प्रदूषण में पहले पायदान पर देहरादून, नोएडा-गाजियाबाद में भी स्थिति 'खराब'

देहरादून से स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,600 फीसदी अधिक है
भारत की शत-प्रतिशत आबादी प्रदूषण की गिरफ्त में है जो उन्हें शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप से भी कमजोर बना रहा है; फोटो: आईस्टॉक
भारत की शत-प्रतिशत आबादी प्रदूषण की गिरफ्त में है जो उन्हें शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप से भी कमजोर बना रहा है; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • देहरादून में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 272 तक पहुंच गया है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,600 फीसदी अधिक है।

  • गाजियाबाद और नोएडा भी प्रदूषण के मामले में शीर्ष स्थानों पर हैं।

  • देश के 243 शहरों में से केवल 2.9 फीसदी में हवा साफ है, जबकि 62.1 फीसदी शहरों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

  • दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर देहरादून की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 17 गुणा खराब है।

  • राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 307 दर्ज किया गया था, जो आज 63 अंकों के सुधार के साथ घटकर 244 पर पहुंच गया है।

विश्लेषण से पता चला है कि 05 जनवरी 2026 को देश में देहरादून की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 272 रिकॉर्ड किया गया। कल देहरादून में वायु गुणवत्ता सूचकांक 271 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में एक अंक का इजाफा हुआ है।

हालांकि वहां अभी भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है। रुझानों में सामने आया है कि देहरादून की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।  

देहरादून से स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,600 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर देहरादून की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 17 गुणा खराब है।

कल देश में गुरुग्राम की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 333 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 93 अंकों के सुधार के साथ वहां एक्यूआई घटकर 240 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 307 दर्ज किया गया था, जो आज 63 अंकों के सुधार के साथ घटकर 244 पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' से 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है। गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 05 जनवरी 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 35 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 62.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 16.7 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 12 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब छह फीसदी का इजाफा हुआ है।

दूसरी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 36.4 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 185 रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (262) दूसरे जबकि नोएडा (260) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 257 अंकों के साथ तालचेर चौथे स्थान पर है। भुवनेश्वर-कटक में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 256 और 251 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

सीकर (246) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली (244), नारनौल (243) और धारूहेड़ा (242) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा (नारनौल, धारूहेड़ा) और ओडिशा (तालचेर, भुवनेश्वर, कटक) के तीन शहर शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि देहरादून, गाजियाबाद, नोएडा, तालचेर, भुवनेश्वर, कटक, सीकर, दिल्ली, नारनौल, धारूहेड़ा, अंगुल, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा, बारबिल, ब्यासनगर, ग्वालियर, सिंगरौली, सुआकाती, भिवानी, चूरू, टोंक, जयपुर, कोलकाता, चरखी दादरी, कोल्लम, राउरकेला, बहादुरगढ़, बैरकपुर, फरीदाबाद, राजमहेंद्रवरम, हाजीपुर, बल्लभगढ़, धुले, पुणे, हावड़ा, हल्दिया, तुमकुरु, बूंदी, नागांव, बद्दी, बुलंदशहर, कडप्पा, नाहरलागुन, मुजफ्फरनगर, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, झालावाड़, नागौर, धौलपुर, कोटा, बालासोर, मीरा-भायंदर, सोनीपत, उदयपुर, आरा, विरार, नागपुर, महाड, पीथमपुर, मुजफ्फरपुर, वापी, काशीपुर, ऋषिकेश, तिरुमाला आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं लखनऊ, भिवाड़ी, आगरा, मेरठ, बीकानेर, बेगूसराय, कल्याण, टेन्सा, खुर्जा, कानपुर, गुम्मिडीपूंडी, बिलीपाड़ा, झुंझुनू, जैसलमेर, मालेगांव, भिवंडी, अमरावती (आंध्रप्रदेश), बदलापुर, बेलापुर, चंद्रपुर, जोधपुर, बाड़मेर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), श्री गंगानगर, चिक्काबल्लापुर, रायरंगपुर, धनबाद, कुरुक्षेत्र, फतेहाबाद, नांदेड़, नयागढ़, तिरुवनंतपुरम, अलवर, क्योंझर, नासिक, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, उल्हासनगर, अजमेर, सिवान, किशनगंज, नवी मुंबई, रतलाम, अहमदाबाद, सूरत, ठाणे, अकोला, औरंगाबाद (बिहार), हनुमानगढ़, सिरसा, बेंगलुरु, छपरा, जलगांव, जलना, वाराणसी, आसनसोल, सांगली, लुधियाना, अमृतसर, मंडीखेड़ा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 2.9 फीसदी यानी महज सात शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अगरतला, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दमोह, शिलांग, श्रीनगर, विजयपुरा आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 85 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुवाहाटी, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, झांसी, जींद, कैथल, कलबुर्गी, करूर, कटिहार, कटनी, खन्ना, कोहिमा, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मदुरै, मंडी गोबिंदगढ़, मंगुराहा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूर, ऊटी, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़ आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 130 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, धनबाद, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गुम्मिडीपूंडी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, काशीपुर, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पंचकुला, परभनी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रयागराज, पुणे, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, सिरसा, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, टोंक, तुमकुरु, उदयपुर, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, विरार, यादगीर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 21 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अंगुल, बारबिल, भिवाड़ी, भिवानी, भुवनेश्वर, ब्यासनगर, कटक, देहरादून, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग्वालियर, लखनऊ, नारनौल, नोएडा, सीकर, सिंगरौली, सुआकाती, तालचेर शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 243 में से महज सात शहरों में हवा 'बेहतर' है। 85 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 04 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 76 दर्ज किया गया था।

130 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज देहरादून (272) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 280 के करीब पहुंच गया। हालांकि आज भी देहरादून में वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक कल से वहां प्रदूषण में एक अंक का मामूली इजाफा हुआ है।

कल देश में गुरुग्राम की हवा सबसे प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 333 तक पहुंच गया था। आज 93 अंकों के सुधार के साथ गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 240 पर पहुंच गया है।

गौरतलब है कि कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 307 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 63 अंकों के सुधार के साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 244 पर पहुंच गया। मतलब कि आज दिल्ली में स्थिति बेहद खराब से 'खराब' हो गई है।

दिल्ली की तरह ही कल से फरीदाबाद में प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है। आज फरीदाबाद में सूचकांक 185 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि आज फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 05 जनवरी को तालचेर चौथे स्थान पर है, वहीं गाजियाबाद (262) दूसरे, जबकि नोएडा (260) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 220, गाजियाबाद में 262, गुवाहाटी में 54, गुरूग्राम में 240, नोएडा में 260, ग्रेटर नोएडा में 236 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 121 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 220, चेन्नई में 96, चंडीगढ़ में 101, हैदराबाद में 95, जयपुर में 192 और पटना में 120 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन सात शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दमोह, शिलांग, श्रीनगर, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अहमदनगर, आइजोल, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अररिया, बागलकोट, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बठिंडा, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, चेन्नई, छाल, कोयंबटूर, कुड्डालोर, देवास, धारवाड़, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुवाहाटी, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, झांसी, जींद, कैथल, कलबुर्गी, करूर, कटिहार, कटनी, खन्ना, कोहिमा, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मदुरै, मंडी गोबिंदगढ़, मंगुराहा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूर, ऊटी, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, राजगीर, रोहतक, रूपनगर, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, तुमडीह, वृंदावन, यमुना नगर आदि 85 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

दम घोंटती हवा: गुरुग्राम सबसे प्रदूषित, दिल्ली में 40 अंक बढ़कर वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब'

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