

हवा में घुला जहर भले ही कई शहरों में कुछ कम हुआ हो, लेकिन देश के प्रदूषण संकट की तस्वीर अब भी चिंताजनक बनी हुई है।
23 जून 2026 को सोनीपत लगातार एक बार फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,680 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।
हालांकि दिल्ली और फरीदाबाद में 24 घंटों के भीतर वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला और दिल्ली की हवा 'खराब' से निकलकर फिर 'मध्यम' श्रेणी में पहुंच गई, लेकिन हरियाणा के छह शहर अब भी देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं।
दूसरी ओर, कर्नाटक का मदिकेरी देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा, जहां हवा की गुणवत्ता सोनीपत की तुलना में 20 गुना से अधिक बेहतर रही। सरकारी आंकड़े राहत की भी तस्वीर दिखाते हैं। देश के करीब 78 फीसदी शहरों में हवा 'बेहतर' या 'संतोषजनक' श्रेणी में रही और खराब हवा वाले शहरों की संख्या में एक दिन में करीब 74 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
फिर भी पीएम2.5 और पीएम10 जैसे खतरनाक प्रदूषकों का कई शहरों पर दबदबा यह साफ संकेत देता है कि प्रदूषण का संकट अभी टला नहीं है और स्वच्छ हवा के लिए ठोस कदम उठाने बेहद जरूरी हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 23 जून 2026 को एक बार फिर देश में सोनीपत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 269 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल सोनीपत में एक्यूआई 297 दर्ज किया गया था। इसका मतलब है कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 28 अंकों का सुधार आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि सोनीपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
सोनीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,680 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सोनीपत की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 20.6 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 228 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 142 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 86 अंकों का भारी सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में एक बार फिर वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 130 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 119 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 11 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 23 जून 2026 को 249 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 25.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 53 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 21.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 14.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 1.5 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 53.1 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की संख्या में कल से करीब 73.7 फीसदी का गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बल्लभगढ़ (243) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (238) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बहादुरगढ़ चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम (213) – गाजियाबाद (187) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
मेरठ (172) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भिवानी (171), नोएडा (170) और हिसार (156) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के छह शहर (सोनीपत, बल्लभगढ़, बहादुरगढ़, गुरुग्राम, भिवानी, हिसार) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सोनीपत, बहादुरगढ़, भिवानी, हिसार, चरखी दादरी, मानेसर, नारनौल, धारूहेड़ा, तालचेर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा, बागपत, बीकानेर, विशाखापत्तनम, भिवाड़ी, बुलंदशहर, दिल्ली, चूरू, मथुरा, पाली, सीकर, दौसा, जयपुर, पानीपत, छपरा, सिंगरौली, हापुड़, करौली, सवाई माधोपुर, फरीदाबाद, आगरा, झुंझुनू, वातवा, लखनऊ, श्री गंगानगर, धनबाद, बद्दी, टोंक, अगरतला, बाड़मेर, भीलवाड़ा, खुर्जा, ग्वालियर, उदयपुर, करनाल, खन्ना आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 25.3 फीसदी यानी 63 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भोपाल, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चंद्रपुर, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, दमोह, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हुबली, जलगांव, जलना, झांसी, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, लातूर, मदिकेरी, महाड, मंडीदीप, मंगलौर, मंगुराहा, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजगीर, रामनगर, शिवमोगा, सोलापुर, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, उज्जैन आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 132 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें दुर्गापुर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, कटनी, किशनगंज, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, नागौर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 49 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, आगरा, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बागपत, बाड़मेर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बुलंदशहर, चरखी दादरी, छपरा, चूरू, दौसा, दिल्ली, धनबाद, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्वालियर, हापुड़, हिसार, जयपुर, झुंझुनू, करौली, करनाल, खन्ना, खुर्जा, लखनऊ, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पाली, पानीपत, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, श्री गंगानगर, तालचेर, टोंक, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
इसी तरह बहादुरगढ़ (235), बल्लभगढ़ (243), ग्रेटर नोएडा (238), गुरुग्राम (213) और सोनीपत (269) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 249 में से 63 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 132 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 22 जून को यह आंकड़ा 130 दर्ज किया गया था।
49 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर सोनीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 269 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। इससे पहले कल सोनीपत में एक्यूआई 297 दर्ज किया गया था। मतलब की कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 28 अंकों की गिरावट आई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 228 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 142 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 86 अंकों का भारी सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में एक बार फिर वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 130 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 119 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 11 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 23 जून को बहादुरगढ़ (235) चौथे स्थान पर है, वहीं बल्लभगढ़ (243) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (238) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 103, गाजियाबाद में 187, गुवाहाटी में 53, गुरूग्राम में 213, नोएडा में 170, ग्रेटर नोएडा में 238 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 45 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 116, चेन्नई में 56, चंडीगढ़ में 54, हैदराबाद में 53, जयपुर में 129 और पटना में 91 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 63 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बेलापुर, भिलाई, भोपाल, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चंद्रपुर, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, दमोह, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हुबली, जलगांव, जलना, झांसी, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, लातूर, मदिकेरी, महाड, मंडीदीप, मंगलौर, मंगुराहा, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजगीर, रामनगर, शिवमोगा, सोलापुर, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, उज्जैन, उल्हासनगर, विजयपुरा, यादगीर शामिल हैं।
वहीं अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, कटनी, किशनगंज, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, नागौर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सतना, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमकुरु, तुमडीह, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यमुना नगर आदि 132 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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