ओड़िशा में प्रदूषण से बिगड़े हालात, अंगुल-कटक में 300 के पार एक्यूआई

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 24 रिकॉर्ड किया गया
फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई)
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सारांश
  • ओड़िशा के अंगुल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 311 पर पहुंच गया है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।

  • कटक और बल्लभगढ़ में भी स्थिति चिंताजनक है।

  • रुझानों में सामने आया है कि अंगुल की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। 

  • दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 24 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में अंगुल की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 12 गुणा खराब है।

  • राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज ‘बेहद खराब’ से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

  • कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 322 दर्ज किया गया था, जो आज 23 जनवरी को 40 अंकों के सुधार के साथ घटकर 282 पर पहुंच गया है।

  • 23 जनवरी 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 32.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 63.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

  • फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 216 (-27) रिकॉर्ड किया गया है।  

  • आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में कटक (302) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (301) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 296 अंकों के साथ भिवानी चौथे स्थान पर है।

  • मंडीदीप-सिंगरौली में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 288 और 287 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

विश्लेषण से पता चला है कि 23 जनवरी 2026 को देश में ओड़िशा के अंगुल की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 311 रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले 22 जनवरी को भी अंगुल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 311 दर्ज किया गया। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में कोई बदलाव नहीं आया है और स्थिति जस की तस है। अंगुल में वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब बनी हुई है।            

रुझानों में सामने आया है कि अंगुल की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। 

अंगुल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 24 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में अंगुल की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 12 गुणा खराब है।

कल देश में गुरुग्राम की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 366 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 139 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां एक्यूआई घटकर 227 रह गया है।       

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज ‘बेहद खराब’ से खराब श्रेणी में पहुंच गई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 322 दर्ज किया गया था, जो आज 23 जनवरी को 40 अंकों के सुधार के साथ घटकर 282 पर पहुंच गया है।

इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 23 जनवरी 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 32.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 63.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 12.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 18 फीसदी से अधिक का वृद्धि हुई है। दूसरी तरफ मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। दूसरी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 14.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है। वहीं बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 70 फीसदी की गिरावट आई है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 216 (-27) रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में कटक (302) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (301) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 296 अंकों के साथ भिवानी चौथे स्थान पर है। मंडीदीप-सिंगरौली में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 288 और 287 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

दिल्ली (282) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (278), भुवनेश्वर (274) और नोएडा (270) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में ओड़िशा के तीन शहर (अंगुल, कटक, भुवनेश्वर) और हरियाणा के दो शहर (बल्लभगढ़, भिवानी) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि भिवानी, मंडीदीप, सिंगरौली, दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, धारूहेड़ा, गुम्मिडीपूंडी, मुजफ्फरनगर, ग्रेटर नोएडा, भिवाड़ी, बागपत, मेरठ, गुरुग्राम, हाजीपुर, फरीदाबाद, पीथमपुर, हापुड़, पानीपत, यमुना नगर, नारनौल, मानेसर, नागपुर, करनाल, उल्हासनगर, बहादुरगढ़, समस्तीपुर, बुलंदशहर, रोहतक, कोलकाता, लखनऊ, मोतिहारी, आसनसोल, वातवा, चरखी दादरी, बर्नीहाट, मुरादाबाद, बारीपदा, तालचेर, उदयपुर, बेतिया, कुरुक्षेत्र आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बल्लभगढ़, गुवाहाटी, हावड़ा, विशाखापत्तनम, चंद्रपुर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), प्रतापगढ़, धनबाद, कल्याण, भोपाल, गांधीनगर, सिवान, भिवंडी, राउरकेला, सिलीगुड़ी, ब्रजराजनगर, सुआकाती, बदलापुर, सवाई माधोपुर, कानपुर, तुमडीह, चूरू, ठाणे, अलवर, बीकानेर, कुंजेमुरा, बांसवाड़ा, बद्दी, इंदौर, जैसलमेर, मालेगांव, अहमदाबाद, छपरा, अंकलेश्वर, पटना, आगरा, रतलाम, सीकर, दुर्गापुर, जलना, नांदेड़, महाड, टोंक, वाराणसी, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), गया, खुर्जा, औरंगाबाद (बिहार), फतेहाबाद, कोटा, अजमेर, हनुमानगढ़, जलगांव, मंगुराहा, पिंपरी-चिंचवाड़, बारबिल, अकोला, बेगूसराय, नागौर, नवी मुंबई, बरेली, चेन्नई, जयपुर, पटियाला, अमरावती (महाराष्ट्र), मुंबई, कन्नूर, नासिक, पलवल, सोलापुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 3.8 फीसदी यानी महज नौ शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चामराजनगर, मदिकेरी, पंपोर, पंचगांव, रूपनगर, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, श्रीनगर आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 78 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें अनंतपुर, आरा, बारां, बाड़मेर, बठिंडा, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भिलाई, बिलासपुर, बूंदी, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दौसा, दावनगेरे, धारवाड़, धौलपुर, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, ग्वालियर, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कलबुर्गी, करौली, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, लातूर, लुधियाना आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 126 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेतिया, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, बिहार शरीफ, बीकानेर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बक्सर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, छपरा, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देहरादून, देवास, धनबाद, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, झालावाड़, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगुराहा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पलवल, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिवान, सोलापुर, सुआकाती, तालचेर, ठाणे, टोंक, तुमकुरु, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 23 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बागपत, भिवाड़ी, भिवानी, भुवनेश्वर, ब्यासनगर, दिल्ली, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हाजीपुर, हापुड़, मंडीदीप, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पानीपत, पीथमपुर, सिंगरौली, यमुना नगर शामिल हैं।

वहीं अंगुल, बल्लभगढ़, कटक में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 239 में से महज नौ शहरों में हवा 'बेहतर' है। 78 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 22 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 66 दर्ज किया गया था।

126 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज अंगुल (311) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। आंकड़ों के मुताबिक वहां कल से प्रदूषण में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मतलब अंगुल में वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब बनी हुई है।         

बता दें कि कल देश में गुरुग्राम की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 366 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 139 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां एक्यूआई घटकर 227 रह गया है।       

गुरुग्राम की तरह ही दिल्ली में भी आज प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 322 दर्ज किया गया, जो आज घटकर 282 पर पहुंच गया है। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 1,700 फीसदी अधिक खराब है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, जहां सूचकांक 216 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता अभी भी खराब श्रेणी में है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 23 जनवरी को भिवानी चौथे स्थान पर है, वहीं कटक (302) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (301) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 95, गाजियाबाद में 278, गुवाहाटी में 197, गुरूग्राम में 227, नोएडा में 270, ग्रेटर नोएडा में 249 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 104 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 175, चेन्नई में 105, चंडीगढ़ में 89, हैदराबाद में 84, जयपुर में 105 और पटना में 124 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन नौ शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें चामराजनगर, मदिकेरी, पंपोर, पंचगांव, रूपनगर, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, श्रीनगर शामिल हैं।

वहीं आइजोल, अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, आरा, बारां, बाड़मेर, बठिंडा, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भिलाई, बिलासपुर, बूंदी, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दौसा, दावनगेरे, धारवाड़, धौलपुर, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, ग्वालियर, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कलबुर्गी, करौली, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मदुरै, मुंगेर, मैसूर, नागपट्टिनम, ऊटी, परभनी, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, पुडुकोट्टई, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, सागर, सासाराम, सतना, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सूरत, तंजावुर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 78 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

22 जनवरी 2026: 237 में महज 3.4 फीसदी शहरों की हवा साफ, गुरुग्राम में 366 एक्यूआई 

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