प्रदूषण का रेड अलर्ट: गैस चैंबर में तब्दील होता रायबरेली, बढ़कर 500 पर पहुंचा एक्यूआई

दूसरी तरफ देश में पंपोर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 10 रिकॉर्ड किया गया।
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर
Published on
सारांश
  • भारत में हवा की तस्वीर एक बार फिर दो बिल्कुल अलग चेहरे दिखा रही है। एक ओर रायबरेली की आबोहवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि उसका एक्यूआई 500 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जबकि दूसरी ओर पंपोर में महज 10 एक्यूआई के साथ देश की सबसे स्वच्छ हवा दर्ज की गई।

  • पिछले 24 घंटों में रायबरेली के प्रदूषण में 73 अंकों की तेज बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि वहां हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। पीएम10 कणों के दबदबे और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 1,000 फीसदी अधिक प्रदूषण ने शहर को लगभग गैस चैंबर जैसी स्थिति में ला खड़ा किया है।

  • हालांकि राहत की बात यह है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 242 शहरों के आंकड़ों के अनुसार देश के लगभग 93 फीसदी शहरों में हवा 'बेहतर' या 'संतोषजनक' श्रेणी में बनी हुई है।

  • दिल्ली और फरीदाबाद में प्रदूषण में हल्की बढ़ोतरी जरूर दर्ज हुई, लेकिन दोनों शहर अभी भी संतोषजनक श्रेणी में हैं।

  • वहीं फतेहाबाद, रूपनगर और बर्नीहाट जैसे शहर भी चिंता बढ़ा रहे हैं। यह तस्वीर साफ करती है कि देश के अधिकांश हिस्सों में हवा फिलहाल राहत दे रही है, लेकिन कुछ शहरों में प्रदूषण का संकट लगातार गहराता जा रहा है, जहां तत्काल और प्रभावी कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 26 जुलाई 2026 को देश में एक बार फिर रायबरेली सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 500 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल (25 जुलाई) को रायबरेली में एक्यूआई 427 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 73 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि रायबरेली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

रायबरेली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,000 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में पंपोर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 10 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहरों रायबरेली की तुलना पंपोर से करें तो वहां स्थिति 50 गुणा खराब है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 73 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 80 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 7 अंकों का उछाल आया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।  

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 25 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 88 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 90 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 2 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ बनी हुई है।   

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 26 जुलाई 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 45.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 46.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 7.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 5.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों में 4.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 10.5 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।   

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में फतेहाबाद (194) दूसरे जबकि रूपनगर (186) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बर्नीहाट (मेघालय) (168) चौथे स्थान पर है। सोनीपत (148) – नारनौल (138) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

पानीपत (136) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मंडी गोबिंदगढ़ (133), धौलपुर (131) और विशाखापत्तनम (119) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (फतेहाबाद, सोनीपत, नारनौल, पानीपत) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि रूपनगर, बर्नीहाट (मेघालय), नारनौल, धौलपुर, गुरुग्राम, खोरा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं रायबरेली, फतेहाबाद, सोनीपत, पानीपत, मंडी गोबिंदगढ़, विशाखापत्तनम, बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, जोरापोखर, सिवान आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 45.9 फीसदी यानी 111 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चित्तौड़गढ़, दुर्गापुर, फतेहपुर सिकरी, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, जालौर, जींद, जोधपुर, काकीनाडा, करौली, कारवार, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, मदिकेरी, मालेगांव, मैंगलोर, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुंगेर, मैसूरु, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 113 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अंकलेश्वर, आरा, बद्दी, बागलकोट, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बठिंडा, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, चेन्नई, छपरा, चूरू, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हुबली, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कानपुर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 17 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें बल्लभगढ़, बर्नीहाट (मेघालय), धनबाद, धौलपुर, फतेहाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, जोरापोखर, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, नारनौल, पानीपत, रूपनगर, सिलीगुड़ी, सिवान, सोनीपत, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं। वहीं रायबरेली (500) में स्थिति गंभीर है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 242 में से 111 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 113 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 25 जुलाई को यह आंकड़ा 108 दर्ज किया गया था।

17 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर रायबरेली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 500 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (25 जुलाई) को रायबरेली में एक्यूआई 427 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 73 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 73 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 80 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 7 अंकों का उछाल आया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।  

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 88 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 90 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 2 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ बनी हुई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 26 जुलाई को बर्नीहाट (मेघालय) (168) चौथे स्थान पर है, वहीं फतेहाबाद (194) दूसरे, जबकि रूपनगर (186) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 66, गाजियाबाद में 68, गुवाहाटी में 51, गुरूग्राम में 98, नोएडा में 68, ग्रेटर नोएडा में 95 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 61 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 64, चेन्नई में 82, चंडीगढ़ में 33, हैदराबाद में 48, जयपुर में 53 और पटना में 70 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 111 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बारबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तौड़गढ़, दुर्गापुर, फतेहपुर सिकरी, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, जालौर, जींद, जोधपुर, काकीनाडा, करौली, कारवार, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, मदिकेरी, मालेगांव, मैंगलोर, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुंगेर, मैसूरु, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, ऋषिकेश, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सतारा, सीकर, सिलचर, सिरोही, सोलापुर, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अमरावती (आंध्रपदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आरा, बद्दी, बागलकोट, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बठिंडा, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, चेन्नई, छपरा, चूरू, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हुबली, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नेल्लोर, नोएडा, पाली, पलवल, पटना, पीथमपुर, पूर्णिया, रोहतक, राउरकेला, सहरसा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, सिंगरौली, सिरसा, शिवसागर, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर, यमुना नगर आदि 113 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं  

Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in