ग्रेटर नोएडा में बढ़ते प्रदूषण से स्थिति बेहद खराब, दिल्ली में भी 250 के करीब पहुंचा एक्यूआई

28 फरवरी 2026 को देश में ग्रेटर नोएडा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 312 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है
बढ़ते प्रदूषण से बिगड़े हालात, बीमार, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सांस लेना हुआ दुश्वार; फोटो: आईस्टॉक
बढ़ते प्रदूषण से बिगड़े हालात, बीमार, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सांस लेना हुआ दुश्वार; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • 28 फरवरी 2026 को ग्रेटर नोएडा देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 312 तक पहुंच गया और हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई।

  • राजधानी दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़कर 248 हो गया।

  • केंद्रीय आंकड़ों के अनुसार देश के 237 शहरों में सिर्फ 3.8 फीसदी की हवा साफ है, जबकि 43.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

  • महीन प्रदूषण कण (पीएम10 और पीएम2.5) अधिकांश शहरों की फिजाओं में हावी हैं, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर और दीर्घकालिक खतरा मंडरा रहा है।

  • हालात यह हैं कि सुरक्षित मानकों से ग्रेटर नोएडा की हवा 590 फीसदी अधिक प्रदूषित है, और श्रीनगर जैसी साफ हवा वाले शहरों से तुलना करने पर अंतर 12 गुणा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह प्रदूषण बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

विश्लेषण के मुताबिक 28 फरवरी 2026 को देश में ग्रेटर नोएडा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 312 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 27 फरवरी को ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 235 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 77 अंकों का भारी उछाल आया है।  

रुझानों में सामने आया है कि ग्रेटर नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

ग्रेटर नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 590 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 25 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर ग्रेटर नोएडा की तुलना श्रीनगर से करें तो वहां स्थिति 12 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 200 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 248 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 48 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 450 फीसदी अधिक खराब है।         

दूसरी तरफ फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में कल जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 221 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 208 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है। 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 28 फरवरी 2026 को 237 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 43.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक बनी हुई है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 10 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 11.7 फीसदी का उछाल आया है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 12.6 फीसदी की कमी दर्ज की गई। वहीं खराब गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में करीब 18 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में कटक (294) दूसरे जबकि चरखी दादरी (289) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 277 अंकों के साथ मानेसर चौथे स्थान पर है। सिंगरौली-भिवाड़ी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 277 और 275 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

अंगुल (271) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (268), नोएडा (260) और गुरुग्राम (258) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (चरखी दादरी, मानेसर, भिवाड़ी, गुरुग्राम) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, मानेसर, धारूहेड़ा, गुम्मिडीपूंडी, नंदेसरी, यमुना नगर, अगरतला, मंडी गोबिंदगढ़, बागपत, पंचगांव, हापुड़, कुरुक्षेत्र, बर्नीहाट, वातवा, जींद, नागपुर, नाहरलागुन, तुमडीह, मुंगेर, पुदुचेरी, मंडीदीप, बेंगलुरु, देहरादून, करनाल, भोपाल, भिवानी, मुरादाबाद, क्योंझर, तिरुमाला, रूपनगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं ग्रेटर नोएडा, सिंगरौली, भिवाड़ी, गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम, दिल्ली, बल्लभगढ़, तालचेर, फरीदाबाद, बिलीपाड़ा, हाजीपुर, बुलंदशहर, दुर्गापुर, मेरठ, सवाई माधोपुर, लखनऊ, कटनी, बारबिल, बद्दी, झुंझुनू, मुजफ्फरनगर, ग्वालियर, सुआकाती, अलवर, मंगुराहा, सिरसा, कानपुर, चंद्रपुर, दमोह, चूरू, मिलुपारा, कैथल, पटना, भुवनेश्वर, हावड़ा, पटियाला, नागौर, खुर्जा, रामनगर, कोलकाता, सहरसा, ब्रजराजनगर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), गांधीनगर, जयपुर, पीथमपुर, गुवाहाटी, कुंजेमुरा, आगरा, बठिंडा, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम, बालासोर, बीकानेर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 3.8 फीसदी यानी महज 9 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, धुले, कोल्हापुर, मीरा-भायंदर, पंपोर, पंचकुला, राजगीर, सांगली, श्रीनगर आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 124 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, बिलासपुर, बोइसर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, चिक्कामगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, दौसा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्लम, कोरबा, कोटा, लातूर, लुधियाना, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 83 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बागपत, बालासोर, बारबिल, बठिंडा, बेंगलुरु, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चेन्नई, चूरू, दमोह, देहरादून, देवास, दुर्गापुर, गांधीनगर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हापुड़, हावड़ा, जयपुर, झुंझुनू, जींद, कैथल, कानपुर, करनाल, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडीदीप, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, पाली, पंचगांव, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, पीथमपुर, पुदुचेरी, राजकोट, रामनगर, रूपनगर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, श्री गंगानगर, सुआकाती, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तुमडीह, वातवा, विशाखापत्तनम शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 20 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अगरतला, अंगुल, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, ब्यासनगर, चरखी दादरी, कटक, दिल्ली, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, नंदेसरी, नोएडा, सिंगरौली, तालचेर, यमुना नगर शामिल हैं। वहीं ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 312 तक पहुंच गया है, यानी वायु गुणवत्ता बेहद खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 237 में से महज 9 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 124 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 27 फरवरी को यह आंकड़ा 111 दर्ज किया गया था।

83 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 312 पर पहुंच गया। इससे पहले कल ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 234 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 77 अंकों का इजाफा हुआ है।        

गौरतलब है कि कल देश में चरखी दादरी की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 288 दर्ज किया गया था। आज एक अंक बढ़कर वहां सूचकांक 289 पर पहुंच गया है। मतलब कि चरखी दादरी में वायु गुणवत्ता आज भी खराब है।

दिल्ली में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 200 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 248 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 48 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 450 फीसदी अधिक खराब है।         

दूसरी तरफ फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में कल जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 221 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 208 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।       

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 28 फरवरी को मानेसर चौथे स्थान पर है, वहीं कटक (294) दूसरे, जबकि चरखी दादरी (289) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 133, गाजियाबाद में 268, गुवाहाटी में 110, गुरूग्राम में 258, नोएडा में 260, ग्रेटर नोएडा में 312 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 58 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 146, चेन्नई में 108, चंडीगढ़ में 96, हैदराबाद में 79, जयपुर में 111 और पटना में 122 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 9 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें भिलाई, धुले, कोल्हापुर, मीरा-भायंदर, पंपोर, पंचकुला, राजगीर, सांगली, श्रीनगर शामिल हैं।

वहीं अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, बिलासपुर, बोइसर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, चिक्कामगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, दौसा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्लम, कोरबा, कोटा, लातूर, लुधियाना, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, शिलांग, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सूरत, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 124 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

288 अंकों के साथ प्रदूषण में पहले पायदान पर चरखी दादरी, फरीदाबाद में भी वायु गुणवत्ता 'खराब'

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