

देश में वायु प्रदूषण अब महज बड़े शहरों तक सीमित नहीं, छोटे शहरों में भी यह संकट गहराता जा रहा है।
30 अप्रैल 2026 को जारी सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि हरियाणा का नारनौल देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 306 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। पिछले 24 घंटों में यहां प्रदूषण के स्तर में 38 अंकों का उछाल आया है।
नारनौल में पीएम2.5 कणों की अत्यधिक मौजूदगी ने हवा को गंभीर रूप से जहरीला बना दिया है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से लगभग 1900 फीसदी अधिक है।
उत्तर प्रदेश और हरियाणा के शहरों का दबदबा शीर्ष प्रदूषित शहरों की सूची में साफ दिखा, जहां भिवानी, मेरठ, करनाल, गाजियाबाद और मुजफ्फरनगर जैसे शहर भी सबसे खराब स्थिति में रहे। दूसरी ओर, मिजोरम का आइजोल देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई मात्र 15 दर्ज किया गया।
दिल्ली और फरीदाबाद में हल्की राहत देखने को मिली, जहां प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई। वहीं 228 शहरों में 14.9 फीसदी शहरों की हवा साफ, 53.5 फीसदी संतोषजनक और 31.6 फीसदी में स्थिति चिंताजनक पाई गई। कुल मिलाकर देश में प्रदूषण का असंतुलित और उतार-चढ़ाव भरा पैटर्न सामने आया है, जिसमें कुछ सुधार के संकेत हैं, लेकिन कई क्षेत्र अब भी गंभीर खतरे में हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 30 अप्रैल 2026 को देश में नारनौल सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 306 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल नारनौल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 268 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 38 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि नारनौल की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
नारनौल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,900 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर नारनौल की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 20 गुणा खराब है।
गौरतलब है कि कल देश में कैथल की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 334 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में कैथल का जिक्र नहीं है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 183 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 148 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 35 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 157 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 124 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 30 अप्रैल 2026 को 228 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 14.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 53.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 31.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 9.7 फीसदी का उछाल आया है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 4.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 20.7 फीसदी की कमी आई है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 44.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में भिवानी (305) दूसरे जबकि मेरठ (237) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह करनाल (222) चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद- मुजफ्फरनगर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 212 और 209 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
ग्रेटर नोएडा (204) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में नोएडा (184), बल्लभगढ़ (180) और श्री गंगानगर (176) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि नारनौल, भिवानी, मेरठ, करनाल, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, ग्वालियर, भिवाड़ी, दिल्ली, मंडी गोबिंदगढ़, बर्नीहाट (असम), पंचगांव, जयपुर, धारूहेड़ा, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, कोटा, झालावाड़, फरीदाबाद, जींद, कल्याण आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, नोएडा, बल्लभगढ़, पाली, जैसलमेर, सिंगरौली, बाड़मेर, कुरुक्षेत्र, सिरोही, बीकानेर, जालोर, टोंक, उदयपुर, चरखी दादरी, सोनीपत, हापुड़, जोधपुर, सीकर, पीथमपुर, वातवा, मंडीदीप, अजमेर, बुलंदशहर, मेहसाणा, सवाई माधोपुर, वाराणसी, चंद्रपुर, उज्जैन, फतेहाबाद, प्रतापगढ़, अलवर, चूरू, दौसा, बारां, पटियाला, नागौर, भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, देवास, बूंदी, राजसमंद, गांधीनगर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 14.9 फीसदी यानी महज 34 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में दुर्गापुर, गोरखपुर, गुवाहाटी, हावड़ा, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, नागांव, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नेल्लोर, पुदुचेरी, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, वापी शामिल हैं।
इसी तरह देश के 122 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भिवंडी, भोपाल, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कटक, दमोह, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झांसी, झुंझुनू, जोरापोखर, कलबुर्गी, कानपुर, कटिहार, कटनी, खुर्जा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, परभनी, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजकोट, राउरकेला, सागर, सतना, शिवमोगा, सिलीगुड़ी आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 65 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अजमेर, अलवर, बद्दी, बागपत, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चूरू, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, जींद, जोधपुर, कल्याण, कोटा, कुरुक्षेत्र, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मेहसाणा, नागौर, नोएडा, पाली, पंचगांव, पटियाला, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, राजसमंद, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, सिरोही, सोनीपत, श्री गंगानगर, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वाराणसी, वातवा आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में गाजियाबाद, टर नोएडा, करनाल, मेरठ, मुजफ्फरनगर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं देश में नारनौल (306), भिवानी (305) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 228 में से महज 34 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 122 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 29 अप्रैल को यह आंकड़ा 117 दर्ज किया गया था।
65 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज नारनौल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 306 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल नारनौल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 268 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 38 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब हो गई है।
गौरतलब है कि कल देश में कैथल की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 334 रिकॉर्ड किया गया था। लेकिन आज सरकारी आंकड़ों में कैथल का जिक्र नहीं है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 183 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 148 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 35 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 157 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 124 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 30 अप्रैल को करनाल चौथे स्थान पर है, वहीं भिवानी (305) दूसरे, जबकि मेरठ (237) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 150, गाजियाबाद में 212, गुवाहाटी में 48, गुरूग्राम में 128, नोएडा में 184, ग्रेटर नोएडा में 204 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 57 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 97, चेन्नई में 59, चंडीगढ़ में 71, हैदराबाद में 74, जयपुर में 129 और पटना में 83 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 34 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अंबरनाथ, अररिया, बैरकपुर, भिलाई, चामराजनगर, कुड्डालोर, दुर्गापुर, गोरखपुर, गुवाहाटी, हावड़ा, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, नागांव, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नेल्लोर, पुदुचेरी, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, वापी, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अंगुल, अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बारबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भिवंडी, भोपाल, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कटक, दमोह, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झांसी, झुंझुनू, जोरापोखर, कलबुर्गी, कानपुर, कटिहार, कटनी, खुर्जा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, परभनी, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजकोट, राउरकेला, सागर, सतना, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उल्हासनगर, वडोदरा, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर आदि 122 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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