सिंगरौली बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, हवा डब्ल्यूएचओ मानकों से 21 गुणा ज्यादा जहरीली

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 310 दर्ज किया गया था, जो आज 21 अंकों के सुधार के साथ घटकर 289 पर पहुंच गया
सिंगरौली बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, हवा डब्ल्यूएचओ मानकों से 21 गुणा ज्यादा जहरीली
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सारांश
  • 07 जनवरी 2026 को देश में सिंगरौली की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 345 तक पहुंच गया। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

  • सिंगरौली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 21 गुणा अधिक है।

  • दूसरी तरफ देश में दमोह की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया।

  • राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 310 दर्ज किया गया था, जो आज 21 अंकों के सुधार के साथ घटकर 289 पर पहुंच गया।

  • 248 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 22.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 74.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

  • फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 217 रिकॉर्ड किया गया है।  

  • आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में धारूहेड़ा (328) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (298) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 294 अंकों के साथ गुरुग्राम चौथे स्थान पर है।

  • दिल्ली-मेरठ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 289 और 288 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

  • नोएडा (288) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में चरखी दादरी (286), तालचेर (286) और बागपत (276) भी शामिल हैं।

  • आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन (धारूहेड़ा, गुरुग्राम, चरखी दादरी) और उत्तर प्रदेश के चार (ग्रेटर नोएडा, नोएडा, मेरठ, बागपत) शहर शामिल हैं।

विश्लेषण से पता चला है कि 07 जनवरी 2026 को देश में सिंगरौली की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 345 रिकॉर्ड किया गया। कल सिंगरौली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 285 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 60 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

रुझानों में सामने आया है कि सिंगरौली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।  

सिंगरौली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में दमोह की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में सिंगरौली की तुलना दमोह से करें तो वहां स्थिति 19 गुणा खराब है।

कल देश में गुम्मिडीपूंडी की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 356 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 105 अंकों के सुधार के साथ वहां एक्यूआई घटकर 251 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 310 दर्ज किया गया था, जो आज 21 अंकों के सुधार के साथ घटकर 289 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता एक बार फिर 'बेहद खराब' से खराब श्रेणी में पहुंच गई है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता डब्ल्यूएचओ मानकों से 1,700 फीसदी अधिक प्रदूषित है।

गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 07 जनवरी 2026 को 248 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 22.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 74.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 33.3 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 11.1 अंकों की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 7.1 फीसदी का इजाफा हुआ है।

इसी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 10.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है। दूसरी तरफ बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 70 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 217 रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में धारूहेड़ा (328) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (298) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 294 अंकों के साथ गुरुग्राम चौथे स्थान पर है। दिल्ली-मेरठ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 289 और 288 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

