

दिल्ली में 2026 का सबसे साफ दिन दर्ज किया गया, जबकि सिंगरौली सबसे प्रदूषित शहर रहा।
सिंगरौली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 346 तक पहुंच गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2,200 फीसदी अधिक है। दूसरी ओर, दिल्ली में प्रदूषण में सुधार हुआ और वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में रही।
दूसरी तरफ देश में चिक्कमगलुरु की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 26 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में सिंगरौली की तुलना चिक्कमगलुरु से करें तो वहां स्थिति 13 गुणा खराब है।
25 जनवरी 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 7.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 31.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 60.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 134 (-72) रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में उज्जैन (338) दूसरे जबकि पीथमपुर (285) तीसरे स्थान पर है।
इसी तरह 283 अंकों के साथ अंगुल चौथे स्थान पर है। बिलीपाड़ा-कटक में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 259 और 245 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
भोपाल (242) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बल्लभगढ़ (239), मंडीदीप (229) और आसनसोल (226) भी शामिल हैं।
आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में मध्य प्रदेश के पांच शहर (सिंगरौली, उज्जैन, पीथमपुर, भोपाल, मंडीदीप) शामिल हैं।
विश्लेषण से पता चला है कि 25 जनवरी 2026 को देश में सिंगरौली की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 346 दर्ज किया गया। इससे पहले 24 जनवरी को सिंगरौली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 289 दर्ज किया गया। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 57 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही सिंगरौली में वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
रुझानों में सामने आया है कि सिंगरौली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
सिंगरौली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,200 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में चिक्कमगलुरु की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 26 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में सिंगरौली की तुलना चिक्कमगलुरु से करें तो वहां स्थिति 13 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में अंगुल की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 309 दर्ज किया गया था। हालांकि आज वहां 71 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 283 पर पहुंच गया है। मतलब वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' से खराब हो गई है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 192 दर्ज किया गया था, जो आज 25 जनवरी को 39 अंकों के भारी सुधार के साथ घटकर 153 पर पहुंच गया है।
इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 25 जनवरी 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 7.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 31.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 60.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 28.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 17 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 20.2 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। दूसरी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। वहीं बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 100 फीसदी का इजाफा हुआ है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 134 (-72) रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में उज्जैन (338) दूसरे जबकि पीथमपुर (285) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 283 अंकों के साथ अंगुल चौथे स्थान पर है। बिलीपाड़ा-कटक में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 259 और 245 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
भोपाल (242) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बल्लभगढ़ (239), मंडीदीप (229) और आसनसोल (226) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में ओडिशा के दो शहर (अंगुल, कटक) और मध्य प्रदेश के पांच शहर (सिंगरौली, उज्जैन, पीथमपुर, भोपाल, मंडीदीप) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सिंगरौली, पीथमपुर, बिलीपाड़ा, भोपाल, मंडीदीप, आसनसोल, अमरावती (आंधप्रदेश), श्री गंगानगर, भिवानी, मंडी गोबिंदगढ़, गुम्मिडीपूंडी, कोलकाता, देवास, गुरुग्राम, नाहरलागुन, नागपुर, बहादुरगढ़, जबलपुर, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, हावड़ा, बैरकपुर, हाजीपुर, भिवाड़ी, चंद्रपुर, पुणे, गाजियाबाद, सुआकाती, बिहार शरीफ, तालचेर, ब्रजराजनगर, चरखी दादरी, बारीपदा, नलबाड़ी, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), राउरकेला, पटना, राजगीर, सागर, नागांव, पूर्णिया, बर्नीहाट, हल्दिया, मुजफ्फरनगर, दुर्गापुर, बक्सर, मुंगेर, बारबिल, सिवान, सोनीपत, नारनौल, टोंक, फरीदाबाद, मानेसर, अहमदाबाद, तुमकुरु, इंदौर, पिंपरी-चिंचवाड़, मुजफ्फरपुर, कोटा, सोलापुर, लखनऊ, विशाखापत्तनम, राजमहेंद्रवरम, अररिया, जींद, बिलासपुर, बेतिया, धारूहेड़ा, कटिहार, नासिक, वाराणसी, यादगीर, रायपुर, परभनी, समस्तीपुर, क्योंझर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं