भारत के 241 शहरों में 12.8 फीसदी की हवा साफ, 38 फीसदी में स्थिति चिंताजनक

29 अप्रैल 2026 को एक बार फिर देश में कैथल सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 334 दर्ज किया गया, हालांकि कल से वहां प्रदूषण में 36 अंकों का सुधार आया है
फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • मौसम में बदलाव के साथ देश में प्रदूषण में कुछ गिरावट जरूर दिखी है, लेकिन तस्वीर अब भी पूरी तरह आश्वस्त करने वाली नहीं है।

  • 29 अप्रैल 2026 को 241 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से महज 12.9 फीसदी में ही हवा ‘साफ’ है, जबकि 38.6 फीसदी शहर अब भी प्रदूषण की चपेट में हैं।

  • हरियाणा का कैथल एक बार फिर 334 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, हालांकि इसमें पिछले दिन के मुकाबले सुधार जरूर दर्ज हुआ है, लेकिन स्थिति अब भी ‘बेहद खराब’ बनी हुई है और प्रदूषण स्तर सुरक्षित सीमा से कई गुणा अधिक है।

  • दिल्ली में 24 घंटों में 56 अंकों की गिरावट के साथ कुछ राहत मिली और हवा ‘खराब’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में पहुंच गई, लेकिन यह सुधार अस्थाई माना जा रहा है।

  • इसके उलट फरीदाबाद जैसे शहरों में प्रदूषण बढ़ा है। दिलचस्प रूप से, मिजोरम का आइजोल 14 एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा, जो कैथल की तुलना में करीब 24 गुणा बेहतर है।

  • कुल मिलाकर, साफ और संतोषजनक हवा वाले शहरों की संख्या बढ़ी है, लेकिन देश के बड़े हिस्से में पीएम2.5 और पीएम10 जैसे खतरनाक कण अब भी हावी हैं, यह संकेत है कि राहत के बावजूद प्रदूषण का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 29 अप्रैल 2026 को एक बार फिर देश में कैथल सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 334 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल कैथल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 370 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 36 अंकों का सुधार आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि कैथल की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

कैथल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर कैथल की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 23.8 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 239 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 183 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 56 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 123 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 157 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 29 अप्रैल 2026 को 241 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 12.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 48.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 38.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 47.6 फीसदी का उछाल आया है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 0.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 15.5 फीसदी की वृद्धि हुई है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 65.4 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में भिवानी (305) दूसरे जबकि नारनौल (268) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बल्लभगढ़ (246) चौथे स्थान पर है। बाड़मेर-ग्रेटर नोएडा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 231 और 226 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

अंगुल (217) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बक्सर (215), भिवाड़ी (212) और छपरा (207) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (कैथल, भिवानी, नारनौल, बल्लभगढ़) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि कैथल, भिवानी, नारनौल, बक्सर, छपरा, पंचगांव, गाजियाबाद, गुरुग्राम, ग्वालियर, करनाल, जोधपुर, लखनऊ, धारूहेड़ा, फतेहाबाद, रायबरेली, फरीदाबाद, सोनीपत, जींद, आगरा, बर्नीहाट (असम), जयपुर, वातवा, कोटा, वाराणसी, कानपुर, चिक्काबल्लापुर, नंदेसरी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बल्लभगढ़, बाड़मेर, ग्रेटर नोएडा, भिवाड़ी, नोएडा, कुरुक्षेत्र, सवाई माधोपुर, मेरठ, टोंक, श्री गंगानगर, बुलंदशहर, पानीपत, बीकानेर, हापुड़, मुजफ्फरनगर, जैसलमेर, करौली, बिलाईपाड़ा, धौलपुर, चरखी दादरी, झुंझुनू, पीथमपुर, सीकर, हनुमानगढ़, बारां, दौसा, फिरोजाबाद, मिलुपारा, नागौर, पाली, बारबिल, तालचेर, खुर्जा, अलवर, मेहसाणा, अजमेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बूंदी, चूरू, गया, वृंदावन, जालोर, गुम्मिडीपूंडी, कटनी, विशाखापत्तनम, बांसवाड़ा, झालावाड़, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, प्रयागराज, उज्जैन, अहमदाबाद आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

देश के 12.9 फीसदी यानी महज 31 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, चामराजनगर, चेन्नई, कुड्डालोर, गुवाहाटी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, मदिकेरी, मोतिहारी, नागांव, नाहरलागुन, नेल्लोर, पुदुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, रूपनगर, सहरसा, सांगली, सिलचर शामिल हैं।

इसी तरह देश के 117 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बरेली, बारीपाड़ा, बठिंडा, बेगूसराय, बेलगाम, भागलपुर, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, ब्रजराजनगर, चंडीगढ़, कोयंबटूर, कटक, दमोह, देहरादून, देवास, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गोरखपुर, गुंटूर, हाजीपुर, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, कोल्हापुर, कोल्लम, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़ आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 82 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, दिल्ली, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मुजफ्फरनगर, नागौर, नंदेसरी, नोएडा, पाली, पानीपत, पटियाला, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायबरेली, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, तालचेर, ठाणे, टोंक, उज्जैन, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में अंगुल, बल्लभगढ़, बाड़मेर, भिवाड़ी, बक्सर, छपरा, ग्रेटर नोएडा, नारनौल, पंचगांव में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं देश में कैथल (334), भिवानी (305) में स्थिति बेहद खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 241 में से महज 31 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 117 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 28 अप्रैल को यह आंकड़ा 116 दर्ज किया गया था।

82 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर कैथल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 334 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल कैथल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 370 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 36 अंकों का सुधार हुआ है। हालांकि इसके बावजूद वायु गुणवत्ता आज भी बेहद खराब बनी हुई है।      

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 239 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 183 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 56 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 123 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 157 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 29 अप्रैल को बल्लभगढ़ चौथे स्थान पर है, वहीं भिवानी (305) दूसरे, जबकि नारनौल (268) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 176, गाजियाबाद में 199, गुवाहाटी में 48, गुरूग्राम में 186, नोएडा में 192, ग्रेटर नोएडा में 226 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 72 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 168, चेन्नई में 44, चंडीगढ़ में 78, हैदराबाद में 70, जयपुर में 140 और पटना में 86 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 31 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अररिया, बैरकपुर, भिलाई, चामराजनगर, चेन्नई, कुड्डालोर, गुवाहाटी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, मदिकेरी, मोतिहारी, नागांव, नाहरलागुन, नेल्लोर, पुदुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, रूपनगर, सहरसा, सांगली, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अहमदनगर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बरेली, बारीपाड़ा, बठिंडा, बेगूसराय, बेलगाम, भागलपुर, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, ब्रजराजनगर, चंडीगढ़, कोयंबटूर, कटक, दमोह, देहरादून, देवास, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गोरखपुर, गुंटूर, हाजीपुर, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, कोल्हापुर, कोल्लम, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, परभनी, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिवान, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा, विरार, यादगीर आदि 117 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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