दम घोंटती हवा: गुरुग्राम सबसे प्रदूषित, दिल्ली में 40 अंक बढ़कर वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब'

देश में गुरुग्राम की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 333 रिकॉर्ड किया गया।
फोटो: विकास चौधरी, सीएसई
फोटो: विकास चौधरी, सीएसई
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सारांश
  • गुरुग्राम में 4 जनवरी 2026 को वायु गुणवत्ता सूचकांक 333 तक पहुंच गया, जो इसे देश का सबसे प्रदूषित शहर बनाता है। दिल्ली में भी स्थिति खराब है, जहां एक्यूआई 307 दर्ज किया गया।

  • गुरुग्राम में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2000 फीसदी अधिक है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

  • दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 11 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गुरुग्राम की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 29 गुणा खराब है।

  • 04 जनवरी 2026 को 244 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

  • वहीं 31.1 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 66.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

  • फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 215 रिकॉर्ड किया गया है।  

  • आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में धारूहेड़ा (322) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (316) तीसरे स्थान पर है।

  • इसी तरह 307 अंकों के साथ दिल्ली-नोएडा चौथे स्थान पर है। बालासोर-गाजियाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 306 और 298 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

  • नारनौल (296) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में कटक (277), भिवाड़ी (274) और देहरादून (271) भी शामिल हैं।

  • आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा (गुरुग्राम, धारूहेड़ा, नारनौल) और उत्तर प्रदेश (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद) के तीन-तीन शहर शामिल हैं।

विश्लेषण से पता चला है कि 04 जनवरी 2026 को देश में गुरुग्राम की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 333 रिकॉर्ड किया गया। कल गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता सूचकांक 244 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 89 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब हो गई है। रुझानों में सामने आया है कि गुरुग्राम की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

गुरुग्राम से स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,000 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 11 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गुरुग्राम की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 29 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 267 दर्ज किया गया था, जो आज 40 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 307 पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता 'खराब' से 'बेहद खराब' हो गई है। गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 04 जनवरी 2026 को 244 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 31.1 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 66.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में सात अंकों की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब एक फीसदी की गिरावट आई है।

खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों से जुड़े आंकड़ों को देखें तो उनकी गिनती में भी कल से 18 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह बेहद खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 50 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 215 रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में धारूहेड़ा (322) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (316) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 307 अंकों के साथ दिल्ली-नोएडा चौथे स्थान पर है। बालासोर-गाजियाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 306 और 298 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

