गुम्मिडीपूंडी की हवा सबसे जहरीली, दिल्ली-गाजियाबाद में भी वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब'

06 जनवरी को 245 में से महज छह शहरों में हवा साफ है। वहीं करीब 72 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं
फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • तमिलनाडु के गुम्मिडीपूंडी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 356 तक पहुंच गया, जो देश में सबसे अधिक प्रदूषित है।

  • दिल्ली और गाजियाबाद में भी स्थिति बेहद खराब है।

  • गुम्मिडीपूंडी में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2,200 फीसदी अधिक है।

  • दूसरी तरफ देश में दमोह की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 32 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में गुम्मिडीपूंडी की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 10 गुणा खराब है।

  • राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 244 दर्ज किया गया था, जो आज 66 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 310 पर पहुंच गया है।

  • 06 जनवरी 2026 को 245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

  • वहीं 25.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 71.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

  • फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 220 रिकॉर्ड किया गया है।  

  • आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (322) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (320) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 314 अंकों के साथ नारनौल चौथे स्थान पर है।

  • नोएडा-दिल्ली में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 314 और 310 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

  • गुरुग्राम (303) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भिवानी (300), चरखी दादरी (291) और सिंगरौली (285) भी शामिल हैं।

  • आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार (गुरुग्राम, नारनौल, भिवानी, चरखी दादरी) और उत्तर प्रदेश के तीन (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा) शहर शामिल हैं।

विश्लेषण से पता चला है कि 06 जनवरी 2026 को देश में तमिलनाडु के गुम्मिडीपूंडी की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 356 रिकॉर्ड किया गया। कल गुम्मिडीपूंडी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 144 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 212 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता माध्यम से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

रुझानों में सामने आया है कि गुम्मिडीपूंडी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।  

गुम्मिडीपूंडी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,200 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में दमोह की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 32 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में गुम्मिडीपूंडी की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 10 गुणा खराब है।

कल देश में देहरादून की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 272 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 40 अंकों के सुधार के साथ वहां एक्यूआई घटकर 232 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 244 दर्ज किया गया था, जो आज 66 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 310 पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता एक बार फिर खराब से 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंच गई है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता डब्ल्यूएचओ मानकों से 1,900 फीसदी अधिक प्रदूषित है।

गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 06 जनवरी 2026 को 245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 25.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 71.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 14.3 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 26 अंकों की कमी आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 8.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 33.3 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया, जोकि चिंता का विषय है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 220 रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (322) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (320) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 314 अंकों के साथ नारनौल चौथे स्थान पर है। नोएडा-दिल्ली में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 314 और 310 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