उज्जैन, बल्लभगढ़, गया, छपरा, कुंजेमुरा, धनबाद, ग्रेटर नोएडा, बद्दी, सहरसा, तुमडीह, हनुमानगढ़, सीकर, औरंगाबाद (बिहार), बेलापुर, सवाई माधोपुर, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, अहमदनगर, चूरू, झालावाड़, झुंझुनू, रतलाम, उल्हासनगर, बेगूसराय, बदलापुर, बारां, बुलंदशहर, महाड, मेरठ, नोएडा, कल्याण, वातवा, अलवर, कुरुक्षेत्र, भिवंडी, गांधीनगर, अजमेर, फतेहाबाद, अंकलेश्वर, ग्वालियर, जालंधर, नागौर, पाली, यमुना नगर, उदयपुर, ठाणे, अकोला, नांदेड़, डूंगरपुर, जैसलमेर, खुर्जा, पानीपत, भागलपुर, जालोर, मालेगांव, मंगुराहा, बाड़मेर, कन्नूर, प्रतापगढ़, अमरावती (महाराष्ट्र), मुंबई आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 7.4 फीसदी यानी महज 18 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, दमोह, फिरोजाबाद, गंगटोक, मदिकेरी, मदुरै, पंचगांव, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रूपनगर, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, थूथुकुडी, वृंदावन आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 77 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, धुले, गोरखपुर, हापुड़, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जलगांव, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मंडीखेड़ा, मुरादाबाद, मैसूर, नवी मुंबई, पलवल, पटियाला, प्रयागराज, पुदुकोट्टई, रामनगर, रोहतक आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 131 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बहादुरगढ़, बालासोर, बारां, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेतिया, भागलपुर, भिवाड़ी, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, खुर्जा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, महाड, मालेगांव, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नोएडा, पाली, पानीपत, परभनी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, सुआकाती, तालचेर, ठाणे, टोंक, तुमकुरु, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वाराणसी, वातवा, शाखापत्तनम, यादगीर, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 14 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अमरावती (आंधप्रदेश), अंगुल, आसनसोल, बल्लभगढ़, भिवानी, भोपाल, बिलीपाड़ा, छपरा, कटक, गया, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, पीथमपुर, श्री गंगानगर शामिल हैं। वहीं सिंगरौली, उज्जैन में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 242 में से महज 18 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 77 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 24 जनवरी 2026 को यह आंकड़ा 93 दर्ज किया गया था।
131 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज सिंगरौली (346) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक सिंगरौली में 57 अंकों के उछाल के साथ वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। कल सिंगरौली में एक्यूआई 289 दर्ज किया गया था।
इससे पहले कल देश में अंगुल की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 309 दर्ज किया गया। हालांकि आज 71 अंकों के सुधार के साथ अंगुल में वायु गुणवत्ता बेहद खराब से 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में भी आज प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 192 दर्ज किया गया, जो आज घटकर 153 पर पहुंच गया है। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 39 अंकों की गिरावट आई है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 500 फीसदी अधिक खराब है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, जहां सूचकांक 134 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 25 जनवरी को अंगुल चौथे स्थान पर है, वहीं उज्जैन (338) दूसरे, जबकि पीथमपुर (285) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 114, गाजियाबाद में 173, गुवाहाटी में 183, गुरूग्राम में 198, नोएडा में 120, ग्रेटर नोएडा में 155 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 102 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 117, चेन्नई में 68, चंडीगढ़ में 71, हैदराबाद में 95, जयपुर में 147 और पटना में 148 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 18 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, दमोह, फिरोजाबाद, गंगटोक, मदिकेरी, मदुरै, पंचगांव, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रूपनगर, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, थूथुकुडी, वृंदावन शामिल हैं।
वहीं आगरा, आइजोल, अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, आरा, बागपत, बांसवाड़ा, बरेली, बठिंडा, बेलगाम, बेंगलुरु, भरतपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, बोइसर, बूंदी, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, दावनगेरे, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, धुले, गोरखपुर, हापुड़, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जलगांव, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मंडीखेड़ा, मुरादाबाद, मैसूर, नवी मुंबई, पलवल, पटियाला, प्रयागराज, पुदुकोट्टई, रामनगर, रोहतक, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सूरत, तंजावुर, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, वापी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार आदि 77 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
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