बढ़ते प्रदूषण से त्रस्त दिल्ली-एनसीआर, गाजियाबाद में बढ़कर 346 पर पहुंचा एक्यूआई

दिल्ली में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 226 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 263 पर पहुंच गया।
बढ़ते प्रदूषण से बिगड़े हालात, बीमार, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सांस लेना हुआ दुश्वार; फोटो: आईस्टॉक
बढ़ते प्रदूषण से बिगड़े हालात, बीमार, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सांस लेना हुआ दुश्वार; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर दमघोंटू प्रदूषण की चपेट में है, जहां गाजियाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा और एक्यूआई 346 तक पहुंच गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है।

  • दूसरी तरफ देश में पुदुचेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 22 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गाजियाबाद की तुलना पुदुचेरी से करें तो वहां स्थिति 15.7 गुणा खराब है।

  • इससे पहले कल देश में ग्रेटर नोएडा की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 313 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 28 अंकों के उछाल के साथ ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 341 तक पहुंच गया।

  • नोएडा और दिल्ली में भी प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जबकि दिल्ली का एक्यूआई 263 तक पहुंच गया, मतलब कि वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।

  • सरकारी आंकड़ों के अनुसार 241 शहरों में से महज 24 शहरों में ही हवा ‘बेहतर’ है, जबकि बड़ी संख्या में शहर संतोषजनक या मध्यम श्रेणी में हैं।

  • कुल मिलाकर देशभर में प्रदूषण का असंतुलन बढ़ रहा है, लेकिन एनसीआर क्षेत्र इसकी सबसे गंभीर मार झेल रहा है, जहां हवा में महीन कणों (पीएम2.5 और पीएम10) की अधिकता स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 17 अप्रैल 2026 को देश में गाजियाबाद सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 346 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 308 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 38 अंकों का उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि गाजियाबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। गाजियाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 650 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में पुदुचेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 22 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गाजियाबाद की तुलना पुदुचेरी से करें तो वहां स्थिति 15.7 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में ग्रेटर नोएडा की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 313 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 28 अंकों के उछाल के साथ ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 341 तक पहुंच गया।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 226 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 263 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 37 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर 'खराब' श्रेणी में बनी हुई है।

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में उछाल आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 155 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 187 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 17 अप्रैल 2026 को 241 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 10 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 37.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 9.1 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 5.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 12.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 16.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (341) दूसरे जबकि नोएडा (292) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह रोहतक चौथे स्थान पर है। सिंगरौली-चरखी दादरी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 290 और 274 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

बागपत (273) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में हापुड़ (269), बल्लभगढ़ (268) और दिल्ली (263) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तरप्रदेश के पांच शहर (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, बागपत) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि रोहतक, चरखी दादरी, भिवाड़ी, गुरुग्राम, मुजफ्फरनगर, फरीदाबाद, जींद, करनाल, नारनौल, मंगुराहा, लखनऊ, धारूहेड़ा, नंदेसरी, बिलीपाड़ा, कानपुर, अंबाला, बहादुरगढ़, बर्नीहाट (असम), गुम्मिडीपूंडी, वाराणसी, गया, नागपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, सिंगरौली, बागपत, हापुड़, बल्लभगढ़, दिल्ली, बुलंदशहर, हिसार, टोंक, कुरुक्षेत्र, वातवा, बठिंडा, सवाई माधोपुर, हनुमानगढ़, खुर्जा, झुंझुनू, आगरा, बीकानेर, बद्दी, भीलवाड़ा, पीथमपुर, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, चूरू, सीकर, बर्नीहाट (मेघालय), बारबिल, मुरादाबाद, गांधीनगर, दमोह, देवास, पाली, अहमदाबाद, मेहसाणा, प्रतापगढ़, यादगीर, अलवर, बूंदी, उदयपुर, कैथल, अजमेर, सोनीपत, अगरतला, पटियाला, वृंदावन, नागौर, वडोदरा, विशाखापत्तनम आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 10 फीसदी यानी महज 24 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, भिवानी, चेन्नई, एलुरु, गंगटोक, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मंगलौर, नलबाड़ी, नेल्लोर, पंपोर, पुदुचेरी, रूपनगर, सांगली, शिलांग, शिवमोगा शामिल हैं।

इसी तरह देश के 127 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेगूसराय, बेलगाम, बेतिया, भागलपुर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कोयंबटूर, कटक, दौसा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कलबुर्गी, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरई, महाड, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 74 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अंबाला, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बहादुरगढ़, बारां, बारबिल, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बूंदी, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, देवास, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिसार, जबलपुर, जयपुर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, कैथल, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडीदीप, मंगुराहा, मेहसाणा, मुरादाबाद, नागौर, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, पाली, पटियाला, पीथमपुर, प्रतापगढ़, सागर, सवाई माधोपुर, सीकर, सोनीपत, टोंक, उदयपुर, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में बागपत, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, बुलंदशहर, चरखी दादरी, दिल्ली, गुरुग्राम, हापुड़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नोएडा, रोहतक, सिंगरौली, श्री गंगानगर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं ग्रेटर नोएडा (341) और गाजियाबाद (346) में स्थिति बेहद खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 241 में से महज 24 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 127 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 16 अप्रैल को यह आंकड़ा 120 दर्ज किया गया था।

74 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज भी गाजियाबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 346 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 308 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 38 अंकों का उछाल आया है। गाजियाबाद में आज भी स्थिति 'बेहद खराब' बनी हुई है।

इससे पहले कल देश में ग्रेटर नोएडा की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 313 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 28 अंकों के उछाल के साथ ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 341 तक पहुंच गया।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 226 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 263 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 37 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर 'खराब' श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में उछाल आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 155 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 187 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 17 अप्रैल को रोहतक चौथे स्थान पर है, वहीं ग्रेटर नोएडा (341) दूसरे, जबकि नोएडा (292) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 172, गाजियाबाद में 346, गुवाहाटी में 56, गुरूग्राम में 253, नोएडा में 292, ग्रेटर नोएडा में 341 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 68 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 168, चेन्नई में 48, चंडीगढ़ में 86, हैदराबाद में 79, जयपुर में 133 और पटना में 89 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 24 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अमरावती (आंध्रप्रदेश), बालासोर, बैरकपुर, भिलाई, भिवानी, चेन्नई, एलुरु, गंगटोक, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मंगलौर, नलबाड़ी, नेल्लोर, पंपोर, पुदुचेरी, रूपनगर, सांगली, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, टेन्सा, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बेगूसराय, बेलगाम, बेतिया, भागलपुर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कोयंबटूर, कटक, दौसा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कलबुर्गी, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरई, महाड, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, सासाराम, सतना, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सूरत, तालचेर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, विजयवाड़ा, विरार आदि 127 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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