बढ़ते ओजोन से कटक में स्थिति बेहद खराब, शिलांग में 200 के पार एक्यूआई

02 मार्च 2026 को देश में कटक सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 302 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है
भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक
भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • 02 मार्च 2026 को देश में हवा का हाल गंभीर तस्वीर पेश करता है। ओजोन की बढ़ती मात्रा के कारण कटक 302 एक्यूआई के साथ ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 400 फीसदी अधिक है। बीते 24 घंटों में यहां प्रदूषण 21 अंकों तक बढ़ा।

  • दूसरी ओर श्रीनगर 28 एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा, जिससे कटक की स्थिति करीब दस गुना बदतर नजर आती है।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 236 शहरों के आंकड़ों से पता चलता है कि देश के 53 फीसदी शहरों में हवा चिंताजनक है, जबकि महज 2.9 फीसदी शहरों में ही हवा साफ है।

  • हरियाणा के पांच शहर देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं।

  • यह रुझान बताता है कि प्रदूषण अब स्थानीय नहीं, बल्कि व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है।

विश्लेषण के मुताबिक 02 मार्च 2026 को देश में कटक सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 302 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 01 मार्च को कटक में एक्यूआई 281 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 21 अंकों का उछाल आया है।  

रुझानों में सामने आया है कि कटक की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। कटक में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 28 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर कटक की तुलना श्रीनगर से करें तो वहां स्थिति 10 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में चरखी दादरी की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 296 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज पांच अंकों के सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 291 पर पहुंच गया है।

राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में मामूली इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 191 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 193 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में दो अंकों का उछाल दर्ज किया गया। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 200 फीसदी अधिक खराब है।         

दूसरी तरफ फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में कल जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 193 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 192 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 02 मार्च 2026 को 236 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 44.1 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 53 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 36.4 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 5.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। वहीं खराब गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में करीब 16.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में चरखी दादरी (291) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (270) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 248 अंकों के साथ धारूहेड़ा चौथे स्थान पर है। भिवाड़ी-बहादुरगढ़ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 242 और 241 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

गुरुग्राम (240) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मंडीदीप (236), अंगुल (230), मंडी गोबिंदगढ़ (227) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (चरखी दादरी, बल्लभगढ़, धारूहेड़ा, बहादुरगढ़, गुरुग्राम) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, धारूहेड़ा, भिवाड़ी, बहादुरगढ़, गुरुग्राम, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, वडोदरा, फरीदाबाद, रायबरेली, गुम्मिडीपूंडी, मानेसर, पानीपत, जींद, बर्नीहाट, नलबाड़ी, हाजीपुर, कुरुक्षेत्र, तालचेर, वातवा, पंचगांव, इंदौर, चिक्काबल्लापुर, सोनीपत, राउरकेला, अगरतला, हापुड़, लखनऊ, आसनसोल, नारनौल, बारीपदा, करनाल, रूपनगर, उज्जैन, मुजफ्फरपुर, पुदुचेरी, मोतिहारी, सोलापुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बल्लभगढ़, बारबिल, शिलांग, ग्रेटर नोएडा, सवाई माधोपुर, गाजियाबाद, बुलंदशहर, बिलीपाड़ा, कुंजेमुरा, नोएडा, नागौर, बीकानेर, श्री गंगानगर, विशाखापत्तनम, सिंगरौली, सीकर, जालोर, हनुमानगढ़, जयपुर, ग्वालियर, पीथमपुर, रामनगर, टोंक, क्योंझर, सहरसा, अहमदाबाद, बद्दी, पाली, झुंझुनू, बागपत, भीलवाड़ा, जोधपुर, अलवर, झालावाड़, मुजफ्फरनगर, चूरू, जैसलमेर, मेरठ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 2.9 फीसदी यानी महज 7 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, धुले, कोल्हापुर, मदिकेरी, राजगीर, शिवसागर, श्रीनगर आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 104 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, छपरा, चित्तूर, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कानपुर, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, लातूर, महाड, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 110 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अगरतला, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बालासोर, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, दिल्ली, देवास, दुर्गापुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कैथल, करौली, करनाल, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मालेगांव, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नलबाड़ी, नारनौल, नोएडा, पाली, पंचगांव, पानीपत, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुदुचेरी, रायबरेली, रायरंगपुर, राजकोट, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, रूपनगर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, टेन्सा, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, वातवा, विशाखापत्तनम, यादगीर, यमुना नगर, शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 14 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अंगुल, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारबिल, भिवाड़ी, ब्यासनगर, चरखी दादरी, धारूहेड़ा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, शिलांग, वडोदरा शामिल हैं। वहीं कटक में स्थिति बेहद खराब है, जहां एक्यूआई 302 तक पहुंच गया है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 236 में से महज 7 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 104 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 01 मार्च को यह आंकड़ा 99 दर्ज किया गया था।

110 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज कटक में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 302 पर पहुंच गया। इससे पहले कल कटक में एक्यूआई 281 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 21 अंकों का इजाफा हुआ है।        

गौरतलब है कि कल देश में चरखी दादरी की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 296 दर्ज किया गया था। हालांकि आज पांच अंकों के सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 291 पर पहुंच गया। मतलब कि चरखी दादरी में वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है। 

दिल्ली में कल से प्रदूषण में मामूली इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 191 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 193 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में दो अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 200 फीसदी अधिक खराब है।         

दूसरी तरफ फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में कल जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 193 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 192 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।       

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 02 मार्च को धारूहेड़ा चौथे स्थान पर है, वहीं चरखी दादरी (291) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (270) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 143, गाजियाबाद में 190, गुवाहाटी में 95, गुरूग्राम में 240, नोएडा में 165, ग्रेटर नोएडा में 212 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 64 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 131, चेन्नई में 114, चंडीगढ़ में 92, हैदराबाद में 91, जयपुर में 146 और पटना में 126 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन सात शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें भिलाई, धुले, कोल्हापुर, मदिकेरी, राजगीर, शिवसागर, श्रीनगर शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, भागलपुर, भिवंडी, भिवानी, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, छपरा, चित्तूर, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कानपुर, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, लातूर, महाड, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंपोर, परभनी, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, ऋषिकेश, सागर, सांगली, सासाराम, सतना, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन आदि 104 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

चरखी दादरी सबसे प्रदूषित, श्रीनगर सबसे साफ: क्या कहते हैं वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़े

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