

देश के ज्यादातर शहरों में 12 सितम्बर 2026 को हवा ने कुछ राहत दी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मंडी गोबिंदगढ़ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 157 दर्ज किया गया। यहां हवा में पीएम10 का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 240 फीसदी अधिक है।
इसके विपरीत कोरबा में एक्यूआई महज 13 रहा, यानी मंडी गोबिंदगढ़ की तुलना में प्रदूषण करीब 12 गुना अधिक था।
हालांकि देश के अन्य हिस्सों से राहत की खबर सामने आई। 11 सितम्बर की तुलना में साफ हवा वाले शहरों की संख्या 27.9 फीसदी बढ़ी, जबकि मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों में 60.5 फीसदी की कमी आई।
245 शहरों में 78 की हवा ‘बेहतर’, 152 की ‘संतोषजनक’ और 15 की ‘मध्यम’ श्रेणी में रही। राहत की सबसे बड़ी तस्वीर दिल्ली और फरीदाबाद में दिखी, जहां एक्यूआई क्रमशः 127 से घटकर 70 और 167 से घटकर 95 हो गया।
फिर भी चेन्नई, हिसार, बीकानेर और राजस्थान के कई शहरों में प्रदूषण चिंता का कारण बना हुआ है। यह उतार-चढ़ाव बताता है कि हवा में सुधार अभी स्थाई राहत नहीं, बल्कि मौसम के साथ एक अस्थाई बदलाव हो सकता है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 12 सितम्बर 2026 को देश में मंडी गोबिंदगढ़ सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 157 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (11 सितम्बर) को भी मंडी गोबिंदगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 157 ही दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि मंडी गोबिंदगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 240 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में कोरबा की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मंडी गोबिंदगढ़ की तुलना कोरबा से करें तो वहां स्थिति 12 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में मानेसर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 258 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 157 अंकों के भारी सुधार के साथ मानेसर में सूचकांक घटकर 101 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता खराब से 'मध्यम' श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 127 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 70 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 57 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक हो गई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-12 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से वायु गुणवत्ता में सुधार आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 167 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 95 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 72 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज एक्यूआई संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 12 सितम्बर 2026 को 245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 31.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 62 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 6.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 27.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 8.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 60.5 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है। दूसरी तरफ आज देश में एक भी शहर ऐसा नहीं है, जहां वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई हो।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में चेन्नई (141) दूसरे जबकि हिसार (134) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बीकानेर (122) चौथे स्थान पर है। खैरथल (116) – पीथमपुर (114) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
ग्रेटर नोएडा (110) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में वातवा (109), जोधपुर (107) और जालंधर (104) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (बीकानेर, खैरथल, जोधपुर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पीथमपुर, जालंधर, मानेसर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं मंडी गोबिंदगढ़, बीकानेर, खैरथल, ग्रेटर नोएडा, वातवा, बेंगलुरु और जोरापोखर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 31.8 फीसदी यानी 78 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में फिरोजाबाद, गंगटोक, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, इंदौर, झालावाड़, झांसी, कलबुर्गी, करौली, कारवार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नयागढ़, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 152 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जलना, जालोर, झुंझुनू, जींद, कडप्पा, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, करनाल, कटिहार, खोरा, खुर्जा, कोहिमा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, मछलीपट्टनम, महाड, मंडीदीप, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूर, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नेल्लोर, नोएडा, पाली, पलवल, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, रोहतक, रूपनगर, सागर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, शिवमोगा, सीकर, सिरोही आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 15 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें बद्दी, बेंगलुरु, बीकानेर, चेन्नई, धनबाद, ग्रेटर नोएडा, हिसार, जालंधर, जोधपुर, जोरापोखर, खैरथल, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, पीथमपुर और वातवा शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 245 में से 78 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 152 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 11 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 140 दर्ज किया गया था।
15 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 157 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (11 सितम्बर) को भी मंडी गोबिंदगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 157 ही दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।
इससे पहले कल देश में मानेसर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 258 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 157 अंकों के भारी सुधार के साथ मानेसर में सूचकांक घटकर 101 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता खराब से 'मध्यम' श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 127 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 70 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 57 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक हो गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से वायु गुणवत्ता में सुधार आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 167 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 95 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 72 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज एक्यूआई संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गया है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 12 सितम्बर को बीकानेर (122) चौथे स्थान पर है, वहीं चेन्नई (141) दूसरे, जबकि हिसार (134) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 68, गाजियाबाद में 67, गुवाहाटी में 54, गुरूग्राम में 70, नोएडा में 77, ग्रेटर नोएडा में 110 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 40 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 46, चेन्नई में 141, चंडीगढ़ में 29, हैदराबाद में 62, जयपुर में 60 और पटना में 57 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 78 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बल्लभगढ़, भिलाई, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, कोयंबटूर, दमोह, दौसा, देहरादून, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गंगटोक, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, इंदौर, झालावाड़, झांसी, कलबुर्गी, करौली, कारवार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नयागढ़, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, सांगली, सासाराम, सिलचर, सिलीगुड़ी, श्रीनगर, टेन्सा, त्रिशूर, तुमडीह, उल्हासनगर और विरार शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागपत, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बरबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दिल्ली, देवास, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जलना, जालोर, झुंझुनू, जींद, कडप्पा, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, करनाल, कटिहार, खोरा, खुर्जा, कोहिमा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, मछलीपट्टनम, महाड, मंडीदीप, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूर, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नेल्लोर, नोएडा, पाली, पलवल, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, रोहतक, रूपनगर, सागर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, शिवमोगा, सीकर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर और यमुना नगर आदि 152 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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