

यह रिपोर्ट केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि राजधानी और देश की हवा में आई एक बड़ी राहत का संकेत है। 30 मई 2026 को दिल्ली ने साल का सबसे साफ दिन दर्ज किया, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) घटकर 85 पर पहुंच गया। पिछले 24 घंटों में 38 अंकों के सुधार के साथ दिल्ली की हवा फिर से ‘संतोषजनक’ श्रेणी में लौट आई।
यह इस वर्ष पहली बार है जब राजधानी का एक्यूआई 86 से भी नीचे पहुंचा है। वहीं देशभर में भी हालात बेहतर होते दिखे, जहां 234 में से करीब 74 फीसदी शहरों में हवा ‘बेहतर’ या ‘संतोषजनक’ दर्ज की गई।
हालांकि इस राहत के बीच चिंता की तस्वीर भी मौजूद है। हरियाणा का भिवानी लगातार देश का सबसे प्रदूषित शहर बना हुआ है, जहां एक्यूआई 260 दर्ज किया गया और पीएम2.5 के खतरनाक स्तर लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर रहे हैं।
राजस्थान के सात शहर देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। दूसरी ओर, कोयंबटूर ने सबसे साफ शहर का दर्जा हासिल किया। आंकड़े बताते हैं कि देश में हवा की गुणवत्ता में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन कई क्षेत्रों में प्रदूषण अब भी एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 30 मई 2026 को एक बार फिर देश में भिवानी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 260 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल भिवानी में सूचकांक 262 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में दो अंकों का सुधार आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि भिवानी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
भिवानी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,600 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में कोयंबटूर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 24 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर भिवानी की तुलना कोयंबटूर से करें तो वहां स्थिति 10 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 123 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 85 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 38 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आज दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर संतोषजनक हो गई है।
बता दें कि इससे पहले 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 152 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 109 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 30 मई 2026 को 234 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 21.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52.1 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 26.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 30.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 8.9 फीसदी का उछाल आया है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 20.6 फीसदी की गिरावट आई है। कुछ ऐसी ही स्थिति खराब हवा वाले शहरों की भी है, जिनकी गिनती में कल से 12.5 फीसदी का कमी दर्ज हुई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बाड़मेर (245) दूसरे जबकि सवाई माधोपुर (232) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह सिरोही (220) चौथे स्थान पर है। उदयपुर (219)- जैसलमेर (211) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बीकानेर (207) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बद्दी (200), बारां (191) और जोरापोखर (190) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के सात शहर (बाड़मेर, सवाई माधोपुर, सिरोही, उदयपुर, जैसलमेर, बीकानेर, बारां) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि भिवानी, बद्दी, बर्नीहाट (असम), खन्ना, नेल्लोर, गुम्मिडीपूंडी, फरीदाबाद, धारूहेड़ा, गाजियाबाद आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बाड़मेर, सिरोही, उदयपुर, जैसलमेर, बीकानेर, जोरापोखर, पाली, मेरठ, सोनीपत, जालोर, बूंदी, नोएडा, कोटा, श्री गंगानगर, मंडीदीप, पानीपत, वातवा, मुजफ्फरनगर, बठिंडा, सिरसा, अमृतसर, फतेहाबाद, डूंगरपुर, कुरुक्षेत्र, सीकर, जयपुर, जोधपुर, गांधीनगर, सिंगरौली, कैथल, देवास, अलवर, प्रतापगढ़, रायपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 21.8 फीसदी यानी 51 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हल्दिया, हापुड़, जालना, झांसी, कलबुर्गी, कानपुर, काशीपुर, क्योंझर, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मानेसर, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, नंदेसरी, नयागढ़, पंपोर, पेरुंदुरई, पुणे, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, सांगली, शिवमोगा आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 122 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बक्सर, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, कुड्डालोर, दिल्ली, धारवाड़, धुले, एलुरु, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, जींद, कन्नूर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, किशनगंज, कोलकाता, कोप्पल, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पंचगांव, पंचकुला, परभणी आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 54 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अलवर, अमृतसर, अंगुल, बद्दी, बारां, बठिंडा, बेगूसराय, भरतपुर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चित्तौड़गढ़, चूरू, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, डूंगरपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, जबलपुर, जयपुर, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, खन्ना, कोटा, कुरुक्षेत्र, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मैसूरु, नेल्लोर, नोएडा, पाली, पलवल, पानीपत, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, रायबरेली, रायपुर, सीकर, सिंगरौली, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, टोंक, वातवा आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बाड़मेर, भिवानी, बीकानेर, जैसलमेर, सवाई माधोपुर, सिरोही, उदयपुर में स्थिति ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 234 में से 51 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 122 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 29 मई को यह आंकड़ा 112 दर्ज किया गया था।
54 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर भिवानी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 260 दर्ज किया गया। इससे पहले कल भिवानी में सूचकांक 262 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में दो अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही आज भी भिवानी में वायु गुणवत्ता 'खराब' बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 123 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 85 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 38 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आज दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर संतोषजनक हो गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 152 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 109 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 30 मई को सिरोही (220) चौथे स्थान पर है, वहीं बाड़मेर (245) दूसरे, जबकि सवाई माधोपुर (232) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 73, गाजियाबाद में 104, गुवाहाटी में 75, गुरूग्राम में 86, नोएडा में 143, ग्रेटर नोएडा में 105 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 56 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 66, चेन्नई में 64, चंडीगढ़ में 133, हैदराबाद में 74, जयपुर में 108 और पटना में 75 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 51 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, अंबरनाथ, बागलकोट, बरेली, बारीपाड़ा, बेतिया, बोइसर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हल्दिया, हापुड़, जालना, झांसी, कलबुर्गी, कानपुर, काशीपुर, क्योंझर, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मानेसर, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, नंदेसरी, नयागढ़, पंपोर, पेरुंदुरई, पुणे, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, सांगली, शिवमोगा, शिवसागर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बल्लभगढ़, बारबिल, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बक्सर, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, कुड्डालोर, दिल्ली, धारवाड़, धुले, एलुरु, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, जींद, कन्नूर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, किशनगंज, कोलकाता, कोप्पल, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रयागराज, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, सतना, सिलचर, सिलीगुड़ी, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, ठाणे, त्रिशूर, तिरुपति, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि 122 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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