

रिपोर्ट 02 जुलाई 2026 की देशव्यापी हवा की तस्वीर में एक तीखा विरोधाभास सामने लाती है। 246 शहरों के सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि देश के करीब 37 फीसदी शहरों में हवा साफ और लगभग आधे शहरों में संतोषजनक रही, वहीं दूसरी तरफ हरियाणा का सोनीपत एक बार फिर प्रदूषण के सबसे खतरनाक चेहरे के रूप में उभरा।
यहां एक्यूआई 344 तक पहुंच गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है और एक ही दिन में 68 अंकों की छलांग दर्ज करता है। सबसे चिंता की बात यह है कि सोनीपत की हवा में ओजोन का दबदबा है, जो लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल सकता है।
रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि जहां सोनीपत, धौलपुर, पानीपत, धनबाद और हरियाणा के कई शहर प्रदूषण की मार झेल रहे हैं, वहीं मदिकेरी जैसे शहर राहत की तस्वीर पेश कर रहे हैं, जहां एक्यूआई महज 14 दर्ज किया गया।
राजधानी दिल्ली और फरीदाबाद के लिए कुछ राहत जरूर दिखी है—दिल्ली का एक्यूआई 132 से घटकर 96 और फरीदाबाद का 135 से 126 पर आ गया।
कुल मिलाकर, देश में हवा की स्थिति में हल्का सुधार दिख रहा है, लेकिन सोनीपत और उत्तर भारत के कई शहरों में बढ़ता ओजोन, पीएम10 और पीएम2.5 यह चेतावनी दे रहे हैं कि प्रदूषण का संकट अभी टला नहीं है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 02 जुलाई 2026 को देश में एक बार फिर सोनीपत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 344 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। कल सोनीपत में एक्यूआई 276 दर्ज किया गया था। इसका मतलब है कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 68 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि सोनीपत की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
सोनीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 470 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सोनीपत की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 24.5 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 132 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 96 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 36 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक हो गई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 135 दर्ज किया गया था, जो आज 126 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 9 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 02 जुलाई 2026 को 246 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 37 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 13.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 13.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी कल से 5.2 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। दूसरी तरह मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 26.8 फीसदी की कमी आई है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती में 71.4 फीसदी की गिरावट रिकॉर्ड की गई, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में धौलपुर (241) दूसरे जबकि पानीपत (238) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह धनबाद (181) चौथे स्थान पर है। सुआकाती (180) – बक्सर (174) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
करनाल (164) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बल्लभगढ़ (153), सिलीगुड़ी (151) और नारनौल (145) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (सोनीपत, पानीपत, करनाल, बल्लभगढ़, नारनौल) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बक्सर, करनाल, बल्लभगढ़, नारनौल, भिवानी, गुरुग्राम, मानेसर, खोरा, राजगीर, फरीदाबाद, बर्नीहाट (मेघालय), आगरा, बहादुरगढ़, अनंतपुर, यमुना नगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं धौलपुर, पानीपत, धनबाद, चूरू, भिवाड़ी, बीकानेर, फतेहाबाद, मंडी गोबिंदगढ़, वातवा, गाजियाबाद, सीकर, बद्दी आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 37 फीसदी यानी 91 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भोपाल, बिलासपुर, बोईसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, चामराजनगर, चंद्रपुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, गुवाहाटी, हल्दिया, हिंगोली, हुबली, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, क्योंझर, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मंडीदीप, मैंगलोर, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 122 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अमृतसर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, बागपत, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जलना, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडपा, कल्याण, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोल्लम, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नंदेसरी आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 30 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें आगरा, अनंतपुर, बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बक्सर, बर्नीहाट (मेघालय), चूरू, धनबाद, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, गुरुग्राम, करनाल, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मोदीनगर, नारनौल, नोएडा, राजगीर, सीकर, सिलीगुड़ी, सुआकाती, तालचेर, वातवा, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह धौलपुर (241) और पानीपत (238) में स्थिति खराब, जबकि एक बार फिर सोनीपत (344) में बेहद खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 246 में से 91 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 122 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 01 जुलाई को यह आंकड़ा 116 दर्ज किया गया था।
30 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर सोनीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 344 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल सोनीपत में एक्यूआई 276 दर्ज किया गया था। मतलब की कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 68 अंकों की भारी बढ़ोतरी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 132 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 96 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 36 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक हो गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 135 दर्ज किया गया था, जो आज 126 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 9 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 02 जुलाई को धनबाद (181) चौथे स्थान पर है, वहीं धौलपुर (241) दूसरे, जबकि पानीपत (238) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 61, गाजियाबाद में 103, गुवाहाटी में 45, गुरूग्राम में 139, नोएडा में 117, ग्रेटर नोएडा में 93 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 34 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 67, चेन्नई में 60, चंडीगढ़ में 51, हैदराबाद में 55, जयपुर में 68 और पटना में 60 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 91 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बरबिल, बरेली, बैरकपुर, बीड, बेलापुर, भागलपुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, बिलासपुर, बोईसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, चामराजनगर, चंद्रपुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, गुवाहाटी, हल्दिया, हिंगोली, हुबली, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, क्योंझर, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मंडीदीप, मैंगलोर, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, शिलांग, सिलचर, सोलापुर, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तुमडीह, उलहासनगर, वाराणसी, विजयपुरा, विरार, वृंदावन, यादगीर शामिल हैं।
वहीं अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, बागपत, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जलना, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडपा, कल्याण, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोल्लम, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नेल्लोर, पाली, पलवल, पंचगांव, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजसमंद, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, समस्तीपुर, सांगली, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सिंगरौली, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, श्रीगंगानगर, सूरत, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम आदि 122 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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