सुधार के बावजूद देश में रायबरेली की हवा सबसे खराब, दिल्ली-फरीदाबाद में भी बढ़ा प्रदूषण

आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (रायबरेली, खोरा, ग्रेटर नोएडा, मेरठ और नोएडा) शामिल हैं।
देश के कई शहरों  में वायु गुणवत्ता न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों के लिए भी सुरक्षित नहीं है; फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई)
देश के कई शहरों में वायु गुणवत्ता न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों के लिए भी सुरक्षित नहीं है; फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई)
Published on
सारांश
  • देश की वायु गुणवत्ता में समग्र रूप से सुधार के संकेत मिलने के बावजूद प्रदूषण का खतरा पूरी तरह टला नहीं है।

  • 27 जुलाई 2026 को रायबरेली एक बार फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। हालांकि वहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 500 से घटकर 276 पर आ गया, फिर भी यह 'खराब' श्रेणी में बना हुआ है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब छह गुना अधिक प्रदूषित है।

  • चिंता की बात यह भी है कि देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर शामिल रहे, जबकि दिल्ली और फरीदाबाद में भी पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदूषण बढ़ने से दोनों शहर 'मध्यम' श्रेणी में पहुंच गए।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 246 शहरों के आंकड़ों के अनुसार, करीब 90 प्रतिशत शहरों में हवा 'बेहतर' या 'संतोषजनक' रही, लेकिन मध्यम और खराब श्रेणी वाले शहरों की संख्या में बढ़ोतरी भविष्य के लिए चेतावनी है।

  • विश्लेषण से यह भी सामने आया कि कई शहरों में पीएम10 और पीएम2.5 जैसे महीन कण प्रदूषण की मुख्य वजह बने हुए हैं। यह स्थिति बताती है कि प्रदूषण में रोजाना उतार-चढ़ाव के बावजूद स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर और प्रभावी नियंत्रण उपायों की आवश्यकता बनी हुई है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 27 जुलाई 2026 को देश में एक बार फिर रायबरेली सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 276 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल (26 जुलाई) को रायबरेली में एक्यूआई 500 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 224 अंकों का भारी सुधार आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि रायबरेली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

रायबरेली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से छह गुणा अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहरों रायबरेली की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 21.2 गुणा खराब है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 80 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 101 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 21 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 26 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 90 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 111 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 21 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।   

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 27 जुलाई 2026 को 246 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 39.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 50.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 9.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 11.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों में 9.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 29.4 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।   

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में रूपनगर (273) दूसरे जबकि खोरा (198) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बर्नीहाट (मेघालय) (192) चौथे स्थान पर है। पानीपत (187) – फतेहाबाद (185) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

ग्रेटर नोएडा (155) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मेरठ (150), मंडी गोबिंदगढ़ (136) और नोएडा (129) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (रायबरेली, खोरा, ग्रेटर नोएडा, मेरठ और नोएडा) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि रूपनगर, खोरा, बर्नीहाट (मेघालय), मेरठ, बहादुरगढ़, मुजफ्फरनगर, सोनीपत आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं रायबरेली, पानीपत, फतेहाबाद, ग्रेटर नोएडा, मंडी गोबिंदगढ़, नोएडा, गाजियाबाद, बांसवाड़ा, बागपत, फरीदाबाद, पाली, बुलंदशहर, सिवान, बल्लभगढ़, दिल्ली आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 39.8 फीसदी यानी 98 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बारबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बीड, बेलापुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तौड़गढ़, चूरू, कुड्डालोर, देहरादून, धौलपुर, दुर्गापुर, फतेहपुर सिकरी, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, जलना, जालौर, करौली, कारवार, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाद, मैंगलोर, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नाहरलागुन, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 124 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चरखी दादरी, चेन्नई, छपरा, चित्तूर, कटक, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कानपुर, करनाल, काशीपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नारनौल, नेल्लोर, पलवल, पटना आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 22 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बुलंदशहर, बर्नीहाट (मेघालय), दिल्ली, धनबाद, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पाली, पानीपत, सिलीगुड़ी, सिवान, सोनीपत आदि शामिल हैं। वहीं रायबरेली (276), रूपनगर (273) में स्थिति खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 246 में से 98 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 124 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 26 जुलाई को यह आंकड़ा 113 दर्ज किया गया था।

22 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर रायबरेली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 276 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (26 जुलाई) को रायबरेली में एक्यूआई 500 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 224 अंकों का भारी सुधार आया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 80 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 101 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 21 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।     

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 90 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 111 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 21 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 27 जुलाई को बर्नीहाट (मेघालय) (192) चौथे स्थान पर है, वहीं रूपनगर (273) दूसरे, जबकि खोरा (198) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 49, गाजियाबाद में 119, गुवाहाटी में 45, गुरूग्राम में 96, नोएडा में 129, ग्रेटर नोएडा में 155 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 61 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 84, चेन्नई में 68, चंडीगढ़ में 52, हैदराबाद में 39, जयपुर में 65 और पटना में 71 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 98 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बारबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बीड, बेलापुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तौड़गढ़, चूरू, कुड्डालोर, देहरादून, धौलपुर, दुर्गापुर, फतेहपुर सिकरी, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, जलना, जालौर, करौली, कारवार, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाद, मैंगलोर, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नाहरलागुन, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, ऋषिकेश, रोहतक, सतारा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलचर, सिरोही, सोलापुर, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वापी, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आरा, बद्दी, बागलकोट, बालासोर, बारां, बठिंडा, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चरखी दादरी, चेन्नई, छपरा, चित्तूर, कटक, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कानपुर, करनाल, काशीपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नारनौल, नेल्लोर, पलवल, पटना, पीथमपुर, पुणे, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, सहरसा, समस्तीपुर, सतना, शामली, सिंगरौली, सिरसा, शिवसागर, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, टोंक, तुमकुरु, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यमुना नगर आदि 124 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं  

Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in