

देश में वायु प्रदूषण अब केवल दिल्ली, मुंबई या दूसरे महानगरों तक सीमित नहीं रहा। राजस्थान का झुंझुनू 299 एक्यूआई के साथ 11 मई 2026 को देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां हवा में ओजोन का खतरनाक स्तर लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल रहा है।
यहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 390 फीसदी ज्यादा दर्ज किया गया। चिंताजनक बात यह है कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के पांच शहर शामिल हैं, जो छोटे और मध्यम शहरों में तेजी से बढ़ते प्रदूषण संकट की ओर इशारा करते हैं।
दूसरी तरफ बिहार का छपरा सबसे साफ हवा वाले शहरों में रहा, जहां एक्यूआई महज 20 दर्ज किया गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 240 शहरों के आंकड़ों के मुताबिक करीब 36 फीसदी शहरों में हवा मध्यम या खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है। कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 जैसे महीन कण, जबकि कुछ जगहों पर ओजोन और कार्बन प्रदूषण का बड़ा कारण बने हुए हैं।
दिल्ली में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 127 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 131 पर पहुंच गया। दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 136 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 149 पर पहुंच गया।
यह तस्वीर साफ संकेत देती है कि बदलते मौसम, बढ़ती गर्मी और अनियंत्रित उत्सर्जन के बीच भारत का वायु संकट अब गांवों और छोटे शहरों तक गहराई से फैल चुका है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 11 मई 2026 को देश में झुंझुनू सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 299 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल झुंझुनू में सूचकांक 273 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 26 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि झुंझुनू की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
झुंझुनू में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 390 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में छपरा की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 20 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर झुंझुनू की तुलना छपरा से करें तो वहां स्थिति 14.9 गुणा खराब है।
वहीं कल चुरू में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 302 दर्ज किया गया। वहीं आज सूचकांक घटकर 149 पर पहुंच गया है। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण में 153 अंकों का भारी सुधार हुआ है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 127 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 131 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 4 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 136 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 149 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 11 मई 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 15 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 48.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 36.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 9.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 5.6 फीसदी का कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 15.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 16.7 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सवाई माधोपुर (281) दूसरे जबकि मेरठ (231) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह दौसा चौथे स्थान पर है। भरतपुर-सहरसा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 201 और 198 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
झालावाड़ (187) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (186), महाड (185) और पानीपत (185) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के पांच शहर (झुंझुनू, सवाई माधोपुर, दौसा, भरतपुर, झालावाड़) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सहरसा, मुजफ्फरनगर, बर्नीहाट (असम), करनाल, नंदेसरी, किशनगंज, हनुमानगढ़, गुरुग्राम, राजकोट, चरखी दादरी, मंडीदीप, वातवा, खन्ना, धारूहेड़ा, हाजीपुर, जींद, कैथल, बहादुरगढ़, हापुड़, भिवाड़ी, पंचगांव, जालंधर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं पानीपत, श्री गंगानगर, चुरू, फरीदाबाद, बीकानेर, भीलवाड़ा, सिरसा, मंडी गोबिंदगढ़, कुरुक्षेत्र, टोंक, कल्याण, पाली, सिंगरौली, धुले, मेहसाणा, अंकलेश्वर, रतलाम, बागपत, यमुना नगर, बल्लभगढ़, बुलंदशहर, बांसवाड़ा, भावनगर, वडोदरा, अगरतला, बेलापुर, अलवर, नागौर, सूरत, गांधीनगर, जैसलमेर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 15 फीसदी यानी 36 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, बिहार शरीफ, बिलीपाड़ा, बक्सर, चामराजनगर, छपरा, चिक्काबल्लापुर, कुड्डालोर, गंगटोक, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, कलबुर्गी, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, मदिकेरी, मंगुराहा, पंपोर, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, ऋषिकेश, रूपनगर, समस्तीपुर, शिलांग, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 117 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भुवनेश्वर, बोइसर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, कोयंबटूर, कटक, देहरादून, देवास, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गडग, गया, गोरखपुर, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालोर, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, खुर्जा, कोल्हापुर, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मानेसर, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजसमंद, रोहतक, राउरकेला आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 82 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (बिहार), बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बेलापुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, चुरू, दिल्ली, धनबाद, धारूहेड़ा, धुले, फरीदाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, जींद, जोधपुर, कैथल, कल्याण, करनाल, काशीपुर, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोटा, कुरुक्षेत्र, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नागौर, नंदेसरी, नोएडा, पाली, पंचगांव, पानीपत, प्रतापगढ़, राजकोट, रतलाम, सागर, सहरसा, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सिरसा, श्री गंगानगर, सूरत, टोंक, वडोदरा, वातवा, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में झुंझुनू, सवाई माधोपुर, मेरठ, दौसा, भरतपुर में स्थिति ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 240 में से 36 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 117 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 10 मई को यह आंकड़ा 124 दर्ज किया गया था।
82 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज झुंझुनू में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 299 दर्ज किया गया। इससे पहले कल झुंझुनू में सूचकांक 273 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 26 अंकों का इजाफा हुआ है। इसके बावजूद आज भी झुंझुनू में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।
वहीं कल चुरू में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 302 दर्ज किया गया। वहीं आज सूचकांक घटकर 149 पर पहुंच गया है। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण में 153 अंकों का भारी सुधार हुआ है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 127 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 131 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 4 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 136 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 149 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 11 मई को दौसा चौथे स्थान पर है, वहीं सवाई माधोपुर (281) दूसरे, जबकि मेरठ (231) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 120, गाजियाबाद में 186, गुवाहाटी में 43, गुरूग्राम में 140, नोएडा में 149, ग्रेटर नोएडा में 149 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 72 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 92, चेन्नई में 58, चंडीगढ़ में 76, हैदराबाद में 69, जयपुर में 130 और पटना में 79 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 36 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अमरावती (आंध्रप्रदेश), बागलकोट, बरेली, बैरकपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलीपाड़ा, बक्सर, चामराजनगर, छपरा, चिक्काबल्लापुर, कुड्डालोर, गंगटोक, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, कलबुर्गी, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, मदिकेरी, मंगुराहा, पंपोर, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, ऋषिकेश, रूपनगर, समस्तीपुर, शिलांग, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा, विशाखापत्तनम शामिल हैं।
वहीं अजमेर, अकोला, अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भिवंडी, भिवानी, भुवनेश्वर, बोइसर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, कोयंबटूर, कटक, देहरादून, देवास, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गडग, गया, गोरखपुर, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालोर, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, खुर्जा, कोल्हापुर, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मानेसर, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजसमंद, रोहतक, राउरकेला, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 117 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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