बदलते समीकरण: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ा प्रदूषण, गाजियाबाद में 219 पर पहुंचा एक्यूआई

245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से 18.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। 45.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 35.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक दर्ज किए गए हैं
देश की राजधानी दिल्ली में अपने बच्चे के साथ फुटपाथ पर आराम करती बेघर महिला; फोटो: आईस्टॉक
देश की राजधानी दिल्ली में अपने बच्चे के साथ फुटपाथ पर आराम करती बेघर महिला; फोटो: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • 12 मई 2026 को जारी सरकारी आंकड़ों ने एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ती हवा की तस्वीर सामने रखी है। देश के 245 शहरों के विश्लेषण में गाजियाबाद सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 219 दर्ज किया गया। यह एक दिन पहले के मुकाबले 33 अंक अधिक है और ‘खराब’ श्रेणी में आता है।

  • गाजियाबाद की हवा में घुले प्रदूषण के महीन कण इतने ज्यादा हैं कि यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 380 फीसदी ऊपर पहुंच चुका है।

  • दिल्ली और आसपास के शहरों में भी हालात चिंताजनक हैं। दिल्ली में एक्यूआई 24 घंटे में 39 अंक बढ़कर 170 पर पहुंच गया, जबकि फरीदाबाद में यह 180 दर्ज किया गया।

  • मेरठ (214), पानीपत (211), पीथमपुर, सिरसा और कुरुक्षेत्र भी देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। खास बात यह है कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में पांच अकेले उत्तर प्रदेश के हैं।

  • हालांकि देशभर की तस्वीर मिली जुली है। 18.4 फीसदी यानी 45 शहरों में हवा साफ रही, जबकि 45.7 फीसदी शहरों में स्थिति संतोषजनक दर्ज की गई। इसके बावजूद 35.9 फीसदी शहरों में हवा चिंता का कारण बनी हुई है।

  • आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि उत्तर भारत में गर्मी के साथ प्रदूषण का दबाव फिर तेजी से बढ़ने लगा है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 12 मई 2026 को देश में गाजियाबाद सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 219 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल गाजियाबाद में सूचकांक 186 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 33 अंकों का उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि गाजियाबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

गाजियाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 380 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में रामनाथपुरम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 20 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गाजियाबाद की तुलना रामनाथपुरम से करें तो वहां स्थिति 16.8 गुणा खराब है।

वहीं कल झुंझुनू में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 299 दर्ज किया गया। वहीं आज सूचकांक घटकर 151 पर पहुंच गया है। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण में 148 अंकों का भारी सुधार हुआ है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 131 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 170 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 39 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 149 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 180 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 12 मई 2026 को 245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 18.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 45.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 35.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 4.3 फीसदी का कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 20 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मेरठ (214) दूसरे जबकि पानीपत (211) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पीथमपुर चौथे स्थान पर है। सिरसा-कुरुक्षेत्र में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 206 और 201 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

नोएडा (198) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में ग्रेटर नोएडा (195), मुजफ्फरनगर (195) और पंचगांव (187) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मुजफ्फरनगर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पानीपत, कुरुक्षेत्र, मुजफ्फरनगर, पंचगांव, वातवा, करनाल, मंडीदीप, गुरुग्राम, चरखी दादरी, हाजीपुर, जींद, बर्नीहाट (असम), हनुमानगढ़, मानेसर, बहादुरगढ़, राजकोट, बागपत, हापुड़, वडोदरा, यमुना नगर, मंडी गोबिंदगढ़, खन्ना, जलगांव, किशनगंज, नंदेसरी, बल्लभगढ़, धारूहेड़ा, सहरसा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं गाजियाबाद, मेरठ, पीथमपुर, सिरसा, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, बीकानेर, सीकर, दिल्ली, दौसा, सिंगरौली, झुंझुनू, बुलंदशहर, कोटा, चुरू, रतलाम, टोंक, भिवाड़ी, जयपुर, भोपाल, भीलवाड़ा, ग्वालियर, देवास, बेगूसराय, मेहसाणा, बद्दी, चंद्रपुर, कल्याण, पाली, अलवर, बेलापुर, गांधीनगर, आगरा, रोहतक, अहमदाबाद, अंबाला, जबलपुर, जैसलमेर, भावनगर, नागौर, पटियाला, लखनऊ, अकोला, पटना आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 18.4 फीसदी यानी 45 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बरेली, बैरकपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलीपाड़ा, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, धनबाद, दुर्गापुर, गडग, गंगटोक, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोलकाता, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, नाहरलागुन, नयागढ़, पंपोर, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, रूपनगर, सिलचर, श्रीनगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 112 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कटक, दमोह, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जालोर, झांसी, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, खुर्जा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंचकुला, परभणी, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजसमंद, रामनगर, राउरकेला, सांगली, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 82 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अकोला, अलवर, अंबाला, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारां, बारीपदा, बेगूसराय, बेलापुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, चुरू, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गांधीनगर, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कल्याण, करनाल, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोटा, लखनऊ, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मानेसर, मेहसाणा, मुजफ्फरनगर, नागौर, नंदेसरी, नोएडा, पाली, पंचगांव, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, राजकोट, रतलाम, रोहतक, सागर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, श्री गंगानगर, टोंक, वडोदरा, वातवा, यमुना नगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में गाजियाबाद, मेरठ, पानीपत, पीथमपुर, सिरसा, कुरुक्षेत्र में स्थिति ‘खराब’ है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 245 में से 45 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 112 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 11 मई को यह आंकड़ा 117 दर्ज किया गया था।

82 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज गाजियाबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 219 दर्ज किया गया। इससे पहले कल गाजियाबाद में सूचकांक 186 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 33 अंकों का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही आज गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता मध्यम से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।

वहीं कल झुंझुनू में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 299 दर्ज किया गया। वहीं आज सूचकांक घटकर 151 पर पहुंच गया है। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण में 148 अंकों का भारी सुधार हुआ है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 131 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 170 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 39 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 149 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 180 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 12 मई को पीथमपुर  चौथे स्थान पर है, वहीं मेरठ (214) दूसरे, जबकि पानीपत (211) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 125, गाजियाबाद में 219, गुवाहाटी में 54, गुरूग्राम में 178, नोएडा में 198, ग्रेटर नोएडा में 195 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 69 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 102, चेन्नई में 97, चंडीगढ़ में 74, हैदराबाद में 71, जयपुर में 133 और पटना में 101 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 45 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अमरावती (आंध्रप्रदेश), आरा, बागलकोट, बालासोर, बरेली, बैरकपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलीपाड़ा, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, धनबाद, दुर्गापुर, गडग, गंगटोक, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोलकाता, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, नाहरलागुन, नयागढ़, पंपोर, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, रूपनगर, सिलचर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, विजयपुरा, विरुधुनगर, विशाखापत्तनम शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अजमेर, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, बदलापुर, बारबिल, बाड़मेर, बठिंडा, बेंगलुरु, भागलपुर, भिवंडी, भिवानी, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, बक्सर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कटक, दमोह, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जालोर, झांसी, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, खुर्जा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंचकुला, परभणी, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजसमंद, रामनगर, राउरकेला, सांगली, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, सूरत, तालचेर, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 112 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं  

Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in