नोएडा (288) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में चरखी दादरी (286), तालचेर (286) और बागपत (276) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन (धारूहेड़ा, गुरुग्राम, चरखी दादरी) और उत्तर प्रदेश के चार (ग्रेटर नोएडा, नोएडा, मेरठ, बागपत) शहर शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सिंगरौली, धारूहेड़ा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, दिल्ली, मेरठ, नोएडा, चरखी दादरी, तालचेर, बागपत, गाजियाबाद, नारनौल, कोलकाता, हावड़ा, जयपुर, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, सिलीगुड़ी, राजमहेंद्रवरम, भुवनेश्वर, भिवानी, मुजफ्फरनगर, भिवाड़ी, बेगूसराय, बालासोर, बैरकपुर, फरीदाबाद, बुलंदशहर, मानेसर, विशाखापत्तनम, आरा, आसनसोल, बल्लभगढ़, बीकानेर, पानीपत, जैसलमेर, हल्दिया, झालावाड़, तिरुमाला, बेलापुर, पुणे, करनाल, बहादुरगढ़, चित्तौड़गढ़, सुआकाती, पंचकुला, टोंक, पीथमपुर, लखनऊ, हापुड़, जींद, कोटा, पटना, सीकर, वातवा, कुरुक्षेत्र, देहरादून, उल्हासनगर, यमुना नगर, फतेहाबाद, तुमकुरु, पाली, आगरा, चुरू, चंडीगढ़, जोधपुर, मंगुराहा, समस्तीपुर, पूर्णिया, कोयंबटूर, दुर्गापुर, करौली, बर्नीहाट, कटिहार, प्रतापगढ़, नागौर, सोनीपत, बिहार शरीफ, बद्दी, जालोर, नाहरलागुन, अनंतपुर, गांधीनगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं धनबाद, सहरसा, अंकलेश्वर, खुर्जा, झुंझुनू, बिलीपाड़ा, कल्याण, किशनगंज, मंडी गोबिंदगढ़, भागलपुर, चंद्रपुर, विरार, भिवंडी, जलना, अलवर, महाड, रतलाम, सिवान, बदलापुर, छपरा, सांगली, जलगांव, उदयपुर, हनुमानगढ़, लुधियाना, अजमेर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, कैथल, नांदेड़, पटियाला, सागर, धारवाड़, सासाराम, श्री गंगानगर, रायरंगपुर, अकोला, मंडीखेड़ा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 2.4 फीसदी यानी महज आठ शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अगरतला, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दमोह, ऊटी, पंपोर, श्रीनगर, विजयपुरा आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 56 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें अमृतसर, बागलकोट, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बरेली, बठिंडा, बेलगाम, भिलाई, बिलासपुर, छाल, चित्तूर, डिंडीगुल, एलूर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुवाहाटी, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, झांसी, कलबुर्गी, कन्नूर, क्योंझर, खन्ना, कोहिमा, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मदुरै, मिलुपारा, मैसूर, नयागढ़, पलवल, पंचगांव, पेरुंदुरई, पुडुकोट्टई, रायपुर, ऋषिकेश आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 151 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बहादुरगढ़, बारीपदा, बाड़मेर, बेलापुर, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छपरा, चिक्कबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चुरू, कोयंबटूर, कुड्डालोर, कटक, दौसा, दावनगेरे, देहरादून, देवास, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, जबलपुर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, करूर, कटिहार, कटनी, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पंचकुला, पानीपत, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, टोंक, तुमकुरु, उदयपुर, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, विरार, यादगीर, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 31 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में आरा, आसनसोल, बागपत, बालासोर, बल्लभगढ़, बैरकपुर, बेगूसराय, भिवाड़ी, भिवानी, भुवनेश्वर, बुलंदशहर, चरखी दादरी, दिल्ली, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हावड़ा, जयपुर, कोलकाता, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, राजमहेंद्रवरम, सिलीगुड़ी, तालचेर, विशाखापत्तनम शामिल हैं।

वहीं दो शहरों सिंगरौली (345), धारूहेड़ा (328) में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 248 में से महज आठ शहरों में हवा 'बेहतर' है। 56 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 06 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 63 दर्ज किया गया था।

151 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज सिंगरौली (345) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 350 पर पहुंच गया। आंकड़ों के मुताबिक कल से वहां प्रदूषण में 60 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही आज सिंगरौली में वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब हो गई है।

कल देश में गुम्मिडीपूंडी की हवा सबसे प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 356 तक पहुंच गया था। आज 105 अंकों के सुधार के साथ गुम्मिडीपूंडी में वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 251 पर पहुंच गया है।

गौरतलब है कि कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 310 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 21 अंकों के सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर एक बार फिर 289 पर पहुंच गया। मतलब कि दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब हो गई है। दिल्ली की तरह ही कल से फरीदाबाद में प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है। आज फरीदाबाद में सूचकांक 217 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 07 जनवरी को गुरुग्राम चौथे स्थान पर है, वहीं धारूहेड़ा (328) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (298) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 246, गाजियाबाद में 276, गुवाहाटी में 71, गुरूग्राम में 294, नोएडा में 288, ग्रेटर नोएडा में 298 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 128 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 180, चेन्नई में 104, चंडीगढ़ में 160, हैदराबाद में 88, जयपुर में 257 और पटना में 177 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन आठ शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दमोह, ऊटी, पंपोर, श्रीनगर, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं आइजोल, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, बागलकोट, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बरेली, बठिंडा, बेलगाम, भिलाई, बिलासपुर, छाल, चित्तूर, डिंडीगुल, एलूर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुवाहाटी, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, झांसी, कलबुर्गी, कन्नूर, क्योंझर, खन्ना, कोहिमा, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मदुरै, मिलुपारा, मैसूर, नयागढ़, पलवल, पंचगांव, पेरुंदुरई, पुडुकोट्टई, रायपुर, ऋषिकेश, रूपनगर, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, थूथुकुडी, तिरुपति, तुमडीह, वृंदावन आदि 56 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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गुम्मिडीपूंडी की हवा सबसे जहरीली, दिल्ली-गाजियाबाद में भी वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब'

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