नारनौल (296) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में कटक (277), भिवाड़ी (274) और देहरादून (271) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा (गुरुग्राम, धारूहेड़ा, नारनौल) और उत्तर प्रदेश (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद) के तीन-तीन शहर शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुरुग्राम, धारूहेड़ा, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली, नोएडा, बालासोर, नारनौल, कटक, भिवाड़ी, देहरादून, बद्दी, ब्यासनगर, सुआकाती, तालचेर, मुजफ्फरनगर, मंडीदीप, बल्लभगढ़, बैरकपुर, भुवनेश्वर, हावड़ा, खुर्जा, बुलंदशहर, अंगुल, हापुड़, चरखी दादरी, कोलकाता, ग्वालियर, विशाखापत्तनम, मानेसर, सीकर, पीथमपुर, राजमहेंद्रवरम, जलना, बागपत, फरीदाबाद, पानीपत, सिंगरौली, चुरू, भोपाल, हल्दिया, नागौर, नागपुर, सोनीपत, पुणे, करनाल, बारबिल, बहादुरगढ़, वातवा, राउरकेला, अनंतपुर, कोल्लम, जालोर, जयपुर, चित्तौड़गढ़, टोंक, कडप्पा, बर्नीहाट, कुरुक्षेत्र, जोधपुर, मीरा-भायंदर, पाली, धुले, उल्हासनगर, चंडीगढ़, बूंदी, आसनसोल, नवी मुंबई, पंचकुला, सिलीगुड़ी, काशीपुर, नागांव, पूर्णिया, मुंबई, झालावाड़, भीलवाड़ा, बोइसर, तुमकुरु, यादगीर, कटिहार, महाड, कोटा, विरार, डूंगरपुर, धौलपुर, विजयवाड़ा, क्योंझर, राजसमंद, चित्तूर, परभनी, मंडीखेड़ा, भिवानी, नाहरलागुन, तिरुमाला, अंबाला, अहमदनगर, भरतपुर, बेतिया, इंदौर, जैसलमेर, हाजीपुर, कटनी, लातूर, बाड़मेर, दौसा, करौली आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं गाजियाबाद, मेरठ, लखनऊ, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बीकानेर, कानपुर, कल्याण, आगरा, पिंपरी-चिंचवाड़, बदलापुर, बिलीपाड़ा, धनबाद, बेगूसराय, श्री गंगानगर, भिवंडी, चंद्रपुर, गुम्मिडीपूंडी, झुंझुनू, नयागढ़, हनुमानगढ़, टेन्सा, अजमेर, बेलापुर, मंगुराहा, नांदेड़, दुर्गापुर, सोलापुर, फतेहाबाद, ठाणे, अहमदाबाद, रायरंगपुर, नासिक, सहरसा, सूरत, जलगांव, सांगली, अमरावती (आंध्रप्रदेश), मालेगांव, सिरसा, उदयपुर, अमृतसर, रतलाम, गांधीनगर, अंकलेश्वर, बेंगलुरु, अमरावती (महाराष्ट्र), धारवाड़, लुधियाना, ऊटी, यमुना नगर, सागर, भागलपुर, तुमडीह आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 2.5 फीसदी यानी महज छह शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दमोह, गुवाहाटी, शिलांग, विजयपुरा आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 76 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें जबलपुर, जालंधर, झांसी, जींद, कैथल, कलबुर्गी, करूर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मैहर, मंडी गोबिंदगढ़, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 123 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बहादुरगढ़, बारबिल, बाड़मेर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बूंदी, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चुरू, दौसा, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गुम्मिडीपूंडी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, काशीपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, कोल्लम, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, ऊटी, पाली, पंचकुला, परभनी, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, सागर, सहरसा, सांगली, सिलीगुड़ी, सिरसा, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, टेन्सा, ठाणे, तिरुमाला, टोंक, तुमकुरु, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वापी, वातवा, विजयवाड़ा, विरार, यादगीर, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 33 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अंगुल, बद्दी, बागपत, बल्लभगढ़, बैरकपुर, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चरखी दादरी, कटक, देहरादून, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्वालियर, हापुड़, हावड़ा, जलना, खुर्जा, कोलकाता, मंडीदीप, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, पानीपत, पीथमपुर, राजमहेंद्रवरम, सीकर, सिंगरौली, सुआकाती, तालचेर, विशाखापत्तनम शामिल हैं।

इसी तरह आज देश के छह शहरों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब है। इन शहरों में बालासोर, दिल्ली, धारूहेड़ा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, नोएडा शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 244 में से महज छह शहरों में हवा 'बेहतर' है। 76 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 03 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 71 दर्ज किया गया था।

123 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज गुरुग्राम (333) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 340 के करीब पहुंच गया। इसके साथ ही गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता आज खराब से ‘बेहद खराब’ हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक कल से प्रदूषण में 89 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

कल देश में तालचेर की हवा सबसे प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 332 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 77 अंकों के सुधार के साथ तालचेर में वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 255 पर पहुंच गया है।

गौरतलब है कि कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 267 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 40 अंकों के उछाल के साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 307 पर पहुंच गया। मतलब कि आज दिल्ली में स्थिति 'खराब' से बेहद खराब हो गई है। दिल्ली के उलट कल से फरीदाबाद के प्रदूषण में गिरावट आई है। आज फरीदाबाद में एक्यूआई 215 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि आज भी फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ बनी हुई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 04 जनवरी को दिल्ली-नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं धारूहेड़ा (322) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (316) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 230, गाजियाबाद में 298, गुवाहाटी में 50, गुरूग्राम में 333, नोएडा में 307, ग्रेटर नोएडा में 316 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 140 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 180, चेन्नई में 94, चंडीगढ़ में 154, हैदराबाद में 103, जयपुर में 174 और पटना में 89 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन छह शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दमोह, गुवाहाटी, शिलांग, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आइजोल, अकोला, अररिया, आरा, बागलकोट, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बठिंडा, बेलगाम, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बक्सर, चेन्नई, छाल, कोयंबटूर, कुड्डालोर, देवास, एलूर, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, हिसार, हुबली, जबलपुर, जालंधर, झांसी, जींद, कैथल, कलबुर्गी, करूर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मैहर, मंडी गोबिंदगढ़, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, रूपनगर, सासाराम, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुपति, वाराणसी, वृंदावन आदि 76 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

प्रदूषण का अलार्म: दिल्ली ‘खराब’ तो तालचेर ‘बेहद खराब’, डब्ल्यूएचओ मानकों से 20 गुणा ज्यादा प्रदूषण

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