

01 मार्च 2026 को जारी 232 शहरों के वायु गुणवत्ता आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि देश की हवा अब भी गंभीर संकट में है।
महज 4.7 फीसदी शहरों में हवा ‘बेहतर’ रही, जबकि 52.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
हरियाणा का चरखी दादरी देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 296 दर्ज किया गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है। इसके उलट श्रीनगर में एक्यूआई 30 के साथ सबसे साफ हवा दर्ज की गई।
दिल्ली और फरीदाबाद में भले ही 24 घंटों में कुछ सुधार हुआ हो, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर तस्वीर अब भी चिंताजनक है। आंकड़े यह संकेत देते हैं कि प्रदूषण में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश के ज्यादातर शहरों में सांस लेना अभी भी जोखिम भरा बना हुआ है।
विश्लेषण के मुताबिक 01 मार्च 2026 को देश में चरखी दादरी सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 296 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 28 फरवरी को चरखी दादरी में एक्यूआई 289 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 7 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि चरखी दादरी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
चरखी दादरी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 30 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर चरखी दादरी की तुलना श्रीनगर से करें तो वहां स्थिति नौ गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 248 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 191 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 57 अंकों का भारी सुधार दर्ज किया गया। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 200 फीसदी अधिक खराब है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में कल जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 208 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 193 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 01 मार्च 2026 को 232 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 4.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 42.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 52.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 22.2 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 20.2 फीसदी की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 32.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। वहीं खराब गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में करीब 40 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में कटक (281) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (269) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 245 अंकों के साथ धारूहेड़ा चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम-मंडी गोबिंदगढ़ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 238 और 235 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
अंगुल (234) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में ब्यासनगर (230), ग्रेटर नोएडा (218), गुम्मिडीपूंडी (212) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (चरखी दादरी, बल्लभगढ़, धारूहेड़ा, गुरुग्राम) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, धारूहेड़ा, मंडी गोबिंदगढ़, गुम्मिडीपूंडी, हाजीपुर, रायबरेली, पंचगांव, तुमडीह, मानेसर, बर्नीहाट, हापुड़, कुरुक्षेत्र, अगरतला, जींद, समस्तीपुर, नलबाड़ी, वडोदरा, आसनसोल, मुंगेर, यमुना नगर, चिक्काबल्लापुर, रूपनगर, पुदुचेरी, अररिया, तिरुमाला, मोतिहारी, भिवानी, मुजफ्फरपुर, मंडीदीप, खन्ना, करनाल, मुरादाबाद आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बल्लभगढ़, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, बिलीपाड़ा, फरीदाबाद, तालचेर, भिवाड़ी, सिंगरौली, बुलंदशहर, नोएडा, सीकर, सवाई माधोपुर, दुर्गापुर, विशाखापत्तनम, कटनी, लखनऊ, झुंझुनू, क्योंझर, टोंक, वातवा, बद्दी, ब्रजराजनगर, हनुमानगढ़, खुर्जा, चूरू, कुंजेमुरा, बागपत, जयपुर, मेरठ, पटना, गांधीनगर, रामनगर, अलवर, मंगुराहा, पाली, जैसलमेर, अहमदाबाद, मुजफ्फरनगर, सहरसा, बीकानेर, भीलवाड़ा, ग्वालियर, चंद्रपुर, चेन्नई, नागपुर, पेरुंदुरई, उदयपुर, नागौर, अजमेर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 4.7 फीसदी यानी महज 11 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, धुले, कोल्हापुर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, पलवल, परभणी, राजगीर, सांगली, शिवसागर, श्रीनगर आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 99 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें भोपाल, बोइसर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलना, जालोर, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, कटिहार, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, लातूर, लुधियाना, महाड, मंडीखेड़ा, मुंबई, मैसूर, नागांव, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 110 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन अगरतला, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बालासोर, बारबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बेंगलुरु, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, दिल्ली, देवास, दुर्गापुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कैथल, कानपुर, करनाल, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडीदीप, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नोएडा, पाली, पंचगांव, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुदुचेरी, रायबरेली, रायरंगपुर, राजकोट, रामनगर, राउरकेला, रूपनगर, सहरसा, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, तिरुमाला, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, वडोदरा, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 12 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अंगुल, बल्लभगढ़, ब्यासनगर, चरखी दादरी, कटक, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, मंडी गोबिंदगढ़, मिलुपारा शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 232 में से महज 11 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 99 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 28 फरवरी को यह आंकड़ा 124 दर्ज किया गया था।
110 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज चरखी दादरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 296 पर पहुंच गया। इससे पहले कल चरखी दादरी में एक्यूआई 289 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 7 अंकों का इजाफा हुआ है।
गौरतलब है कि कल देश में ग्रेटर नोएडा की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 312 दर्ज किया गया था। आज 94 अंकों के सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 218 पर पहुंच गया। मतलब कि ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 248 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 191 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 57 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 200 फीसदी अधिक खराब है।
दूसरी तरफ फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में कल जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 208 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 193 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 01 मार्च को धारूहेड़ा चौथे स्थान पर है, वहीं कटक (281) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (269) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 118, गाजियाबाद में 202, गुवाहाटी में 102, गुरूग्राम में 238, नोएडा में 169, ग्रेटर नोएडा में 218 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 64 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 149, चेन्नई में 116, चंडीगढ़ में 91, हैदराबाद में 84, जयपुर में 131 और पटना में 130 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 11 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें भिलाई, धुले, कोल्हापुर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, पलवल, परभणी, राजगीर, सांगली, शिवसागर, श्रीनगर शामिल हैं।
वहीं आगरा, आइजोल, अकोला, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेतिया, भागलपुर, भावनगर, भिवंडी, भोपाल, बोइसर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलना, जालोर, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, कटिहार, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, लातूर, लुधियाना, महाड, मंडीखेड़ा, मुंबई, मैसूर, नागांव, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, सासाराम, सतना, शिलांग, सिलचर, सिरोही, सिवान, सोलापुर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, उज्जैन, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 99 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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ग्रेटर नोएडा में बढ़ते प्रदूषण से स्थिति बेहद खराब, दिल्ली में भी 250 के करीब पहुंचा एक्यूआई