

देश में वायु प्रदूषण का संकट अब केवल दिल्ली, नोएडा या अन्य महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है। 15 जुलाई 2026 को सरकारी आंकड़ों के अनुसार पंजाब का रूपनगर देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 203 दर्ज किया गया।
सिर्फ 24 घंटों में यहां प्रदूषण 72 अंक बढ़ा और हवा में घातक पीएम2.5 कणों का दबदबा रहा, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 1,250 फीसदी अधिक है।
इसके उलट गंगटोक 14 एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा, जिससे स्पष्ट है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हवा की गुणवत्ता में भारी असमानता बनी हुई है।
राहत की बात यह रही कि दिल्ली और फरीदाबाद में प्रदूषण में क्रमशः 36 और 29 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एक दिन पहले सबसे प्रदूषित रहे पंचगांव की हवा में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 246 शहरों के आंकड़ों से पता चलता है कि अधिकांश शहरों में हवा संतोषजनक है, लेकिन हरियाणा समेत कई छोटे और मध्यम शहर तेजी से प्रदूषण के नए हॉटस्पॉट बन रहे हैं। यह संकेत है कि स्वच्छ हवा की चुनौती अब पूरे देश की है, केवल महानगरों की नहीं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 15 जुलाई 2026 को देश में रूपनगर सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 203 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (14 जुलाई) को रूपनगर में सूचकांक 131 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 72 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि रूपनगर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
रूपनगर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,250 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में गंगटोक की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर रूपनगर की तुलना गंगटोक से करें तो वहां स्थिति 14.5 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में पंचगांव की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 305 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 149 अंकों के भारी सुधार के साथ सूचकांक 156 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 172 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 136 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 36 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 14 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में सुधार आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 159 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 130 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 29 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 15 जुलाई 2026 को 246 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 19.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 55.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 25.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 2.1 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों में 11.5 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 10.1 फीसदी की कमी देखी गई। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों की गिनती में भी कल से 85.7 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पानीपत (196) दूसरे जबकि यमुना नगर (185) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा (184) चौथे स्थान पर है। जींद (183)– बद्दी (171) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
सोनीपत (170) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में खोरा (169), चरखी दादरी (165) और बहादुरगढ़ (163) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के छह शहर (पानीपत, यमुना नगर, जींद, सोनीपत, चरखी दादरी, बहादुरगढ़) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि रूपनगर, यमुना नगर, जींद, सोनीपत, खोरा, चरखी दादरी, बहादुरगढ़, गुरुग्राम, पंचगांव, मेरठ, जयपुर, वातवा, भिवानी, पाली, फरीदाबाद, मानेसर, नारनौल, धारूहेड़ा, करनाल, अलवर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं पानीपत, ग्रेटर नोएडा, बद्दी, फतेहाबाद, चुरू, हिसार, जैसलमेर, अंबाला, बीकानेर, नोएडा, गाजियाबाद, बल्लभगढ़, कुरुक्षेत्र, टोंक, दिल्ली, अमरावती (आंध्रप्रदेश), मुजफ्फरनगर, झुंझुनू, बुलंदशहर, दौसा, सिरसा, कटनी, पटियाला, सवाई माधोपुर, करौली, बिलीपाड़ा, हापुड़, हनुमानगढ़, छपरा, बाड़मेर, गुम्मिडीपूंडी, रायबरेली, उदयपुर, भिवाड़ी, श्री गंगानगर, थूथुकुडी, भागलपुर, मथुरा, अमृतसर, सीकर, चेन्नई आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 19.1 फीसदी यानी 47 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गुवाहाटी, हल्दिया, हिंगोली, जलगांव, कलबुर्गी, कारवार, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, महाद, मीरा-भायंदर, नंदेसरी, नवी मुंबई, पंचकुला, प्रयागराज, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, रतलाम, सागर, शिवमोगा, शिवसागर, सोलापुर, उल्हासनगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 136 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, कटक, देहरादून, देवास, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, ग्वालियर, हाजीपुर, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, क्योंझर, खैरथल, खन्ना, खुर्जा, कोलकाता, कोटा, कुरनूल, लखनऊ, लुधियाना, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मैंगलोर, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नेल्लोर, पलवल, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, पुणे, राजमहेंद्रवरम आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 62 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बाड़मेर, भागलपुर, भिवाड़ी, भिवानी, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, चरखी दादरी, चेन्नई, छपरा, चुरू, दौसा, दिल्ली, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, झुंझुनू, जींद, करौली, करनाल, कटनी, खोरा, कुरुक्षेत्र, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पाली, पंचगांव, पानीपत, पटियाला, रायबरेली, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, थूथुकुडी, टोंक, उदयपुर, वातवा, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह रूपनगर (203) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 246 में से 47 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 136 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 14 जुलाई को यह आंकड़ा 122 दर्ज किया गया था।
62 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज रूपनगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 203 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (14 जुलाई) को रूपनगर में सूचकांक 131 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 72 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
इससे पहले कल देश में पंचगांव की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 305 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 149 अंकों के भारी सुधार के साथ सूचकांक 156 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 172 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 136 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 36 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में सुधार आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 159 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 130 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 29 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 15 जुलाई को ग्रेटर नोएडा (184) चौथे स्थान पर है, वहीं पानीपत (196) दूसरे, जबकि यमुना नगर (185) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 94, गाजियाबाद में 139, गुवाहाटी में 44, गुरूग्राम में 161, नोएडा में 141, ग्रेटर नोएडा में 184 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 56 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 72, चेन्नई में 101, चंडीगढ़ में 75, हैदराबाद में 59, जयपुर में 140 और पटना में 71 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 47 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अररिया, बदलापुर, बारीपदा, भिलाई, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, कोयंबटूर, दमोह, डोंबिवली, गडग, गंगटोक, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हिंगोली, जलगांव, कलबुर्गी, कारवार, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, महाद, मीरा-भायंदर, नंदेसरी, नवी मुंबई, पंचकुला, प्रयागराज, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, रतलाम, सागर, शिवमोगा, शिवसागर, सोलापुर, उल्हासनगर, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बागपत, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बोइसर, बूंदी, बक्सर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, कटक, देहरादून, देवास, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, ग्वालियर, हाजीपुर, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, क्योंझर, खैरथल, खन्ना, खुर्जा, कोलकाता, कोटा, कुरनूल, लखनऊ, लुधियाना, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मैंगलोर, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नेल्लोर, पलवल, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, पुणे, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सतना, सिलचर, सिरोही, श्रीनगर, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमकुरु, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 136 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं