22 जनवरी 2026: 237 में महज 3.4 फीसदी शहरों की हवा साफ, गुरुग्राम में 366 एक्यूआई

दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो भले ही कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, लेकिन वहां अभी भी वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ है
फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • 22 जनवरी 2026 को गुरुग्राम की हवा सबसे प्रदूषित रही, जहां एक्यूआई 366 दर्ज किया गया।

  • गुरुग्राम में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,200 फीसदी अधिक है।

  • दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 39 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में गुरुग्राम की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 8 गुणा खराब है।

  • दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो भले ही कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, लेकिन दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी ‘बेहद खराब’ है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 330 दर्ज किया गया था। हालांकि 22 जनवरी को 8 अंकों के सुधार के साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 322 पर पहुंच गया है।

  • 22 जनवरी 2026 को 237 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

  • वहीं 27.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 68.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

विश्लेषण से पता चला है कि 22 जनवरी 2026 को देश में एक बार फिर गुरुग्राम की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 366 रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले 21 जनवरी को गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता सूचकांक 358 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में आठ अंकों का उछाल आया है। हालांकि इसके बावजूद वहां वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब बनी हुई है।            

रुझानों में सामने आया है कि गुरुग्राम की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। 

गुरुग्राम में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,200 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 39 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में गुरुग्राम की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 8 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो भले ही कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, लेकिन दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी ‘बेहद खराब’ है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 330 दर्ज किया गया था। हालांकि 22 जनवरी को 8 अंकों के सुधार के साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 322 पर पहुंच गया है।

इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 22 जनवरी 2026 को 237 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 27.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 68.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 14 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दूसरी तरफ मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 6.7 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है। वहीं बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 243 (+9) रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (359) दूसरे जबकि नारनौल (343) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 335 अंकों के साथ नोएडा चौथे स्थान पर है। दिल्ली- धारूहेड़ा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 322 और 317 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

भिवाड़ी (314) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में ग्रेटर नोएडा (314), अंगुल (311) और मानेसर (307) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन शहर (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा) और हरियाणा के चार शहर (गुरुग्राम, धारूहेड़ा, नारनौल, मानेसर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुरुग्राम, गाजियाबाद, नारनौल, नोएडा, दिल्ली, धारूहेड़ा, भिवाड़ी, मानेसर, बल्लभगढ़, सिंगरौली, भिवानी, फरीदाबाद, बारीपदा, वातवा , चरखी दादरी, मेरठ, सीकर, बागपत, मंडीदीप, मुजफ्फरनगर, टोंक, कोटा, रोहतक, विरार, पीथमपुर, ग्वालियर, पानीपत, भरतपुर, हापुड़, तुमकुरु, हावड़ा, बिलीपाड़ा, बारबिल, गुवाहाटी, झालावाड़, बालासोर, चित्तौड़गढ़, तालचेर, बहादुरगढ़, हल्दिया, करनाल, बूंदी, आगरा, कोलकाता, बर्नीहाट, उल्हासनगर, यमुना नगर, नाहरलागुन, पुणे, गुम्मिडीपूंडी, कोल्लम, जयपुर, कल्याण, नागपुर, चंद्रपुर, सुआकाती, कुरुक्षेत्र, राउरकेला, आसनसोल, लुधियाना, चंडीगढ़, सिवान, राजसमंद, एलूर, कटनी, जलगांव, लखनऊ, कैथल, मीरा-भायंदर, अहमदाबाद, अररिया, पंचकुला, भीलवाड़ा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं ग्रेटर नोएडा, विशाखापत्तनम, बीकानेर, बुलंदशहर, हनुमानगढ़, बद्दी, चुरू, खुर्जा, सवाई माधोपुर, श्री गंगानगर, पटियाला, बाड़मेर, जालोर, भिवंडी, फतेहाबाद, ब्रजराजनगर, जैसलमेर, अंकलेश्वर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), सहरसा, बदलापुर, हिसार, सिलीगुड़ी, धुले, अजमेर, कुंजेमुरा, बारां, गांधीनगर, पिंपरी-चिंचवाड़, नांदेड़, खन्ना, दौसा, जालंधर, ठाणे, बठिंडा, पलवल, रतलाम, जलना, कन्नूर, बांसवाड़ा, हाजीपुर, महाड, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), पटना, तुमडीह आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 3.4 फीसदी यानी महज आठ शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कलबुर्गी, मदिकेरी, रूपनगर, शिलांग, श्रीनगर आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 66 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बक्सर, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दावनगेरे, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, झांसी, करौली, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, मंगुराहा, मिलुपारा, मुंगेर, मैसूर, ऊटी, पंपोर, पंचगांव, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़, प्रयागराज आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 126 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, बेतिया, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चुरू, दौसा, देहरादून, देवास, धनबाद, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोलकाता, कोल्लम, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पलवल, पंचकुला, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, सवाई माधोपुर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, तालचेर, ठाणे, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 27 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बागपत, बल्लभगढ़, बारीपदा, भरतपुर, भिवानी, भुवनेश्वर, बीकानेर, ब्यासनगर, चरखी दादरी, कटक, फरीदाबाद, ग्वालियर, हापुड़, कोटा, मंडीदीप, मेरठ, मुजफ्फरनगर, पानीपत, पीथमपुर, रोहतक, सीकर, सिंगरौली, टोंक, तुमकुरु, वातवा , विरार, विशाखापत्तनम शामिल हैं।

वहीं अंगुल, भिवाड़ी, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मानेसर, नारनौल, नोएडा में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 237 में से महज आठ शहरों में हवा 'बेहतर' है। 66 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 21 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 66 दर्ज किया गया था।

126 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर गुरुग्राम (366) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। आंकड़ों के मुताबिक वहां कल से प्रदूषण में आठ अंकों का इजाफा हुआ है। हालांकि गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब बनी हुई है।             

दिल्ली में भी आज स्थिति बेहद खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 322 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल दिल्ली में एक्यूआई बढ़कर 330 तक पहुंच गया था। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 1,900 फीसदी अधिक खराब है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है, जहां सूचकांक 243 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता अभी भी खराब श्रेणी में है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 22 जनवरी को नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं गाजियाबाद (359) दूसरे, जबकि नारनौल (343) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 211, गाजियाबाद में 359, गुवाहाटी में 192, गुरूग्राम में 366, नोएडा में 335, ग्रेटर नोएडा में 314 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 133 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 151, चेन्नई में 85, चंडीगढ़ में 158, हैदराबाद में 80, जयपुर में 174 और पटना में 103 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन आठ शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कलबुर्गी, मदिकेरी, रूपनगर, शिलांग, श्रीनगर शामिल हैं।

वहीं अनंतपुर, आरा, बरेली, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बक्सर, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दावनगेरे, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, झांसी, करौली, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, मंगुराहा, मिलुपारा, मुंगेर, मैसूर, ऊटी, पंपोर, पंचगांव, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुडुकोट्टई, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, रामनाथपुरम, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, तंजावुर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा आदि 66 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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प्रदूषण में गुरुग्राम फिर नंबर वन, दिल्ली सहित दस शहरों में स्थिति 'बेहद खराब'

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