

27 जनवरी 2026 को देश में गाजियाबाद की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 376 दर्ज किया गया।
रुझानों में सामने आया है कि गाजियाबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
दूसरी तरफ देश में दावनगेरे की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 26 रिकॉर्ड किया गया।
दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में अच्छा खासा इजाफा हुआ है, इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 241 दर्ज किया गया था, जो आज 27 जनवरी को 95 अंकों के भारी उछाल के साथ बढ़कर 336 पर पहुंच गया है।
27 जनवरी 2026 को 238 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 7.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 31.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 61.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 191 (+17) रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में दिल्ली (336) दूसरे जबकि सिंगरौली (335) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 331 अंकों के साथ नोएडा चौथे स्थान पर है। धारूहेड़ा-अंगुल में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 315 और 307 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
गुरुग्राम (306) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मंडीदीप (306), ग्रेटर नोएडा (304) और भिवाड़ी (288) भी शामिल हैं।
विश्लेषण से पता चला है कि 27 जनवरी 2026 को देश में गाजियाबाद की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 376 दर्ज किया गया। इससे पहले 26 जनवरी को गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 302 दर्ज किया गया। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 74 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। हालांकि गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब बनी हुई है।
रुझानों में सामने आया है कि गाजियाबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
गाजियाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,400 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में दावनगेरे की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 26 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में गाजियाबाद की तुलना दावनगेरे से करें तो वहां स्थिति 14 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में उज्जैन की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 454 दर्ज किया गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में उज्जैन का जिक्र नहीं है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में अच्छा खासा इजाफा हुआ है, इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 241 दर्ज किया गया था, जो आज 27 जनवरी को 95 अंकों के भारी उछाल के साथ बढ़कर 336 पर पहुंच गया है।
इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 27 जनवरी 2026 को 238 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 7.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 31.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 61.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 29.2 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 11.9 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 10.7 फीसदी की कमी आई है। दूसरी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 52.6 फीसदी की वृद्धि हुई है। बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में भी कल से 125 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 191 (+17) रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में दिल्ली (336) दूसरे जबकि सिंगरौली (335) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 331 अंकों के साथ नोएडा चौथे स्थान पर है। धारूहेड़ा-अंगुल में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 315 और 307 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
गुरुग्राम (306) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मंडीदीप (306), ग्रेटर नोएडा (304) और भिवाड़ी (288) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन शहर (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा) और मध्य प्रदेश के दो शहर (सिंगरौली, मंडीदीप) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गाजियाबाद, दिल्ली, सिंगरौली, नोएडा, धारूहेड़ा, गुरुग्राम, मंडीदीप, ग्रेटर नोएडा, भिवाड़ी, नारनौल, मुजफ्फरनगर, ब्यासनगर, मेरठ, सुआकाती, बिलीपाड़ा, मानेसर, डूंगरपुर, भिवानी, हापुड़, बूंदी, उदयपुर, बद्दी, टोंक, अमरावती (आंध्रप्रदेश) , राजसमंद, बागपत, चूरू, बारां, सीकर, भोपाल, वातवा, बुलंदशहर, तालचेर, प्रतापगढ़, बहादुरगढ़, भीलवाड़ा, हाजीपुर, करनाल, नागपुर, उल्हासनगर, झालावाड़, पाली, पंचकुला, रोहतक, ग्वालियर, जैसलमेर, बारबिल, बिलासपुर, मंडीखेड़ा, भरतपुर, देवास, बर्नीहाट, जींद, गुम्मिडीपूंडी, यमुना नगर, सोनीपत, नलबाड़ी, आसनसोल, चंडीगढ़, हल्दिया, कुरुक्षेत्र आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बल्लभगढ़, बालासोर, गया, कोटा, विशाखापत्तनम, फरीदाबाद, गांधीनगर, धनबाद, झुंझुनू, रतलाम, गुवाहाटी, राउरकेला, ब्रजराजनगर, जालौर, अहमदाबाद, हावड़ा, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, कुंजेमुरा, आगरा, अंकलेश्वर, नागौर, पीथमपुर, हनुमानगढ़, अजमेर, अलवर, चंद्रपुर, सवाई माधोपुर, खुर्जा, नांदेड़, सिलीगुड़ी, बांसवाड़ा, मुरादाबाद, लखनऊ, सागर, बाड़मेर, मालेगांव, प्रयागराज, कल्याण, वाराणसी, पानीपत, राजमहेंद्रवरम, भिवंडी, इंदौर, जोधपुर, कानपुर, सहरसा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), दुर्गापुर, करौली, पलवल, मिलुपारा, पुणे, ठाणे, अमृतसर, पटना, श्री