वायु गुणवत्ता में सुधार के बावजूद देश का सबसे प्रदूषित शहर बना पानीपत, 218 पर पहुंचा एक्यूआई

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया।
देश के कई शहरों  में वायु गुणवत्ता न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों के लिए भी सुरक्षित नहीं है; फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई)
देश के कई शहरों में वायु गुणवत्ता न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों के लिए भी सुरक्षित नहीं है; फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई)
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सारांश
  • 03 जुलाई 2026 के सरकारी आंकड़े देश में हवा की दो बिल्कुल अलग तस्वीरें सामने रखते हैं। एक तरफ पानीपत 218 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बना रहा। अच्छी बात यह है कि वहां प्रदूषण में एक दिन पहले के मुकाबले 20 अंकों की कमी आई, लेकिन हवा अब भी ‘खराब’ श्रेणी में है और पीएम10 का दबदबा इसे लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बना रहा है।

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 380 फीसदी अधिक प्रदूषण यह बताने के लिए काफी है कि राहत अभी बहुत दूर है। इसके उलट आइजोल की हवा सबसे साफ रही, जहां एक्यूआई महज 15 दर्ज किया गया। यानी पानीपत की हवा आइजोल के मुकाबले करीब 14.5 गुणा ज्यादा खराब रही।

  • कुल 243 शहरों के विश्लेषण से यह भी साफ हुआ कि देश में हवा की तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है।

  • 37.4 फीसदी शहरों में हवा ‘बेहतर’ और 49 फीसदी में ‘संतोषजनक’ रही, लेकिन 13.6 फीसदी शहर अब भी मध्यम से खराब श्रेणी में फंसे हैं।

  • करनाल, फतेहाबाद, गुरुग्राम, रूपनगर और चरखी दादरी जैसे शहर प्रदूषण की मार झेल रहे हैं, जबकि शीर्ष 10 प्रदूषित शहरों में हरियाणा के सात शहर शामिल होना सबसे बड़ी चेतावनी है।

  • दिल्ली और फरीदाबाद में भी 24 घंटों में प्रदूषण बढ़ा है, जो बताता है कि मानसून के बीच भी हवा का संकट अभी थमा नहीं, बल्कि उतार-चढ़ाव के साथ लगातार बना हुआ है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 03 जुलाई 2026 को देश में पानीपत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 218 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। कल पानीपत में एक्यूआई 238 दर्ज किया गया था। इसका मतलब है कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 20 अंकों का सुधार आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि पानीपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

पानीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 380 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पानीपत की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 14.5 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में सोनीपत की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 344 तक पहुंच गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में सोनीपत नदारद है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में मामूली बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 96 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 105 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 9 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज एक बार फिर वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 126 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 146 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 20 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 03 जुलाई 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 37.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 13.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। वहीं संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 2.5 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 3.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। खराब हवा वाले शहरों का हाल भी साफ हवा वाले शहरों जैसा ही है, जिनकी गिनती में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में करनाल (207) दूसरे जबकि फतेहाबाद-गुरुग्राम (194) तीसरे स्थान पर हैं। इसी तरह रूपनगर (189) चौथे स्थान पर है। खोरा (187)– चरखी दादरी (182) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

मानेसर सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में सिलीगुड़ी (170), बल्लभगढ़ (164) और सुआकाती (161) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के सात शहर (पानीपत, करनाल, फतेहाबाद, गुरुग्राम, चरखी दादरी, मानेसर और बल्लभगढ़) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि करनाल, गुरुग्राम, रूपनगर, खोरा, चरखी दादरी, मानेसर, भिवानी, फरीदाबाद, बहादुरगढ़, मुजफ्फरनगर, बर्नीहाट (मेघालय), गुम्मिडीपूंडी, धारूहेड़ा, आगरा, नारनौल, वातवा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं पानीपत, फतेहाबाद, बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, धनबाद, मंडी गोबिंदगढ़, बीकानेर, मंगुराहा, जालोर, बाड़मेर, राजकोट आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 37.4 फीसदी यानी 91 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में देहरादून, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गडग, गुवाहाटी, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, जबलपुर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कैथल, कलबुर्गी, कारवार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मालेगांव, मंडीदीप, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सांगली, सतारा, शिलांग, सिलचर, शिवसागर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 119 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चुरू, कुड्डालोर, दमोह, देवास, धारवाड़, धौलपुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गुंटूर, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करौली, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, महाद, मैहर, मंडीखेड़ा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नेल्लोर, नोएडा, पाली, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, राजसमंद, रोहतक, राउरकेला, समस्तीपुर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 31 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें आगरा, अमृतसर, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बाड़मेर, भिवानी, बिहार शरीफ, बीकानेर, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, दिल्ली, धनबाद, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, फतेहाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, जालोर, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मंगुराहा, मुजफ्फरनगर, नारनौल, राजकोट, रूपनगर, सिलीगुड़ी, सुआकाती, तालचेर, वातवा आदि शामिल हैं।

इसी तरह पानीपत (218), करनाल (207) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 243 में से 91 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 119 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 02 जुलाई को यह आंकड़ा 122 दर्ज किया गया था।

31 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज पानीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 218 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल पानीपत में एक्यूआई 238 दर्ज किया गया था। मतलब की कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 20 अंकों का सुधार आया है।    

इससे पहले कल देश में सोनीपत की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 344 तक पहुंच गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में सोनीपत नदारद है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में मामूली बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 96 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 105 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 9 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज एक बार फिर वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 126 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 146 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 20 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 03 जुलाई को रूपनगर (189) चौथे स्थान पर है, वहीं करनाल (207) दूसरे, जबकि फतेहाबाद-गुरुग्राम (194) तीसरे स्थान पर हैं। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 57, गाजियाबाद में 93, गुवाहाटी में 47, गुरूग्राम में 194, नोएडा में 100, ग्रेटर नोएडा में 148 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 38 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 58, चेन्नई में 58, चंडीगढ़ में 44, हैदराबाद में 51, जयपुर में 92 और पटना में 66 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 91 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बारबिल, बरेली, बैरकपुर, बीड, बेलापुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कामगलुरु, देहरादून, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गडग, गुवाहाटी, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, जबलपुर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कैथल, कलबुर्गी, कारवार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मालेगांव, मंडीदीप, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सांगली, सतारा, शिलांग, सिलचर, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, उलहासनगर, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, यादगीर शामिल हैं।

वहीं अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अंबाला, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, बद्दी, बागपत, बांसवाड़ा, बारां, बारीपाड़ा, बठिंडा, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चुरू, कुड्डालोर, दमोह, देवास, धारवाड़, धौलपुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गुंटूर, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करौली, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, महाद, मैहर, मंडीखेड़ा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नेल्लोर, नोएडा, पाली, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, राजसमंद, रोहतक, राउरकेला, समस्तीपुर, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सीकर, सिंगरौली, सिरोही, सिरसा, श्री गंगानगर, सूरत, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यमुना नगर आदि 119 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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