दिल्ली ने ली राहत की सांस: दर्ज हुआ साल का सबसे साफ दिन, घटकर 88 पर पहुंचा एक्यूआई

04 मई 2026 को एक बार फिर देश में पानीपत सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 295 दर्ज किया गया
फोटो: विकास चौधरी
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सारांश
  • देश में वायु प्रदूषण के ताजा आंकड़ों ने एक साथ राहत और चिंता दोनों तस्वीरें पेश की हैं। 04 मई 2026 को दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन दर्ज हुआ, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 175 से गिरकर 88 पर पहुंच गया।

  • यह सुधार पिछले 24 घंटों में 87 अंकों का रहा, जिससे राजधानी की हवा ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आ गई। इसी तरह फरीदाबाद में भी स्थिति सुधरी और एक्यूआई 110 से घटकर 73 दर्ज किया गया।

  • हालांकि दूसरी ओर पानीपत एक बार फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर बना रहा, जहां एक्यूआई 295 दर्ज हुआ, जो ‘खराब’ श्रेणी में है। हालांकि इसमें मामूली सुधार जरूर हुआ, लेकिन हवा अब भी खतरनाक स्तर के करीब बनी हुई है, और पीएम2.5 कणों का दबदबा साफ देखा गया। वहीं आइजोल देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई मात्र 15 दर्ज हुआ।

  • कुल मिलाकर 224 शहरों में से केवल 17.4 फीसदी में हवा ‘बेहतर’ रही, जबकि 61.2 फीसदी शहरों में स्थिति संतोषजनक है।

  • करीब 21.4 फीसदी शहर अब भी चिंताजनक श्रेणी में हैं। राजस्थान के कई शहर शीर्ष प्रदूषित सूची में शामिल रहे, जबकि पीएम10 और ओजोन भी कई क्षेत्रों में समस्या बने हुए हैं।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 04 मई 2026 को एक बार फिर देश में पानीपत सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 295 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल पानीपत में सूचकांक 298 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में तीन अंकों का सुधार आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि पानीपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

पानीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,850 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पानीपत की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 19.6 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 175 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 88 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 87 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज मध्यम से संतोषजनक हो गई है।

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन आज 04 मई को दर्ज किया गया है, जब एक्यूआई 88 पर पहुंच गया। इससे पहले 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 110 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 73 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 04 मई 2026 को 224 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 17.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 61.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 21.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 5.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 3.8 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 13.5 फीसदी की कमी आई है। ऐसी ही स्थिति खराब हवा वाले शहरों की भी है, जहां कल से गिनती में 62.5 फीसदी की कमी रिकॉर्ड की गई, जोकि राहत की खबर है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में छपरा (232) दूसरे जबकि श्री गंगानगर (218) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह सवाई माधोपुर (187) चौथे स्थान पर है। राजकोट- भरतपुर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 176 और 174 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

जालोर (174) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में जैसलमेर (172), बांसवाड़ा (171), बूंदी (167) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के सात शहर (श्री गंगानगर, सवाई माधोपुर, भरतपुर, जालोर, जैसलमेर, बांसवाड़ा और बूंदी) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पानीपत, छपरा, राजकोट, बर्नीहाट (असम), वातवा, गुम्मिडीपूंडी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं जालोर, जैसलमेर, भीलवाड़ा, सिरोही, मेहसाणा, बल्लभगढ़, हनुमानगढ़, ग्वालियर, उदयपुर, बाड़मेर, जोरापोखर, चुरू, राजसमंद, नारनौल, जोधपुर, सीकर, जलगांव, गाजियाबाद, बहादुरगढ़, बर्नीहाट (मेघालय), कोटा, मेरठ, नागौर, प्रतापगढ़, गुरुग्राम, पटना, पलवल, पीथमपुर, सहरसा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 17.4 फीसदी यानी 39 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अंबाला, अंबरनाथ, बरेली, बैरकपुर, भागलपुर, भिलाई, बक्सर, चामराजनगर, छाल, फिरोजाबाद, गया, हावड़ा, कलबुर्गी, कानपुर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, पंचकुला, पेरुंदुरई, रायपुर, रायरंगपुर, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, श्रीनगर, उल्हासनगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 137 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बुलंदशहर, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, झांसी, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, खुर्जा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नोएडा, पंचगांव, परभनी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुदुचेरी, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सागर, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सूरत आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 45 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बूंदी, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चुरू, धनबाद, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कोटा, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, नागौर, नारनौल, पलवल, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, राजकोट, राजसमंद, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सिरसा, उदयपुर, वडोदरा, वातवा आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में छपरा, पानीपत और श्री गंगानगर में स्थिति ‘खराब’ है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 224 में से महज 39 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 137 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 03 मई को यह आंकड़ा 132 दर्ज किया गया था।

45 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर पानीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 295 दर्ज किया गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई है। इससे पहले कल पानीपत में सूचकांक 298 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में तीन अंकों का सुधार आया है। हालांकि वायु गुणवत्ता अभी भी खराब बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 175 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 88 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 87 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज मध्यम से संतोषजनक हो गई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 110 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 73 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 04 मई को सवाई माधोपुर चौथे स्थान पर है, वहीं छपरा (232) दूसरे, जबकि श्री गंगानगर (218) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 131, गाजियाबाद में 114, गुवाहाटी में 55, गुरूग्राम में 104, नोएडा में 86, ग्रेटर नोएडा में 89 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 53 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 56, चेन्नई में 83, चुरू में 126, हैदराबाद में 66, जयपुर में 96 और पटना में 102 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 39 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अंबाला, अंबरनाथ, बरेली, बैरकपुर, भागलपुर, भिलाई, बक्सर, चामराजनगर, छाल, फिरोजाबाद, गया, हावड़ा, कलबुर्गी, कानपुर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, पंचकुला, पेरुंदुरई, रायपुर, रायरंगपुर, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, श्रीनगर, उल्हासनगर, विजयपुरा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बारबिल, बारीपदा, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, झांसी, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, खुर्जा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नोएडा, पंचगांव, परभनी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुदुचेरी, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सागर, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, टोंक, तुमडीह, उज्जैन, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, यादगीर, यमुना नगर आदि 137 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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