गंगानगर, जलगांव, कैथल, अमरावती (महाराष्ट्र), महाड, मीरा-भायंदर, मुंबई, धुले, मंगुराहा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 7.1 फीसदी यानी महज 17 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, बेलगाम, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दावनगेरे, कोल्लम, मदिकेरी, मदुरई, मैसूरु, पेरुंदुरई, रामनगर, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, तंजावुर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 75 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें कोयंबटूर, दौसा, धारवाड़, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जालंधर, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मोतिहारी, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचगांव, परभनी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, पुदुचेरी, पुदुकोट्टई , पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, ऋषिकेश, रूपनगर, सांगली, सतना, सिलचर, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सूरत, तिरुमाला, तिरुपति, तुमकुरु, विजयपुरा आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 108 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बेलापुर, बेतिया, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, बीकानेर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, चित्तौड़गढ़, देहरादून, देवास, धनबाद, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालौर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कैथल, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, महाड, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, पाली, पलवल, पंचकुला, पानीपत, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, राजमहेंद्रवरम, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सोनीपत, श्री गंगानगर, तालचेर, ठाणे, उल्हासनगर, वाराणसी, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 29 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अमरावती (आंध्रप्रदेश) , बद्दी, बागपत, बालासोर, बल्लभगढ़, बारां, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, बूंदी, ब्यासनगर, चूरू, कटक, डूंगरपुर, गया, हापुड़, कोटा, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, राजसमंद, सीकर, सुआकाती, टोंक, उदयपुर, वातवा शामिल हैं। वहीं अंगुल, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मंडीदीप, नोएडा, सिंगरौली में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 238 में से महज 17 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 75 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 26 जनवरी 2026 को यह आंकड़ा 67 दर्ज किया गया था।
108 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज गाजियाबाद (376) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां कल से प्रदूषण में भारी इजाफा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक गाजियाबाद में कल से एक्यूआई में 74 अंकों का उछाल आया है। हालांकि वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब बनी हुई है। बता दें कल गाजियाबाद में एक्यूआई 302 दर्ज किया गया था।
इससे पहले कल देश में उज्जैन की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 454 तक पहुंच गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में उज्जैन का जिक्र नहीं है।
दिल्ली में आज प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 241 दर्ज किया गया, जो आज बढ़कर 336 पर पहुंच गया है। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 95 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 2,100 फीसदी अधिक खराब है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है, जहां सूचकांक 191 (+17) रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 27 जनवरी को नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं दिल्ली (336) दूसरे, जबकि सिंगरौली (335) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 165, गाजियाबाद में 376, गुवाहाटी में 166, गुरूग्राम में 306, नोएडा में 331, ग्रेटर नोएडा में 304 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 102 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 126, चेन्नई में 75, चंडीगढ़ में 146, हैदराबाद में 80, जयपुर में 147 और पटना में 107 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 17 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, बेलगाम, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दावनगेरे, कोल्लम, मदिकेरी, मदुरई, मैसूरु, पेरुंदुरई, रामनगर, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, तंजावुर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी शामिल हैं।
वहीं अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अंबाला, अनंतपुर, अररिया, आरा, बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बक्सर, चेन्नई, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, धारवाड़, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जालंधर, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मोतिहारी, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचगांव, परभनी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, पुदुचेरी, पुदुकोट्टई , पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, ऋषिकेश, रूपनगर, सांगली, सतना, सिलचर, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सूरत, तिरुमाला, तिरुपति, तुमकुरु, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 75 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
प्रदूषण की मार: उज्जैन बना देश का सबसे जहरीला शहर, बढ़कर 454 पर पहुंचा एक्यूआई