प्रदूषण ने मध्यप्रदेश में डाला डेरा, पीथमपुर में सबसे ज्यादा 192 रहा एक्यूआई

09 अप्रैल 2026 को जारी आंकड़ों से पता चला है कि देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में मध्यप्रदेश के चार शहर (पीथमपुर, देवास, इंदौर, सिंगरौली) शामिल हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
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सारांश
  • मध्यप्रदेश में प्रदूषण धीरे-धीर गंभीर रूप ले रहा है, जहां 9 अप्रैल 2026 को पीथमपुर देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा। इस दौरान वहां एक्यूआई 192 दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटों में देखें तो वहां एक्यूआई में 68 अंकों का उछाल दर्ज किया गया।

  • चिंताजनक बात यह है कि देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में मध्यप्रदेश के चार शहर (पीथमपुर, देवास, इंदौर, सिंगरौली) शामिल हैं, जो क्षेत्रीय प्रदूषण संकट की ओर इशारा करता है। वहीं दूसरी ओर पंपोर देश का सबसे साफ शहर रहा, जिससे साफ है कि देश के भीतर ही वायु गुणवत्ता में भारी असमानता मौजूद है।

  • दिल्ली से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां 08 अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 दर्ज किया गया था, जो अगले दिन बढ़कर 101 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में अंकों अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

  • कुल मिलाकर, देश के अधिकांश शहर ‘संतोषजनक’ श्रेणी में जरूर हैं, लेकिन मध्यम श्रेणी वाले शहरों में तेजी से होती बढ़ोतरी और साफ हवा वाले शहरों में गिरावट यह संकेत दे रही है कि प्रदूषण अब धीरे-धीरे व्यापक रूप ले रहा है जो बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।

09 अप्रैल 2026 को जारी आंकड़ों से पता चला है कि देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में मध्यप्रदेश के चार शहर (पीथमपुर, देवास, इंदौर, सिंगरौली) शामिल हैं।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 09 अप्रैल 2026 को देश में पीथमपुर सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 192 दर्ज किया गया, जो मध्यम श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि इससे पहले 08 अप्रैल को मध्य प्रदेश के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 124 दर्ज किया गया था।

मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 68 अंकों का उछाल आया है।

सारांश

रुझानों में यह भी सामने आया है कि पीथमपुर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। पीथमपुर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,100 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में पंपोर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पीथमपुर की तुलना पंपोर से करें तो वहां स्थिति 13.7 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में सिंगरौली की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 196 तक पहुंच गया। हालांकि आज सिंगरौली में प्रदूषण के स्तर 50 अंकों का भारी सुधार आया है। इसके साथ ही सूचकांक 146 पर पहुंच गया।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 93 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 101 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 8 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से उछाल आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 111 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 117 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 09 अप्रैल 2026 को 247 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 21.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 53 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 25.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 1.9 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 14.9 फीसदी की गिरावट रिकॉर्ड की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 83 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।     

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में देवास (190) दूसरे जबकि वातवा तीसरे स्थान पर है। इसी तरह अंगुल (189) चौथे स्थान पर है। इंदौर-सवाई माधोपुर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 170 और 169 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

सोनीपत (157) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में चूरू (156), गाजियाबाद (146) और सिंगरौली (146) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में मध्य प्रदेश के चार शहर (पीथमपुर, देवास, इंदौर, सिंगरौली) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पीथमपुर, देवास, वातवा, इंदौर, सोनीपत, मंडीदीप, हाजीपुर, चरखी दादरी, यमुना नगर, मालेगांव आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं सिंगरौली, चित्तौड़गढ़, विशाखापत्तनम, चंद्रपुर, ग्रेटर नोएडा, यादगीर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, उदयपुर, बीकानेर, बर्नीहाट (मेघालय), भोपाल, रतलाम, परभनी, भिवाड़ी, पाली, सिरोही, फरीदाबाद, राजकोट, अहमदाबाद, भावनगर, नांदेड़, मेहसाणा, नंदेसरी, जालोर, गांधीनगर, अंकलेश्वर, वडोदरा, पटना, डूंगरपुर, नोएडा, सोलापुर, जोधपुर, अमरावती (महाराष्ट्र), राजसमंद, गया, गुरुग्राम आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 21.1 फीसदी यानी महज 52 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कानपुर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, नागांव, नलबाड़ी, नयागढ़, पंपोर, पटियाला, प्रयागराज, पुदुचेरी, रायरंगपुर, ऋषिकेश आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 131 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बुलंदशहर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छपरा, चिक्काबल्लापुर, कटक, दमोह, दौसा, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोरापोखर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, कोल्हापुर, कोल्लम, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाद, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मैंगलोर, मेरठ, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागौर, नागपुर, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंचगांव, पानीपत, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, पूर्णिया, रायपुर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 64 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अहमदाबाद, अररिया, औरंगाबाद (बिहार), बारां, बाड़मेर, बेलापुर, भोपाल, चंद्रपुर, छाल, देवास, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हिसार, जयपुर, करनाल, कटनी, मालेगांव, मंडीदीप, मंगुराहा, मुजफ्फरपुर, नंदेसरी, पटना, पीथमपुर, समस्तीपुर, सासाराम, सिंगरौली, सिवान, सोनीपत, टोंक, वातवा, विशाखापत्तनम, यादगीर आदि शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 247 में से महज 52 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 131 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 08 अप्रैल को यह आंकड़ा 154 दर्ज किया गया था।

64 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज पीथमपुर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 192 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल पीथमपुर में सूचकांक 124 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 68 अंकों का उछाल आया है।

इससे पहले कल देश में सिंगरौली की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 196 तक पहुंच गया। हालांकि आज सिंगरौली में प्रदूषण के स्तर 50 अंकों का भारी सुधार आया है। इसके साथ ही सूचकांक 146 पर पहुंच गया।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 93 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 101 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 8 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से उछाल आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 111 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 117 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 09 अप्रैल को अंगुल चौथे स्थान पर है, वहीं देवास (190) दूसरे, जबकि वातवा (190) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 136, गाजियाबाद में 146, गुवाहाटी में 40, गुरूग्राम में 101, नोएडा में 107, ग्रेटर नोएडा में 133 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 69 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 52, चेन्नई में 58, चंडीगढ़ में 64, हैदराबाद में 84, जयपुर में 97 और पटना में 108 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 52 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अंबाला, अंबरनाथ, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बेतिया, भिवानी, बक्सर, चामराजनगर, छाल, चित्तूर, कोयंबटूर, देहरादून, फिरोजाबाद, गंगटोक, गुवाहाटी, हल्दिया, कैथल, कानपुर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, नागांव, नलबाड़ी, नयागढ़, पंपोर, पटियाला, प्रयागराज, पुदुचेरी, रायरंगपुर, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, सहरसा, शिलांग, शिवमोगा, सिरसा, शिवसागर, श्रीनगर, तिरुपुर, विजयपुरा, वृंदावन शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बारबिल, बाड़मेर, बठिंडा, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छपरा, चिक्काबल्लापुर, कटक, दमोह, दौसा, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोरापोखर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, कोल्हापुर, कोल्लम, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाद, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मैंगलोर, मेरठ, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागौर, नागपुर, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंचगांव, पानीपत, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनगर, रोहतक, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिवान, सुआकाती, सूरत, तालचेर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमकुरु, तुमडीह, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार आदि 131 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है। देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं  

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