुर, नागपुर, हल्दिया, कटिहार, बर्नीहाट, सोनीपत, देवास, सूरत आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं वापी, तालचेर, झुंझुनू, चूरू, कल्याण, श्री गंगानगर, मंडीदीप, अंकलेश्वर, खुर्जा, कुंजेमुरा, भागलपुर, भिवंडी, रतलाम, धनबाद, हनुमानगढ़, फतेहाबाद, बारबिल, उल्हासनगर, बारां, अजमेर, सिलीगुड़ी, अमृतसर, धुले, बदलापुर, पटियाला, सागर, बांसवाड़ा, परभनी, ब्रजराजनगर, धौलपुर, मीरा-भायंदर, खन्ना, अलवर, जालंधर, मालेगांव, औरंगाबाद (बिहार), नागौर, आगरा, मुंबई, जलगांव, बेगूसराय, बोइसर, ठाणे, विरार, अहमदनगर, गोरखपुर, छपरा, लुधियाना, राजमहेंद्रवरम, पलवल, रायरंगपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 5.1 फीसदी यानी महज 12 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बेलगाम, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, डिंडीगुल, गंगटोक, मदिकेरी, मदुरै, मैसूर, रामनगर, शिलांग, विजयपुरा, वृंदावन आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 69 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें दौसा, धारवाड़, फिरोजाबाद, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कन्नूर, करौली, करूर, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मैहर, नांदेड़, नासिक, पंपोर, पंचगांव, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, पुडुकोट्टई, रायपुर, रूपनगर, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 123 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमृतसर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेतिया, भागलपुर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, छपरा, चूरू, कटक, देवास, धनबाद, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, जींद, जोधपुर, कैथल, कल्याण, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नवी मुंबई, पलवल, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रयागराज, पुणे, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, ठाणे, उदयपुर, उल्हासनगर, वाराणसी, वातवा, विरार शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 30 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बागपत, बल्लभगढ़, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, दिल्ली, धारूहेड़ा, डूंगरपुर, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हाजीपुर, झुंझुनू, कोटा, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पाली, पानीपत, प्रतापगढ़, तालचेर, टोंक, उज्जैन, यमुना नगर शामिल हैं।

वहीं वापी (366), बद्दी (306) में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 236 में से महज 12 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 69 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 11 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 70 दर्ज किया गया था।

123 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज वापी (366) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 370 के करीब पहुंच गया। आंकड़ों के मुताबिक कल से वहां प्रदूषण में 157 अंकों का भारी उछाल आया है। इसके साथ ही आज वापी में वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है।       

कल देश में टोंक की हवा सबसे प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 308 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 85 अंकों के सुधार के साथ टोंक में वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 223 पर पहुंच गया है।

गौरतलब है कि कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 291 दर्ज किया गया था। हालांकि आज छह अंकों के उछाल के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 297 पर पहुंच गया। मतलब कि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है। दिल्ली की तरह ही कल से फरीदाबाद में प्रदूषण के स्तर में इजाफा हुआ है। आज फरीदाबाद में सूचकांक 261 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 12 जनवरी को गुरुग्राम चौथे स्थान पर है, वहीं बद्दी (306) दूसरे, जबकि दिल्ली (297) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 184, गाजियाबाद में 287, गुवाहाटी में 131, गुरूग्राम में 297, नोएडा में 274, ग्रेटर नोएडा में 258 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 110 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 168, चेन्नई में 65, चंडीगढ़ में 158, हैदराबाद में 83, जयपुर में 147 और पटना में 174 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 12 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बेलगाम, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, डिंडीगुल, गंगटोक, मदिकेरी, मदुरै, मैसूर, रामनगर, शिलांग, विजयपुरा, वृंदावन शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, आरा, बागलकोट, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बेंगलुरु, भरतपुर, भिलाई, बिलासपुर, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दौसा, धारवाड़, फिरोजाबाद, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कन्नूर, करौली, करूर, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मैहर, नांदेड़, नासिक, पंपोर, पंचगांव, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, पुडुकोट्टई, रायपुर, रूपनगर, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तिरुपुर, तुमकुरु, तुमडीह, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, यादगीर आदि 69 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

डब्ल्यूएचओ सीमा से 18 गुणा ज्यादा जहर, राजस्थान के टोंक की हवा देश में सबसे खराब

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