गुरुग्राम (303) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भिवानी (300), चरखी दादरी (291) और सिंगरौली (285) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार (गुरुग्राम, नारनौल, भिवानी, चरखी दादरी) और उत्तर प्रदेश के तीन (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा) शहर शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुम्मिडीपूंडी, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, नारनौल, नोएडा, दिल्ली, गुरुग्राम, भिवानी, चरखी दादरी, सिंगरौली, सीकर, बल्लभगढ़, बेतिया, मेरठ, धारूहेड़ा, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, भिवाड़ी, चूरू, देहरादून, जयपुर, तालचेर, अररिया, टोंक, फरीदाबाद, हापुड़, बद्दी, मोतिहारी, तिरुमाला, पुणे, हाजीपुर, कटिहार, राजमहेंद्रवरम, कटक, पूर्णिया, बेगूसराय, विशाखापत्तनम, सिवान, बालासोर, बहादुरगढ़, बीकानेर, मानेसर, पानीपत, जैसलमेर, ग्वालियर, आरा, कोलकाता, उल्हासनगर, मंडीदीप, बेलापुर, करनाल, जींद, नागौर, विरार, पटना, अमरावती (आंध्रप्रदेश), वापी, आसनसोल, प्रयागराज, वातवा, लखनऊ, पिंपरी-चिंचवाड़, राजसमंद, हावड़ा, पीथमपुर, मुजफ्फरपुर, बागपत, कोटा, पंचकुला, बोइसर, सोनीपत, तुमकुरु, बारीपदा, पाली, उदयपुर, कडप्पा, कुरुक्षेत्र, मंडी गोबिंदगढ़, चित्तौड़गढ़, आगरा, बर्नीहाट, हल्दिया, नवी मुंबई आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं सहरसा, कल्याण, खुर्जा, झुंझुनू, धनबाद, बिलीपाड़ा, चिक्काबल्लापुर, भागलपुर, फतेहाबाद, भिवंडी, रतलाम, अलवर, बदलापुर, हनुमानगढ़, मालेगांव, क्योंझर, लुधियाना, मीरा-भायंदर, जालोर, नांदेड़, छपरा, सागर, नयागढ़, सांगली, श्री गंगानगर, अजमेर, कैथल, मंगुराहा, अहमदनगर, रायरंगपुर, खन्ना, पुडुकोट्टई, अकोला, पटियाला, सूरत आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 2.4 फीसदी यानी महज छह शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अगरतला, चामराजनगर, दमोह, मदिकेरी, श्रीनगर, विजयपुरा आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 63 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बेलगाम, भिलाई, भीलवाड़ा, बिहार शरीफ, बिलासपुर, छाल, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, देवास, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलूर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुवाहाटी, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, झांसी, कलबुर्गी, कन्नूर, कोहिमा, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, मदुरै, मिलुपारा, मैसूर, नागपुर, ऊटी, पलवल, पंपोर, पंचगांव आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 141 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अनंतपुर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भिवंडी, भोपाल, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कुड्डालोर, कटक, दौसा, दावनगेरे, धनबाद, धौलपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, जबलपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कानपुर, करनाल, करूर, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पंचकुला, पानीपत, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुडुकोट्टई, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सिलीगुड़ी, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुपति, तुमकुरु, उदयपुर, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, यादगीर, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 28 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अंगुल, अररिया, बद्दी, बल्लभगढ़, बेतिया, भिवाड़ी, भिवानी, भुवनेश्वर, बुलंदशहर, चरखी दादरी, चूरू, देहरादून, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, हाजीपुर, हापुड़, जयपुर, कटिहार, मेरठ, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, पुणे, राजमहेंद्रवरम, सीकर, सिंगरौली, तालचेर, तिरुमाला, टोंक शामिल हैं।

वहीं सात शहरों दिल्ली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, नारनौल, नोएडा में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 245 में से महज छह शहरों में हवा 'बेहतर' है। 63 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 05 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 85 दर्ज किया गया था।

141 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज तमिलनाडु के गुम्मिडीपूंडी (356) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 360 पर पहुंच गया। आंकड़ों के मुताबिक कल से वहां प्रदूषण में 212 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही आज गुम्मिडीपूंडी में वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब हो गई है।

कल देश में देहरादून की हवा सबसे प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 272 तक पहुंच गया था। आज 40 अंकों के सुधार के साथ गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 232 पर पहुंच गया है।

गौरतलब है कि कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 244 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 66 अंकों के उछाल के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर एक बार फिर 310 पर पहुंच गया। मतलब कि दिल्ली में आज स्थिति खराब से बेहद खराब हो गई है। दिल्ली की तरह ही कल से फरीदाबाद में प्रदूषण के स्तर में इजाफा हुआ है। आज फरीदाबाद में सूचकांक 220 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि आज फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता मध्यम से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 06 जनवरी को नारनौल चौथे स्थान पर है, वहीं गाजियाबाद (322) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (320) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 182, गाजियाबाद में 322, गुवाहाटी में 56, गुरूग्राम में 303, नोएडा में 314, ग्रेटर नोएडा में 320 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 124 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 158, चेन्नई में 110, चंडीगढ़ में 128, हैदराबाद में 94, जयपुर में 226 और पटना में 165 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन छह शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, चामराजनगर, दमोह, मदिकेरी, श्रीनगर, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं आइजोल, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, बागलकोट, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बेलगाम, भिलाई, भीलवाड़ा, बिहार शरीफ, बिलासपुर, छाल, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, देवास, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलूर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुवाहाटी, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, झांसी, कलबुर्गी, कन्नूर, कोहिमा, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, मदुरै, मिलुपारा, मैसूर, नागपुर, ऊटी, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पेरुंदुरई, रायपुर, राजगीर, रूपनगर, सासाराम, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, थूथुकुडी, त्रिशूर, तुमडीह, वृंदावन आदि 63 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

प्रदूषण में पहले पायदान पर देहरादून, नोएडा-गाजियाबाद में भी स्थिति 'खराब'

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